21-27 सितंबर/September, 2020

‘सप्ताह का प्रादर्श’
(21 से 27 सितंबर, 2020)

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

सतसंग/सुतसांग
तंत्री वाद्य

सतसंग काष्ठ के एक ही टुकड़े से बना चार तारों वाला तंत्री वाद्य है। यह कलिम्पोंग, पश्चिम बंगाल के लेपचा समुदाय से संबंधित है। सतसंग की उत्पत्ति राजा राॅन्गबंग पुनु के शासनकाल में एक शक्तिशाली आखेटक सातो से मानी जाती है। जब सातो ने यह देखा कि बांसो को आपस में रगड़ने से मधुर ध्वनि निकलती है तब उन्हें इस वाद्य यंत्र को बनाने का विचार आया। घर पहुंच कर उन्होंने बांस की पतली खपच्चियों से गज(bow) बना कर इस मनोहर वाद्य यंत्र को बनाना प्रारंभ किया। उनके द्वारा रचे जाने के कारण ही इस वाद्य यंत्र को उनके नाम से जाना जाता है। इस वाद्य यंत्र की अनूठी विशेषता यह है कि इसमें ध्वनि को प्रतिध्वनित करने के लिए चमड़े की झिल्ली के स्थान पर लकड़ी की पतली झिल्ली का उपयोग किया गया है।

आरोहण क्रमांक :  98.236
स्थानीय नाम: सतसंग/सुतसांग, तंत्री वाद्य
जनजाति/समुदाय : लेपचा
स्थान: कलिमपोंग, पश्चिम बंगाल
माप: ऊंचाई : 53 सेमी;  चैड़ाई: 17 सेमी;

श्रेणी :’A‘ 

OBJECT OF THE WEEK
(21st to 27th September, 2020)

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

Satsang/Sutsaang
Four-stringed musical instrument

Satsang is a four-stringed musical instrument made of a single piece of wood. It belongs to the Lepcha community of kalimpong, West Bengal. The origin of Satsang is traced back to a mighty hunter Sato during the reign of King Rongbung Punu. Sato developed an idea of making a musical instrument when he noticed a sweet tune coming out from the bamboo being rubbed against each other. He made a bow from a thinner split of bamboo while reaching home and started deriving this fascinating instrument, and referring to his creation, the instrument is said to have beckoned using the name of the creator. The unique feature of this instrument is that it contains a thin wooden membrane in place of leather to resonate the sound.

Accession No.:   98.236
Local Name – Satsang/Sutsaang, Four-stringed musical instrument
Tribe/Community – Lepcha
Locality – Kalimpong, West Bengal
Measurement  -Height -53 cm, Width-17 cm
Category –  ‘A’

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