28 सितंबर से 4 अक्टूबर, 2020 तक/ 28th September to 4th October, 2020

‘सप्ताह का प्रादर्श’
(28 सितंबर से 4 अक्टूबर, 2020 तक)

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

तंजावूर कल ओवियम – भगवान कृष्ण को दर्शाती तंजावूर चित्रकारी

इस तंजावूर कल ओवियम (तंजावूर चित्रकारी) में भगवान कृष्ण को दो परिचारिकाओं के साथ एक आसन पर बैठे हुए दिखाया गया है। इनमें से एक मोर पंख का चँवर पकड़े हुए है और दूसरी भगवान कृष्ण को एक कटोरे में मक्खन अर्पित कर रही हैं। तंजावूर पेंटिंग में सामान्य तौर पर ज्वलंत लाल, गहरे हरे, चाक जैसे सफेद, फ़िरोज़ा नीले रंगों और सोने की पन्नी और कांच के  मनकों के साथ कभी-कभी कीमती पत्थरों का उपयोग भी किया जाता है। तंजावूर और तिरुचि का राजू समुदाय, जिसे चित्रागर के नाम से जाना जाता है और मदुरई का नायडू समुदाय पारंपरिक कलाकार हैं जो तंजावूर शैली में चित्रों के निर्माण का कौशल रखते हैं। ऐसा कहा जाता है कि यह कलाकार मूल रूप से आंध्र के “रायलसीमा” क्षेत्र से आए थे। यह चित्र विभिन्न विषय-वस्तुओं पर बनाए गए और इनकी गुणवत्ता संरक्षक की रुचि, अति-आवश्यकता, प्रभाव और वित्तीय क्षमता के आधार पर भिन्नता दर्शाती थी। यह कला रूप एक पवित्र कार्य था जिसे कुशल कारीगरों द्वारा यथासंभव अनुष्ठानिक शुद्धता और विनम्रता के साथ संपादित किया जाता था। आमतौर पर तंजावूर कल ओवियम (तंजावूर चित्रकारी) एक कैनवास पर बनाई जाती थी, जिसे अरेबिक गोंद के साथ लकड़ी (कटहल या सागौन) की एक तख़्ती पर चिपकाया जाता था। अतीत में, कलाकार प्राकृतिक रंगों जैसे वानस्पतिक और खनिज रंगों का उपयोग करते थे, जबकि वर्तमान में कलाकार रासायनिक रंगों का उपयोग करते हैं।

आरोहण क्रमांक :  98.1002
स्थानीय नाम: तंजावुर कल ओवियम – भगवान कृष्ण को दर्शाती तंजावूर चित्रकारी
जनजाति/समुदाय : नागरथार/चेट्टियार
स्थान: कराईकुडी, शिवगंगा, तमिलनाडु  
माप: ऊंचाई : 158 सेमी;  चैड़ाई: 127 सेमी;

श्रेणी :’AA‘ 

OBJECT OF THE WEEK
(28th September to 4th October, 2020)

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

Tanjavoor Kal Ovium (painting) – Tanjavoor painting depicting the image of Lord Krishna

This Tanjavoor Kal Ovium (Tanjavoor Painting) depicts Lord Krishna seating on a couch flanked by two female attendants; one holding a chouri of peacock feather and the other is portrayed with a bowl of butter offering to lord krishna. Tanjavoor Kal Ovium (Tanjavoor Painting consists generally of vivid red, deep-green, chalk-white, turquoise-blue and the lavish use of gold foil and inset of glass beads. Sometimes precious stones are also used in the paintings. The Raju community of Tanjavoor and Tiruchi, well known as Chitragara and the Naidu community of Madurai are the traditional artists who skilfully execute paintings in the Tanjavoor style. It is said that the artists originally migrated from “Rayalseema” region of Andhra. Paintings were made on different themes and the qualities of which differs according to the patron’s interest, urgency and most importantly influence and financial capacity. However, the art was by and large a sacred task to be performed with a reasonable degree of ritual purity and humility by the master craftsmen. Generally, Tanjavoor Kal Ovium (Tanjavoor Painting was made on a canvas, pasted over a plank of wood (jack-fruit or teak) with Arabic gum. In the past, artists used natural colours like vegetable and mineral dyes, whereas the present day artists use chemical paints.

Accession No.:   98.1002
Local Name – Tanjavoor Kal Ovium (painting) – Tanjavoor painting depicting the image of Lord Krishna
Tribe/Community – Nagarthar / Chettiyar
Locality – Karikudi, Shivganga, Tamil Nadu
Measurement  -Height -158 cm, Width-127 cm
Category –  ‘AA’

तंजावुर कल ओवियम – भगवान कृष्ण को दर्शाती तंजावूर चित्रकारी
Tanjavoor Kal Ovium (painting) – Tanjavoor painting depicting the image of Lord Krishna
तंजावुर कल ओवियम – भगवान कृष्ण को दर्शाती तंजावूर चित्रकारी
Tanjavoor Kal Ovium (painting) – Tanjavoor painting depicting the image of Lord Krishna