ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-16

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला -16
01 अक्टूबर, 2020

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

कोविल काडू- तमिलनाडु के पुनीत वन

प्रकृति की आराधना, भारत की प्राचीन पंरपरा का अंग है। पुनीत वन जो कि प्रकृति पूजा का ही एक रूप है, तमिलनाडु के हर गांव के परिदृश्य का हिस्सा है। इन उपवनों मे कई बार मंदिर भी होते हैं। सर्पदेव इन सभी उपवनों में मूल देवता के रूप में प्रतिष्ठित हैं, किन्तु कई स्थानों पर इनके साथ-साथ अय्यप्पन, मुरूगन एवं अम्मन की भी पूजा अर्चना-होती है। पूर्णिमा के अवसर पर विभिन्न समुदायों के लोग मिलकर यहां पूजा करते हैं। ग्रामवासियों का विश्वास है कि यही वन परोक्ष या अपरोक्ष रूप से उनकी आजीविका का निर्वाह करते हैं, साथ ही प्राकृतिक विपदाओं से भी रक्षा करते हैं। कोविल काडू में उगने वाले अनेक पेड़-पौधों मे बेल, गुग्गल, महुआ, नारियल, पांरिजात, आम, हर्रा, चक्षु, आंवला आदि प्रमुख हैं। प्राकृतिक रूप से लगे इन वनों की रक्षा कर उसे पुनीत वन का दर्जा दिया जाता है तथा अनेक बार ये उपवन की तरह समुदायों द्वारा लगाये भी जाते हैं, जिन्हें थिरूण्डवन कहते हैं। इन उपवनों में लगे फूल केवल देवताओं को चढ़ाने के लिये ही प्रयुक्त होते हैं। ऐसे उपवन श्रीरंगम, चिदम्बरम, सुंचीन्द्रम, मदुराई तथा श्री विल्लपुथुर में देखे जा सकते हैं। तमिलनाडु के पुनीत वनों से जुडे देवताओं की पाषाण मूर्तियां तथा उनके अनुष्ठानों से जुड़ी विभिन्न वस्तुओं का प्रदर्शन तथा तमिलनाडु से लाये गये विभिन्न पेड-पौधों की प्रजातियों के रोपण के साथ कोविल काडू की स्थापना संग्रहालय परिसर में की गयी है।

Online Exhibition Series-16
01st October, 2020

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

Kovil Kadu – Sacred Groves of Tamilnadu

Nature worship is an ancient Indian tradition. Sacred grove which represents one form of nature worship, is a component of the village land scape in Tamil Nadu. Many groves have temples within them. While the residing deity in most of the sacred groves is the snake god, ‘Ayyappan’, ‘Murugan’ and ‘Amman’ are also worshipped in some places. On full moon days, communities offer prayers collectively. The villagers believe that the groves provide livelihood directly or indirectly and restrict natural catastrophes. Trees, shrubs & herbs, climbers and lianas like Aegle marmelos Corr. (bel), Alianthus malabarica Wall (gugul), Bassia latifolia Roxb (Mahua), Cocos nucifera L. (coconut), Erythrina indica Lam (parijata), Mangifera indica L. (mango), Terminalia spp. (harra), Cassia tora L. (chaksu), Ervatamia spp., Parviflora Rox. (maula), are grown in Kovil-Kadus. Apart from natural sacred groves, where natural vegetation has been protected, there are sacred gardens, locally created. These are called Thirundavanas. These gardens are meant exclusively for growing flowers for the deity. Such gardens are found in Srirangam, Chidambaram, Suchindram, Madurai and Srivilliputhur. The Kovil- Kadu comprises sculptures of Tamil folk deities and saplings from Tamilnadu.

Deities of Kovil Kadu
Devotee pulling the chariot with a hook in the back
Devotees from Tamilnadu pulling Chariot during Sacred Grove festival at IGRMS Campus.
Entrance of Kovil Kadu Sacred Grove at IGRMS
Group of Deities of Kovil Kadu
Offerings by local people to Deities of Kovil Kadu at IGRMS
Participation during ritual performance
Participation of visitors during Chariot pulling ritual of the festival
Religious rituals by the priest
Ritual performance during the festival
Huge gathering of devotees and visitors during the festival at IGRMS campus
Introductory video on the Kovil Kadu – Sacred Groves of Tamilnadu – Open air Exhibition
at Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya premises