ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-18

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला -18
15 अक्टूबर, 2020

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

वांचो

वांचो नागा जनजाति के रूप में जाने जाते हैं। वे उत्तरी नागालैंड सीमा पर पूर्वी अरुणाचल प्रदेश के लोंगडिंग, कानुबारी, पोंचाउ और वाक्का क्षेत्र में लगभग 50 गांवों में फैले हुए हैं और म्यानमार के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं। ऐसा माना जाता है कि वे नागालैंड से इस स्थान पर आए हैं। यह क्षेत्र पहाड़ियों, घने जंगलों, वनस्पतियों और जीवों से समृद्ध है। गाँव सघन आबादी वाले हैं, पहाड़ियों के ऊपर और ढलानों पर स्थित हैं। गांवों को दो या दो से अधिक भागों में विभाजित किया जाता है, जिसे खेल कहा जाता है, जिनमें सामान्य लोग, मुखिया के घर और युवागृह होते हैं।

मकान की एक छोर पर अर्ध-वृत्ताकार के साथ आयताकार आकार में बने होते हैं। आधी संरचना जमीन पर और आधा मचान पर बना होता है। कुछ क्षेत्रों में भौगोलिक संरचना के आधार पर यह पूर्ण रूप से जमीन पर बनाया जाता है। घर में एक प्रवेश कक्ष होता है जिसमें धन कूटने की जगह\, लॉग ड्रम, एक पक्ष और खाना पकाने के लिए चूल्हा होता है। मकान का वह हिस्सा जो मचान पर बना होता है उसमें पुरुषों का एक कमरा, एक या दो चूल्हे और शिकार की ट्राफियां, कपाल और ढाल रखने की जगह होती है। यह हिस्सा सामान्यतः छत व एक बरामदे में समाप्त होता है। पेड़ का तने से बनी सीढ़ी बरामदे को गांग से जोड़ती है।  

प्रत्येक घर में मध्य के स्तंभ में एक अनुष्ठान स्थान होता है। वांचो कई देवी-देवताओं में विश्वास करते हैं। उन्हें अपकारी और परोपकारी आत्माओं में दृढ़ विश्वास है। वांचो में से कुछ ने ईसाई धर्म अपना लिया है और कई गांवों में चर्च देखने को मिलते वांचो लोगों का जीवन त्यौहारों से भरा है और उनका मुख्य त्यौहार ओरिया है। इसे अच्छी फसल की कामना से मनाया जाता है।

निर्माण सामग्री में मुख्य रूप से लकड़ी, बल्ली और खंभे, छत के लिए बांस और उठाए गए फर्श के लिए बांस की चटाइयाँ और छत के लिए ताड़ के पत्ते का उपयोग किया जाता है। मकान के मध्य के स्तंभ छत से ऊपर तक निकले होते है। अधिकांश सामग्री जैसे बड़े लॉग ड्रम, राइस पाउंडिंग टेबल, चावल सुखाने की मेज, बिस्तर और स्टूल लकड़ी के एक ही टुकड़े से बनाया जाता है। एक मुखिया का घर अधिक बड़ा होता है तथा केन्द्रीय स्तंभ पर नक्काशी होती है।

वांचो झूम खेती करते हैं। वे लकड़ी की नक्काशी के विशेषज्ञ हैं और टोकरी, मिट्टी के बर्तन बनाने और बुनाई में भी कुशल हैं। वे एक स्थानीय वनस्पति की मदद से बकरी के बालों को रंगते हैं और इन्हें विभिन्न वस्तुओं से जोड़कर सुंदर रूप प्रदान करते हैं।

Online Exhibition Series-18
15th October, 2020

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

The Wanchos

The Wanchos are Popularly Known as a Naga Tribe. They are spread in nearly 50 Villages in Longding, Kanubari, Pongchau and Wakka area of eastern Arunachal Pradesh bordering Northern Nagaland and sharing international boundary with Myanmar. It is believed that they migrated to this place from Nagaland. The area is mountainous and covered with dense forests and rich in flora and fauna. The villages are thickly populated and situated on the top of the hills and sometimes on a slope. Villages are divided in two or more divisions known as khel having houses for general people, chief and dormitories.

Houses are made in rectangular shape with one end semi-circular. Half of the structure is built on the ground and half on raised platform on piles. Depending on the geographical structure in some areas it is entirely built on the ground. The house consists of an entrance room with a place for pounding rice, log drum, a central women’s compartment with sleeping rooms and a fire place for cooking food. The structure which is made on the raised platform has a common men’s room with sleeping rooms, one or two fireplaces and a place for keeping hunting trophies, skulls, gongs and shields.. This raised structure finally ends in a veranda continuing as terrace. A tree trunk staircase connects the veranda with the yard

In every house there is a ritual place in one of the central pillars of the house. The Wanchos believe in many gods and goddesses. They have a strong faith in malevolent and benevolent spirits.  Some of the Wanchos have adopted Christianity and the Church has been constructed in many Villages. The life of the Wanchos is full of festivals and their main festival is Oriya. It is celebrated for a good harvest.   

The building materials are wood mainly used as balli and pillars, bamboo for roof and woven flattened bamboo for the floor of the raised platform, and palm leaves for the thatched roof. The central posts reach above the ridge. Most of the articles like large log drum, rice pounding table, rice drying table, beds and stools are made from single piece of wood. A chief’s house is larger and has wood-carvings on the central posts in the common room.

The Wanchos practice Jhum cultivation. They specialise in wood carving and are also skilled in basketry, pottery and weaving. They dye goat’s hair with the help of a local herb and attach it to various objects to give it a beautiful look.

Introductory Video on the making of the Trasitional Wancho House at IGRMS Bhopal ,
in Tribal Habitat Open Air Exhibition under the North East India segment

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