19-25 अक्टूबर/October, 2020

‘सप्ताह का प्रादर्श’
(19 से 25 अक्टूबर, 2020 तक)

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

मज्जस, लकड़ी की अलंकृत अलमारी

मज्जस  लकड़ी की एक अलंकृत एवं आयताकार अलमारी है जिसे गुजरात के अहीर समुदाय द्वारा विवाह समारोह में दहेज के रूप में दिया जाता है। इस अलमारी का अग्र भाग तीन आयताकार खंडों में विभक्त है जिनमें कुरेद कर बनाए गए बेल बूटों पर  गोल, चौकोर तथा रंगीन दर्पण जड़े गए हैं। इनमें से बीच वाले भाग में दो कपाट हैं।दोनों ओर सिर पर कलश लिये दो महिलाओं की आकृति बनी हैं। निचले हिस्से को कली के रूपांकनों से अलंकृत किया गया है। इस अलमारी में चार पाये हैं जो  लोहे की पतली जालीदार पट्टियों से मढ़े हैं और अलमारी के किनारों पर भी नियमित अंतराल में लोहे की पट्टियां लगी हैं।   इस अलमारी का उपयोग सामान रखने के लिए किया जाता है और साथ ही इसकी समतल उपरी सतह दरी – चादर, बिछात आदि रखने के लिए उपयोग की जाती है ।

आरोहण क्रमांक :  90.576
स्थानीय नाम: मज्जस, लकड़ी की अलंकृत अलमारी
जनजाति/समुदाय : अहीर
स्थान: सपेडा, कच्छ, गुजरात
माप: ऊंचाई : 111.5 सेमी।, चौड़ाई – 44 सेमी।

श्रेणी : ’A‘ 

OBJECT OF THE WEEK
(19th to 25th October, 2020)

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

MAJJUS, a decorative wooden almirah

Majjus is a decorative dowry chest used by the Ahir community of Gujarat during marriage ceremony. The rectangular wooden chest stands on four legs and has carving of floral designs on the entire facade. The front of the chest is divided into three rectangular sections with floral incisions and coloured circular and rectangular shaped mirrors are inlayed within the floral incisions. Out of these the central one has two doors. The front legs are decorated by perforated thin iron plates fixed in circular manner. The edge of the chest is lined with iron strips at regular intervals. Two female figures are depicted on either side carrying pot on their head. The base is decorated by a row of bud-shaped motifs. It is used as a storage cupboard as well as its flat top serves as a stand for pile of mattresses. This typical chest among the Ahirs is used to give as a dowry item.

Accession No.:   90.576
Local Name – MAJJUS,
a decorative wooden almirah
Tribe/Community – Ahir
Locality – Sapeda, Kutch, Gujarat
Measurement  – Height –  111.5 cm., Width
– 44 cm
Category –  ‘A’