25 अक्टूबर से 01 नवम्बर, 2020 तक/25th October to 01st November, 2020

‘सप्ताह का प्रादर्श’
(25 अक्टूबर से 01 नवम्बर, 2020 तक)

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

तंजावूर कल ओवियम
भगवान राम के शाही दरबार को दर्शाती तंजावूर चित्रकारी

इस तंजावूर पेंटिंग में भगवान राम के शाही दरबार के दृश्य को दर्शाया गया है । इस चित्र में राम और सीता एक आसन पर बैठे हैं, तथा लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न उनके पार्श्व में छत्र और चंवर पकड़े हुए खड़े हैं । हनुमान को भगवान राम की चरण वंदना करते दिखाया गया है । इस पेंटिंग में दरबारियों, संतों और अन्य वानरों को भी चित्रित किया गया है । पेंटिंग के निचले हिस्से पर भगवान विष्णु के दस अवतारों को अलग अलग दर्शाया गया है।  

तंजावूर पेंटिंग में सामान्य तौर पर ज्वलंत लाल, गहरे हरे, चाक जैसे सफेद, फ़िरोज़ा नीले रंगों और सोने की पन्नी और कांच के  मनकों के साथ कभी-कभी कीमती पत्थरों का उपयोग भी किया जाता है। तंजावूर और तिरुचि का राजू समुदाय, जिसे चित्रागर के नाम से जाना जाता है और मदुरई का नायडू समुदाय पारंपरिक कलाकार हैं जो पारंपरिक तंजावूर शैली में चित्रों के निर्माण का कौशल रखते हैं। ऐसा कहा जाता है कि यह कलाकार मूल रूप से आंध्र के “रायलसीमा” क्षेत्र से आए थे। यह चित्र विभिन्न विषय-वस्तुओं पर बनाए गए और इनकी गुणवत्ता संरक्षक की रुचि, अति-आवश्यकता, प्रभाव और वित्तीय क्षमता के आधार पर भिन्नता दर्शाती थी। यह कला रूप एक पवित्र कार्य था जिसे कुशल कारीगरों द्वारा यथासंभव अनुष्ठानिक शुद्धता और विनम्रता के साथ संपादित किया जाना होता था। आमतौर पर तंजावूर पेंटिंग एक कैनवास पर बनाई जाती थी, जिसे अरेबिक गोंद के साथ लकड़ी (कटहल या सागौन) की एक तख़्ती पर चिपकाया जाता था। अतीत में, कलाकार प्राकृतिक रंगों जैसे वानस्पतिक और खनिज रंगों का उपयोग करते थे, जबकि वर्तमान में कलाकार रासायनिक रंगों का उपयोग करते हैं।

आरोहण क्रमांक :  98.1003
स्थानीय नाम: तंजावुर कल ओवियम – भगवान राम के शाही दरबार को दर्शाती तंजावूर चित्रकारी
जनजाति/समुदाय : नागरथार/चेट्टियार
स्थान: कराईकुडी, शिवगंगा, तमिलनाडु  
माप: ऊंचाई : 187 सेमी;  चैड़ाई: 130 सेमी;

श्रेणी :’AA‘ 

OBJECT OF THE WEEK
(25th October to 01 November, 2020)

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

Tanjavoor Kal Ovium (painting)
Tanjavoor painting depicting the scene of royal court of Lord Rama

This Tanjavoor painting depicts the scene of royal court of Lord Rama. In this painting Lord Rama and Sita are shown sitting in a couch and Laxman with Bharat and Shatrughna holding chhatra and chouri respectively standing behind them. Hanuman is shown holding the foot of lord Rama. Courtiers, saints and other vanaras are also depicted in this painting. On the lower part of the painting ten incarnations of lord Vishnu is depicted in separate niches.

The Tanjavoor painting consists generally of vivid red, deep greens, chalk white, turquoise blue and the lavish use of gold foil and inset glass beads. Sometimes precious stones are also used in the paintings. The Raju community of Tanjavoor and Tiruchi, known as Chitragara and the Naidu community of Madurai are the traditional  artists who skifully executed paintings in the Tanjavoor style. The artists originally migrated from “Rayalseema” region of Andhra. Painting was made on different subjects which varied in quality depending upon the patron’s interest, urgency and most importantly influence and financial capacity. However, the art was by and large a sacred task to be performed with a reasonable degree of ritual purity and humility by the master craftsmen. Generally, Tanjavoor painting was generally made on a canvas, pasted over a plank of wood (jackfruit or teak) with Arabic gum. In the past, artists used natural colours like vegetable and mineral dyes, whereas the present day artists use chemical paints.

Accession No.:   98.1003
Local Name – Tanjavoor Kal Ovium (painting) – Tanjavoor painting depicting the scene of royal court of Lord Rama
Tribe/Community – Nagarthar / Chettiyar
Locality – Karikudi, Shivganga, Tamil Nadu
Measurement  -Height -187 cm, Width-130 cm
Category –  ‘AA’

तंजावूर कल ओवियम भगवान राम के शाही दरबार को दर्शाती तंजावूर चित्रकारी
Tanjavoor Kal Ovium (painting)Tanjavoor painting depicting the scene of royal court of Lord Rama