ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-20

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला -20
29 अक्टूबर, 2020

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

कोठी

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय की हिमालय ग्राम मुक्ताकाश प्रदर्शनी में हिमाचल प्रदेश का एक पारंपरिक आवास

संग्रहालय की हिमालय ग्राम नामक मुक्ताकाश प्रर्दशनी में प्रदर्शित कोठी नामक आवास को ग्राम-देलठ जिला -शिमला, हिमाचल प्रदेश से सन् 1996 में संग्रहित किया गया था। यह देलठ के तत्कालीन राजा के महल का एक हिस्सा है जिसे खोलकर इसकी पूरी सामग्री को संग्रहालय में लाया गया तथा इसको हिमाचल के कलाकारों द्वारा ही पुर्नसंयोजित किया गया। यह दो मंजिला मकान अपने आप में बड़ा ही रोचक, अनोखा व अपने आप में एक अलग तरह का लकड़ी एवं पत्थरों से बना घर है। इसकी दीवारें पूरी तरह से तराशे हुये पत्थरों की बनी हुई है तथा ऊपरी मंजिल का फर्श लकड़ी का बना हुआ है। छत में लकड़ियों के ऊपर पत्थर की स्लेट रखी हुई हैं। घर की पहली मंजिल पर दाॅयी व बाॅयी ओर लगभग 2 फीट का लकड़ी का बरामदा निकला हुआ है, जिसे बैठने के लिये उपयोग में लाया जाता है। घर के अन्दर ही अन्दर ऊपरी मंजिल में जाने के लिये लकड़ी की सीढ़ियों का रास्ता बना हुआ होता है जिसे प्रमुखतः बारिश या बर्फ गिरने के समय प्रयोग में लाया जाता है। घरों के सामने लकड़ी एवं पत्थर के बने द्वारों को प्रचलन है जिसे परोल कहा जाता है जो कि घर-आंगन की खूबसूरती को बढ़ाता है।

         संग्रहालय में यह आवास लोक ज्ञान और परम्परा का एक बेजोड़ नमूना है। यह आवास दर्शाता है कि हिमालयी क्षेत्रों की पारम्परिक वास्तुकला वहां के जलवायु तथा उपलब्ध संसाधनों पर आधारित है। इनकी निर्माण संरचना इस क्षेत्र मे निवासरत् लोगों के अनुकूल होती है।

         वर्तमान समय में पत्थर एवं लकड़ी के पुराने घरों का बनना लगभग बन्द हो गया है। इनकी जगह ईंट, सीमेन्ट व लोहे से बने मकानों ने ले ली है। धीरे-धीरे हिमालयी क्षेत्रो में प्रचलित यह पारम्परिक वास्तुकला लुप्त होती जा रही है।

Online Exhibition Series-20
29th October, 2020

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

KOTHI

A traditional house type of Himachal Pradesh in the Himalayan Village open air exhibition of IGRMS

This traditional house type exhibited in the ‘Himalayan Village’ open air exhibition of the IGRMS was collected from Delath village of Shimla district, Himachal Pradesh. This is one portion of the palace of the then king of Delath. It was brought to the museum along with all its material after dismantling and was reinstalled here by the artists from Himachal Pradesh itself. This double storied house is very interesting and unique and is made up of a different type of wood and stone. Walls of the house are made with cut stones whereas the upper floor is made of wood; the two layered ceiling consists of a wooden roof which is covered with stone slates. First floor of the house has nearly two feet wide wooden corridors in both left and right sides, and both sides are usually used for sitting purpose. There is a wooden staircase inside the house for access to the upstairs. It is mostly used during rains or snowfall.

The wooden and stone gate called Parol in front of the house is a common trend which enhances the beauty of house and courtyard.

This exhibit in the museum is a unique example of folk knowledge and tradition. This house also shows that the traditional architecture of Himalayan region is based on ecology and the available resources. Their construction is suitable to the people of the area. Construction of such old pattern stone and wood houses is almost vanished and replaced by the structures made of bricks, cement and steel. This traditional architecture knowledge prevalent in the Himalayan region is also on the verge of extinction.

Introductory video on the IGRMS – Online exhibition series- 20 :
KOTHI A traditional house type of Himachal Pradesh