ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-21

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला -21
05 नवम्बर, 2020

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

पारम्परिक तकनीक उद्यान
मुक्ताकाश प्रदर्शनी से
मखाना बनाने की प्रक्रिया

(मखाना तैयार करने की तकनीक/उपकरण)

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला के अंर्तगत इस बार आपका परिचय करा रहे हैं पारम्परिक तकनीक मुक्ताकाश प्रदर्शनी में प्रदर्शित ‘‘मखाना तैयार करने की पारम्परिक तकनीक ‘‘ से।

मानव संग्रहालय ने इस प्रदर्शनी को विकसित करने के लिये भारत के विभिन्न स्थानों से पारम्परिक तकनीक से संबंधित प्रादर्श संग्रहित करने का प्रयास किया है, जिनके माध्यम से हम दर्शकों को सरल समाजों के बौद्धिक व रचनात्मक कौशल से परिचय कराना चाहते हैं साथ ही इस तथ्य को रेखांकित कराना चाहते हैं कि, समकालीन जगत के तकनीकी वैभव में पारम्परिक तकनीक की एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

बिहार राज्य मखाना उत्पादन के लिये जाना जाता है। पारम्परिक रूप से मखाना तैयार करने का कार्य मुख्यतः दरभंगा, सीतामढ़ी, पूर्णिया और कटिहार आदि जिलों में किया जाता है। स्थानीय तौर पर ‘गुड़ी‘ नाम से प्रचलित मखाना बीज एक जलीय उत्पाद है, जो झीलों , तालाबों और नम स्थानों पर उपजाया जाता है। झीलों और तालाबों से ‘गुड़ी‘ प्राप्त करने के बाद इसे धूप में सुखाया जाता है। मखाना प्राप्त करने के लिये सूखे हुऐ ‘गुड़ी‘ बीजों को लोहिया (लोहे की कड़ाही) में भुना जाता है। भुने हुए गर्म बीजों को लकड़ी के लाॅग पर रखकर लकड़ी के ही सपाट हथौड़े से कूटा जाता है।

इस प्रक्रिया में बांस की विभिन्न आकार व प्रकार की टोकरियों के साथ अन्य पारम्परिक उपकरणों का उपयोग किया जाता है। ‘गाँज‘ (शंक्वाकार टोकरी) को झीलों व तालाबों से बीजों को निकालते समय, आका (बेलनाकार टोकरी) को बीजों को संधारित करने में व ‘डेली‘ (बेलनाकार टोकरी) को मखाना से छिलका हटाने में उपयोग किया जाता है। ‘लोहिया‘ (लोहे की कड़ाही) का सूखे बीजों को गर्म करने में, ‘पिटना‘ (लकड़ी का सपाट हथौड़ा) का गर्म बीजों को ‘पिरकट‘ (लकड़ी लाॅग) पर पीटने में, ‘लखरिया‘ (कछुऐ का खोल) का उपयोग बीजों को गर्म करते समय चम्मच के रूप में एवं ‘चलनी‘ का उपयोग विभिन्न आकार अनुसार मखाना उत्पाद को छांटने में किया जाता है।

Online Exhibition Series-21
5th November, 2020

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

From Open Air Exhibition of Traditional Technology:
Processing of Makhana
(Makhana preparing technique/device)

In this episode of online exhibition series of IGRMS we are introducing you to “Processing of Makhana”through Makhana preparing technique/device displayed in the Traditional Technology open air exhibition.

Manav Sangrahalaya has made an effort to collect objects related to traditional technology from various parts of the country to develop this exhibition, through which we wish to tell the visitors about the intelligence and creative genius of simple societies. This is also meant to broaden the perspective of the visitor by emphasizing the fact that traditional technologies contribute an important background to the technological splendor of contemporary world.

The state of Bihar is well known for production of ‘Makhana’. Traditionally the works related to preparation of ‘Makhana’ is carried out in Darbhanga, Sitamarhi, Purnia and Katihar District of Bihar.  The seed of ‘Makhana’, popularly known as ‘Gudi’ is a aquatic plant product cultivated in lakes, ponds and moist lands. After collection the ‘Gudi’ is dried in the sunlight. Dried ‘Gudi’ seeds are then roasted in ‘Lohiya’ (Iron pan). The roasted hot seeds are then kept on a wooden log and beaten with a flat wooden hammer to prepare ‘Makhana’.

 A variety of traditional equipments and bamboo baskets of different shapes and sizes are used in this process. Ganj (Conical basket) is used for extracting the seeds from the water body, ‘Aaka’ (Cylindrical basket) is used for keeping the seeds and ‘Delee’ (cylindrical basket) is used to remove the peels of ‘Makhana’. ‘Lohiya’ (Iron Cauldron) is used to heat the dried seeds, ‘Pitna’ (Flat wooden hammer) is used as a hammer for beating the hot seeds on ‘Pirkat’ (wooden log), ‘Lakhraiya’ (Turtle shell) is used as a spoon during heating process of seeds, and a sieve is used as a filter to distribute the ‘Makhana’ product according to their different sizes.

Introductory Video on the making process of Makhana at Traditional Technology Park, Open Air Exhibition, IGRMS, Bhopal

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