16-22 नवम्बर/November, 2020

‘सप्ताह का प्रादर्श’
(16 से 22 नवम्बर, 2020 तक)

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

टिकरा गुसाई, देवी की डोकरा प्रतिमा

टिकरा गुसाई छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में आदिवासी संस्कृति और डोकरा कला के बीच अटूट संबंध का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। टिकरा गुसाई देवी की इस प्रतिमा को एक झारा कलाकार द्वारा ढलाई की देशज विधि से खूबसूरती से तैयार किया गया है। झारा समुदाय रायगढ़ का एक स्थानीय धातु शिल्पी समुदाय है, जो अपनी डोकरा कला के लिए विश्व प्रसिद्ध है। वे स्थानीय आदिवासी समुदायों जैसे मुरिया, गोंड, बाइसन-हॉर्न मारिया, भतरा आदि के लिए देवी देवताओं की विभिन्न प्रतिमाओं की ढलाई करते हैं । प्रस्तुत प्रतिमा को एक अलंकृत सिंहासन पर बैठा हुआ दिखाया गया है, जिसमें सबसे ऊपर एक झंडा लगा है। पूरे सिंहासन को गुसाई देवी की अन्य बीस बहनों की छोटी डोकरा आकृतियों से सजाया गया है। देवी को गाँव के बाहर एक स्थान टिकरा में रख कर पूरे गाँव और समुदाय की समृद्धि के लिए उपासना की जाती है। झारा लोग सूर्योदय से पहले देवी प्रतिमा की पूजा करते हैं। वर्ष में एक या दो बार टिकरा गुसाई देवी को प्रसन्न करने के लिए बकरे या मुर्गे की बलि दी जाती है।

आरोहण क्रमांक – 98.172
स्थानीय नाम – टिकरा गुसाई, देवी की डोकरा प्रतिमा
क्रियात्मक श्रेणी – अनुष्ठान
जनजाति / समुदाय – झारा
स्थानीयता – रायगढ़, छत्तीसगढ़
माप – ऊँचाई –  66 सेमी, चौड़ाई- 33 सेमी।
श्रेणी – ‘ए’

OBJECT OF THE WEEK
(16th to 22nd November, 2020)

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

TIKRA GUSAI, Dhokra image of female deity

Tikra Gusai is the finest example of the unbroken relationship between tribal culture and Dhokra art found in Raigarh district of Chhattisgarh. This idol of Lord Tikra Gusai is beautifully crafted by a Jhara artist following indigenous casting methods. The Jhara is a local metal cast community of Raigarh, popularly known around the world for their Dhokra art. They used to cast different idols of Gods and Goddesses for the local tribal communities like Muria, Gond, Bison-horn Maria, Bhatra etc. The present idol is shown sitting on an elaborated and ornamented throne with a flag fixed at the top. The entire throne is decorated with small dokra images considered to be twenty other sisters of gusai deity. The deity is placed at Tikra, a place outside the village and worshiped for the prosperity of the entire village and community. The Jhara people worship the idol before sunrise. Once or twice in a year a goat or cock is sacrificed to please Tikra Gusai deity.

Accession No.  –    98.172
Local Name – TIKRA GUSAI, Dhokra image of female deity

Functional Category –  Ritual
Tribe/Community –  Jhara
Locality  – Raigarh, Chhattisgarh
Measurement –    Height – 66 cm, Width – 33 cm.
Category – ‘A’