ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-23

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला -23
19 नवम्बर, 2020

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

जनजातीय आवास मुक्ताकाश प्रदर्शनी से
ओडिशा की गदबा जनजाति का पारंपरिक आवास संकुल

गदबा ओडिशा राज्य के दक्षिणी जिले कोरापुट के पर्वतों पर का निवासरत है । साथ ही वे सीमा से लगते हुए आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम और छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में भी पाये जाते है । यह पर्वतीय क्षेत्र समुद्री सतह से 1000 फीट से 3000 फीट के ऊंचाई पर है । इनके गांव एक या दो मोहल्लों से मिलकर बने होते है, साथ ही इनके चारागाह चारों ओर जंगलों से घिरे रहते है । सभा हेतु ‘सदर’ और ग्राम देवता ‘हुंडी’ गांवों मे दो प्रमुख स्थान होते है । गदबा गांवों में तीन भिन्न प्रकार के आवास प्रकार पाये जाते है । प्रथम और सर्वाधिक पारंपरिक आवास प्रकार, जिसकी विशेषता उसका वृत्ताकार आकार एवं शंक्वाकार छप्पर होती है, ‘चेंडिडियन’ के नाम से जाना जाता है । द्वितीय आवास प्रकार जो कि चौकोर आकार तथा जिसके चारों ओर छप्पर से बने होते है, को ‘मोरडियन’ कहा जाता है । इस आवास प्रकार में एक दूसरे से लगे हुए दो से तीन कक्ष होते हैं । तीसरे प्रकार के आवास की छप्पर केवल दो ओर से ही होती है तथा इनमें दो ही कमरे होते है, जो की गौशाला से युक्त अथवा गौशाला रहित हो सकते है , इसे ‘डेंड्लडियन’ के नाम से जाना जाता है ।

गदबा ओडिशा के उन आदिवासी समुदायों में से एक हैं, जिन्हें मुंडारी या कोलरियन भाषा समूह में वर्गीकृत किया गया है। मिशेल के अनुसार गदबा शब्द का अर्थ ऐसे व्यक्ति से है जो अपने कंधो पर बोझा ढोने का कार्य करता है । गदबा लोगों को पहाड़ी क्षेत्रों मे पालकी वाहक के रूप में भी जाना जाता है । ऐसा कहा जाता है कि इनके पूर्वज गोदावरी नदी क्षेत्र से नंदपुर में आकार बस गए, जो कि जेपोर के राजा की पूर्व राजधानी थी । गदबाओं की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि आधारित है इसके साथ ही वे लघु वनोपजों के संग्रह, शिकार, मछली पकड़ने और मजदूरी संबंधी कार्य भी करते है। महिलाएं कपड़े की लंबी पट्टी पहनती हैं, जिसे आमतौर पर ‘केरांग’ (केरांग के रेशों से तैयार) के रूप में जाना जाता है, जो कमर से बंधी होती है और इसी कपड़े का एक भाग शरीर के ऊपरी हिस्से तक पहना जाता है। बंदापामा परब, दसरा परब, पूशा परब और चैता परब इनके महत्वपूर्ण त्यौहार हैं । गदबा लोग इन त्योहारों को सावधानी पूर्वक, लगन से, भक्ति और भय के साथ मनाते है। गदबा अपने संगीत, नृत्य और पारंपरिक भोजन के शौकीन है । ये ‘ढेम्सा’ नृत्य के लिए प्रसिद्ध हैं जो महिलाओं द्वारा अपनी प्रसिद्ध ‘केरांग’ साड़ी पहन कर किया जाता है, इस दौरान पुरुष संगीत वाद्ययंत्र बजाते हैं । इनके संगीत वाद्ययंत्रों में बड़े ड्रम, ताल मुडीबाजा, मदाल, बांसुरी, तमक और माहुरी शामिल हैं । साल भर मनाए जाने वाले गीतों, नृत्य, संगीत, रीति-रिवाजों और त्योहारों की समृद्ध लोक परंपराओं के माध्यम से प्रतिबिंबित गदबाओ का धार्मिक जीवन उनके अस्तित्व के लिए रंगीन आयाम जोड़ता है।

Online Exhibition Series-23
19th November, 2020

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

From the Tribal Habitat Open air exhibition
THE TRADITIONAL DWELLING COMPLEX
OF GADABA TRIBE OF ODISHA

The Gadaba’s are inhabiting on the Mountains of Southern district of Koraput in the State of Odisha. They are also found in the adjoining district of Visakhapatnam (Andhra Pradesh) and Bastar in Chhattisgarh. The hill ranges of this region vary its height from 1000 ft. to 3000 ft. above the sea level. Their villages consist of one or two hamlets and pastures surrounded by forest towards the periphery. A meeting place called Sadar and a village god called Hundi are the two important places in the villages. There are three different house types found among the villages of Gadabas. The first house type called Chhendidien is the most traditional house type having a circular plan with the conical. The second house type called Mordien is having rectangular plan with four slopped roof. The house consist of two to three adjacent rooms. The third type is a two-slopped house called Dendidien having two rooms with or without separate cow shed.

The Gadabas are one of the tribal communities of Odisha classified as speakers of Mundari or Kolarian. According to Mitchell, the word Gadaba signifies a person who carries loads on his shoulders. The Gadabas were also employed as a palanquin bearers in the hills. It is said that their ancestors emigrated from the banks of Godavari River and settled in Nandapur, the former capital of the Raja of Jeypore. The economy of Gadabas is agriculture based which is supplemented by collection of minor forest produce, hunting, fishing and wage earning. The women fold wear long strip of cloth commonly known as Kerang (prepared from Kerang fiber) tied round the waist and a second piece of cloth is worn across the upper portion of the body. The important festivals are Bandapama Parab, Dasara Parab, Pusha Parab and Chaita Parab. Gadabas celebrates this festival with care, sincerity, devotion and fear. Gadaba are fond of dance, music and ethnic food. They are famous for Dhemsha dance which is performed by women wearing their famous Kerang saris, the menfolk play musical instruments while women dance. Their musical instruments consist of big drums, Tal mudibaja, madal, flutes, tamak and mahuri. Gadabas religious life reflected through rich folk traditions of songs, dance, music, rituals and festivals celebrated round the year adds colorful dimensions to their existence.