ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-24

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला -24
26 नवम्बर, 2020

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

कुम्हार पारा मुक्ताकाश प्रदर्शनी से
मणिपुर की लोंगपी पॉटरी

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय की ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला के इस एपिसोड में संग्रहालय की कुम्हारपारा मुक्ताकाश प्रदर्शनी में प्रदर्शित किये गए मणिपुर के तांगखुल नागा जनजाति की मिट्टी के बर्तनों की एक अनूठी शिल्प परंपरा को दर्शकों के लिए लाया गया है। प्रदर्शनी के इस भाग में साधारण घरेलू बर्तनों से लेकर  बड़े आकार के बर्तनों तक, जिनमें नए तरीके से तैयार किए गए सजावटी और कला वस्तुओं की एक विस्तृत श्रृंखला सम्मिलित है, प्रदर्शित की गई है। तांगखुल नागा कुम्हारों ने इन प्रादर्शों को संग्रहालय परिसर में आयोजित कार्यशालाओं के दौरान तैयार किया था।

तांगखुल नागा पॉटरी को  लोंगपी पॉटरी के नाम से भी जाना जाता है। यह नाम मणिपुर के उखरूल जिले में स्थित लोंगपी गांव के नाम पर रखा गया है। यह गाँव अपनी देशज कला से निर्मित ब्लैकवेयर पॉटरी के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है, जो उन्हें उनके पूर्वजों से विरासत में मिला है। प्राचीन समय में लोंगपी कुम्हार अपने मिट्टी के बर्तनों को चावल, माँस और टोकरी आदि के साथ आदान-प्रदान किया करते थे।

परंपरागत रूप से तांगखुल जनजाति में मिट्टी के बर्तनों का शिल्प उचित अनुष्ठान के साथ केवल पुरुषों द्वारा किया जाता था। महिलाओं द्वारा बर्तन बनाना वर्जित था। लेकिन अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्रोत होने के कारण अब  महिलाओं ने भी धीरे-धीरे मिट्टी के बर्तन बनाना शुरू कर दिया है। यह जनजाति सलाई नली नामक स्थानीय मिट्टी का उपयोग बर्तन तैयार करने के लिए करती है जिसमें लिशोन लूंग नामक सर्पेटिनाइट चट्टान के चूर्ण को दो अनुपात तीन में मिलाकर इस्तेमाल करते हैं। बांस और लकड़ी के सरल औजारों से विभिन्न मिट्टी के बर्तनों को आकार दिया जाता है और बर्तनों को एक अत्यधिक कौशल पूर्ण  विधि से पकाया जाता है।

उनकी सांस्कृतिक पहचान को दर्शाने वाली वस्तुओं में से एक हम्पाई  नामक एक खास बर्तन है। सामूहिक भोज में खाना पकाने के लिए प्रयुक्त यह बर्तन पारंपरिक रूप से उत्सव, उत्साह और समृद्धि का प्रतीक है। यह बर्तन खासकर त्योहारों और सामाजिक समारोहों के दौरान मांस पकाने के लिए उपयोग किया जाने वाला सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध बर्तन है। हम्पाई की बाहरी सतह पर की जाने वाली सजावट इसकी एक प्रमुख विशेषता है। इसमें उपयोग किए जाने वाले अधिकांश प्रतीक भैंस का सिर, भाले, पारंपरिक घर और फूल हैं।

इस प्रदर्शनी में विशिष्ट रूपांकनों वाले आठ हम्पाई प्रस्तुत किए गए हैं। साथ ही मणिपुर के लोंगपी कुम्हारों द्वारा निर्मित मिट्टी के विविध बर्तन एवं कला वस्तुएं भी प्रदर्शित की गयी हैं।

Online Exhibition Series-24
26th November, 2020

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

From Kumhar Para Open air exhibition
LONGPI POTTERY OF MANIPUR

This episode of the IGRMS online exhibition series brings an exhibit for the online visitors, a unique pottery tradition of the Tangkhul Naga tribe of Manipur, exhibited in the museum’s Kumharpara open-air exhibition. A wide range of blackware pottery ranging from simple household utensils to large vessels, including innovatively crafted decorative and art items, is exhibited in this exhibition segment. The Tangkhul Naga Potters prepared these exhibits during workshops organized by IGRMS in the museum premises.

The Tangkhul Naga Pottery, also known as the Longpi Pottery, is named after the Longpi village, located in the Ukhrul district of Manipur. The village is famous for producing indigenous blackware pottery, which is inherited from their forefathers. Longpi Potters used to exchange their earthenware with meat, rice, and baskets in the olden days.

Traditionally, the art of pottery among the Tangkhul tribe was practiced by the males only. The pottery craft used to have involved appropriate ritual conduct. The making of pots by women was considered a social taboo. Pottery being the major source of economy, women have also gradually started making pottery in this village. Longpi Potters use local clay called Salai Nali, mixed in a ratio of 2:3 with a serpentinite rock called Lishon-loong as a tempering material for preparing pots. Simple bamboo and wooden tools shape various earthenware designs, and they adopt a highly skillful method to fire the pots.

One of the essential items that endorse the pride of their cultural identity is a vessel called Hampai. This massive cooking vessel traditionally marks the symbol of festivity, merriment, and prosperity. It is also regarded as the most ancient and famous pot used for cooking meat, especially during festivals and social ceremonies. Hampai is characterized by the presence of decorative relief art on its outer surface. Most of the symbols used are the buffalo head, spears, traditional house, and flowers.

The exhibition presents eight Hampais that carries distinctive motifs. It also displays various earthen households and art materials crafted by the Longpi Potters of Manipur.

Introductory video on LONGPI POTTERY OF MANIPUR
from Kumhar Para Open air exhibition at IGRMS, Bhopal

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