ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-25

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला -25
03, दिसम्बर, 2020

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

शैल कला धरोहर मुक्ताकाश प्रदर्शनी संग्रहालय परिसर में
इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में शैलचित्र – अनंतकाल के प्रतीक

ज्ञात से अज्ञात की सत्ता अधिक होती है यानी हम जो जानते हैं उससे ज्यादा हम उससे प्रभावित होते है। जो हम नहीं जानते हैं और शैलकला या शैलाचित्रों के विषय में तो यह बात बहुत ही सटीक प्रतीत होती है क्योंकि इतिहास, पुरातत्व, नृतत्व और कला जैसे विषयों की तह में जाकर जब हम इनके जरिये मानव के अतीत को समझने की कोशिश करते हैं तब परत दर परत हमें उसकी सृजन शक्ति का अहसास होता है कि वह कितनी अर्थपूर्ण हैं।

सतही तौर पर रेखांकन से लगने वाले ये शैल चित्र लिपि के अभाव में उस काल की संस्कृति के आभ्यांतरिक स्वरूप को उद्घाटित करते हैं जिसके जरिये हम प्रागैतिहासिक मानव के मनोजगत को सूक्ष्मता और विशद्ता के साथ जान पाते हैं।

डा. जगदीश गुप्त ने चित्रित शैलाश्रयों की तुलना पुरातन के प्रासाद में अगणित रूपायित गवाक्षों से की है जिनके माध्यम से अतीत को मानसिक धरातल पर संस्पंदित और सजीव रूप में प्रत्यक्ष किया जा सकता है।

मानव संग्रहालय स्थित चित्रित शैलाश्रयों के इस तीसरे और अंतिम भाग का अवलोकन भी हमने कुछ इसी बोध के साथ किया। केवल ग्यारह शैलाश्रयों में ही सैंकडों की संख्या में मौजूद पशु पक्षी और मानव आकृतियां अपने आप मे सिर्फ एक कालखण्ड ही नहीं अपितु विभिन्न कालांशों में परिवर्तन और निरंतरता के स्पष्ट संकेत देते हैं। इनमें तितली जैसे सूक्ष्म और गेंडे जैसे विशालकाय जीवों के चित्रांकन विपुल जैव सम्पदा, वर्तमान से कदाचित् अत्यंत विलक्षण जलवायु और छोटे बडे जीवों के सह अस्तित्व के अनूठे संकेल बता देते हैं। वहं गर्भवती स्त्री के चित्र, अनुष्ठानत समुदाय, पशुओं की अलंकृत आकृतियां, पशु विशेष से संबंध और विशेष क्रियाओं में संलग्न मानव आकृतियों का अंकन तथाकथित अविकसित या अल्पविकसित अवस्था में भी दायित्व बोध, कार्य विभाजन और सामाजिक प्रस्थिति को स्पष्टता के संकेत देते हैं।

इस प्रदर्शनी में शैलाश्रयों को उनकी पहचान और स्थिति के अनुसार घटते क्रम में संयोजित किया गया है किंतु तीन दशक पूर्व का यह संयोजन वर्तमान में अत्यंत प्रासंगिक है। वर्तमान काल जिसे आने वाले समय में कोरोना काल के रूप में परिभाषित और सीमित किया जायेगा, में यह क्रम सरलता से जटिलता का बोध तो कराते हैं साथ ही अंतिम छोर पर स्थित गुफाओं में गतिमान और क्रियाशील मुद्राओं में एकल और समूह चित्र जीवनचक्र की निरंतरता के साथ लोक और परलोक की अवधारणा का संदेश देते हैं।

Online Exhibition Series-25
03rd December, 2020

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

From the Prehistoric Painted Rock Shelters
at Museum premises

Rock paintings at IGRMS : Icons of Eternity

Unknown is more powerful than known. That is why they are more influenced by what we don’t know rather than we know and in case of rock art it seems to be very actuate because when we try to understand the human past by getting in depth of disciplines like history, archaeology, anthropology and art, step by step each layer exposes the creativity of humankind as also that how meaningful and intense it is.

In absence of script, a superficial appearance not more than a graphic expression these rock paintings revels the interior part of the culture of that period, which enable us to known the psychic world of prehistoric human with precision and vividness.

Dr. Jagdish Gupt has compared these painted rock shelters with enormous illustrated windows of an ancient palace through which past can be made alive and vibrating in today’s mindset.

Visit to third and final part of the painting rock shelters of Manav Sangrahalaya has also been carried out with the same notion existing in hundred of numbers within one 11 shelter these faunal and human futures are not a mere indication of a period but also indicate the continuity and change in different segments of time.  

Portrayal of micro organisms like butterfly and larger one like rhinoceros is a unique indications toward the rich diversity, coexistence of all and perhaps eccentric climatic from present. However, depiction of a pregnant woman, community engaged in rituals, decorated animal figures, association with specific animal species and paintings of human figures engaged in typical activities communicate the sense of responsibility, work distribution and the clarity of social status even in the so-called undeveloped or under developed stage.

In this exhibition “Rock Shelters” have been arranged in descending order as per their sequence of identification and location for the ease of access. But this composition of three decades ago has become more relevant now because the present time which will be defined and confined as Corona period in future, this sequel talks of simple to complex and on the either and moving and active postures of individual and groups speak of continuity of life cycle and the concept of life here after.

Introductory video on the Painted Rock Shelters of Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya, Bhopal