ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-26

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला -26
10, दिसम्बर, 2020

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

पुनीत वन मुक्ताकाश प्रदर्शनी से
सरना – झारखण्ड एवं छत्तीसगढ़ के पुनीत वन

झारखण्ड के छोटा नागपुर क्षेत्र तथा छत्तीसगढ़ क्षेत्र में पुनीत वन के लिये सरना शब्द प्रयुक्त होता है। गांव के परिवेश में विभिन्न समुदायों के लिये सरना एक धार्मिक स्थान है जहां ग्राम देवता निवास करते हैं। सरना में धार्मिक आस्था रखने वालो में मुण्डा, ओरांव, कोरवा तथा राओतिया समुदाय प्रमुख है। ‘महादानी सारना‘ सरना का ही एक प्रकार है जो कई गांवो मे पाया जाता है। इसके प्रमुख देव, महादानी है जो समस्त गांव को  प्राकृतिक विपदाओं एवं बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करते हैं। सरना में पाये जाने वाले मुख्य वृक्ष हैं- साल, पीपल, बहेड़ा, बरगद आदि। सरना से जुडे़ हुए पर्व-अनुष्ठानों में सरहुल सर्वोपरि है जो साल वृक्ष में फूल लगने के समय (मार्च-अप्रैल) में मनाया जाता है। इस दिन से नए वर्ष का आरम्भ भी माना जाता है। बैंलों की पूजा का पर्व, कड़लेता धान के अंकुरण का पर्व, हरियाली, फसल के पकने का पर्व, नवाखानी भी सरना से जुडे हुए हैं। गांव का पुजारी (पाहन) बैगा सरना में लगे वृक्षों की देखभाल तथा विभिन्न अनुष्ठानों को सम्पन्न करता है। संग्रहालय परिसर में सरना देवस्थानों तथा उससे जुड़ी पेड़-पौधों की प्रजातियों का रोपण छत्तीसगढ़ से किया गया है।

Online Exhibition Series-26
10th December, 2020

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

From the Sacred Groves of India Open Air Exhibition
Sarna–Sacred Groves of Jharakhand and Chattisgarh

Sarna is the term used to refer a sacred grove in the Chotanagpur plateau (Jharkhand) and Chhattisgarh. Sarna is a religious centre of the community within the village eco-system where the village deity resides. The Munda, Oraon, Korwa and Raotia etc. are communities having belief in the Sarna religion. Mahadani Sarna is a type of Sarna found in many villages. Its deity is Mahadani (a male god), who is trusted to be protecting the village and its property from various natural calamities and diseases. The village would regularly conduct rituals in the Sarna. The prominent trees found in Sarnas are shorea robusta (Sal), Ficus religiosa (Peepal), Terminalia bellirica (Behara), Ficus benghalensis (Bargad) etc. The most prominent ritual associated with the Sarna is Sarhul. It is celebrated in march-april, at the time of flowering of Sal tree to make the beginning of new year. Other festivals like Kadleta (worship of oxen), Hariyali (crop growth festival), and Nawakhani (crop harvest festival) are also associated with Sarna. The religious representative of the village, known as Pahan / Baiga, takes care of the vegetation of the Sarna and carries out the rituals at Sarna. The Sarna has been inducted from Chhattisgarh.

Introductory video on Sarna–Sacred Groves of Jharakhand and Chattisgarh