21-27 दिसम्बर/December, 2020

‘सप्ताह का प्रादर्श श्रृंखला-31’
(21 से 27 दिसम्बर, 2020)

दांग्सा, शिरोच्छेदन टोकरी

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

नागा जनजाति की शिरोच्छेदन प्रथाएं उर्वरता पंथ से संबन्धित थीं। इस प्रथा के प्रचलन के दिनों में सफल आखेट के प्रतीक उनकी  विभिन्न प्रकार की व्यक्तिगत सज्जा सामग्रियों और वस्तुओं में दिखाई देते हैं। ये मुख्यतः सिर को सजाने की वस्तुएं, योद्धा की  टोकरियाँ, हार, वक्षाभूषण, परिधान आदि थे। प्रतिष्ठा को दर्शाने वाली इन वस्तुओं को लकड़ी की उत्कीर्णित आकृतियों, मिथुन या भैंस के सींगों , बंदरों के कपालों, जंगली सूअर के दांतों, जंगली घास के गुच्छों,  वृक्ष की छालों और बकरी के रंगे हुए बालों से सुसज्जित किया जाता है । दांग्सा, कोनयक नागा योद्धाओं की ऐसी ही एक टोकरी है, जिसे तीन बंदरों के कपालों और जंगली सूअर के दांतों से सजाया गया है। यह एक आयताकार आधार पर कसकर बुनी हुई टोकरी है जिसके ऊपरी किनारे दीर्घ वृत्ताकार हैं। किनारों को कुशलतापूर्वक बेंत की खपच्चियों से बांधा गया है । टोकरी के पार्श्व भागों और आधार को ठोस बेंत से मजबूती प्रदान की गयी है । कंधे पर लटकाने के लिए इसमें एक बेल्ट लगा होता है । इस टोकरी को संग्रहालय द्वारा नागालैंड के मॉन जिले के अबरी गांव से संकलित किया गया था ।

आरोहण क्रमांक :  98.402
स्थानीय नाम: दांग्सा, शिरोच्छेदन टोकरी
जनजाति/समुदाय : कोनयक नागा
स्थान: मॉन, नागालैंड
माप: ऊँचाई- 30 सेमी, चौड़ाई – 34 सेमी।
श्रेणी :’AA‘ 

OBJECT OF THE WEEK series-31
(21st to 27th December, 2020)

DANGSA, Head takers’ basket

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

The head-hunting practices of the Naga tribe were associated with the fertility cult. The insignias of successful head-takers in the days of head-hunting appeared in different kinds of their personal adornments and belongings. These were most significantly the headgears, warrior’s baskets, necklace, chest ornaments, dress, etc. The items of status used to have decorated with carved wooden figures, horns of mithun or buffalo, monkey skulls, tusks of wild boar, tassels of wild grass, barks and dyed goat’s hair. Dangsa is one such basket of the Konyak Naga warrior decorated with three monkey skulls , and tusks of wild boars. It is a tightly woven basket with rectangular base that rose to an elliptical rim. The rim bindings are skillfully prepared with cane splits. The sides and base of the basket are reinforced with solid sticks of cane as strengthening elements. It has a strap for hanging around the shoulder. The basket was acquired by the Museum from Abri village in Mon district of Nagaland.

Accession No.:  98.402
Local Name –  DANGSA, Head takers’ basket
Tribe/Community – Konyak Naga
Locality – Mon, Nagaland
Measurement  – Height- 30 cm , Breadth – 34 cm
Category –  ‘AA’