04 -10 जनवरी/January, 2021

‘सप्ताह का प्रादर्श श्रृंखला-33’
(04 से 10 जनवरी, 2021 तक)

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

गरुड़
ओडिशा में प्रचलित काष्ठ शिल्प

अनादिकाल से ही मानव प्रकृति में उपलब्ध विभिन्न माध्यमों में अपनी कलात्मकता  को अभिव्यक्त करता रहा है। लकड़ी वन्य क्षेत्रों में बहुतायत से उपलब्ध एक ऐसा ही लोकप्रिय माध्यम है। गरुड़ (भगवान विष्णु का वाहन) की नक्काशीदार प्रतिमा ओडिशा में प्रचलित काष्ठ शिल्प परंपरा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है । इसे लकड़ी के एकल टुकड़े पर उकेरा गया है। गरुड़ की आकृति को एक गोलाकार आसन पर बैठे हुए नमस्कार की मुद्रा में दर्शाया गया है। गरुड़ की यह प्रतिमा अत्यंत जटिल और सूक्ष्म नक्काशी कर तैयार की गई है। भगवान जगन्नाथ के विशेष संदर्भ सहित विभिन्न देवी-देवताओं की  मूर्तियां साथ ही पशु – पक्षी, खिलौने, पालकी, मंडप, लकड़ी की पेटी, दरवाजे आदि कुछ लोकप्रिय कृतियां हैं जो ओडिशा के विभिन्न हिस्सों में उत्कीर्ण की जाती हैं। खंडपड़ा, पुरी, दस्पल्ला और केंद्रापाड़ा के काष्ठ शिल्पकार इस शिल्प में प्राचीन काल से ही अत्यंत कुशल हैं।

आरोहण क्रमांक :  98.118
स्थानीय नाम: गरुड़, ओडिशा में प्रचलित काष्ठ शिल्प
जनजाति/समुदाय : लोक
स्थान: पुरी, ओडिशा
माप: ऊँचाई – 28 सेमी।, चौड़ाई -27 सेमी।,

श्रेणी : ’A‘ 

OBJECT OF THE WEEK SERIES-33
(04th to 10th January, 2021)

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

GARUDA
 An wood craft prevalent in the state of Odisha

Since time immemorial man has been expressing his artistic impulse through different media available at his disposition. Wood is one such popular medium available abundantly in forest area. This intricately carved image of Garuda (vehicle of lord Vishnu) is one of the finest example of wood craft prevalent in the state of Odisha. It is carved out of single piece of wood. The sitting image of Garuda is shown on a circular pedestal in namaskar mudra. This image of Garuda shows the specialized form of carving that is extremely intricate and meticulous. Different idols of Gods and Goddesses with special reference to Lord Jagannath, along with animal, bird, toy, palanquin, portable pavilion, wooden chest, door etc are some of the popular pieces carved in different parts of Odisha.   The wood carvers of Khandapada, Puri, Daspalla and Kendrapada are very much proficient to this craft since time immemorial.

Accession No.:  98.118
Local Name – GARUDA, An wood craft prevalent in the state of Odisha
Tribe/Community – Folk
Locality – Puri, Odisha
Measurement  – Height –  28cm ., Max Width –27  cm.,
Category –  ‘A’

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