IGRMS -Museum Now!

IGRMS में नया क्या है? Museum Now!

26th January, 2021

गणतंत्र दिवस समारोह 2021 इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में गणतंत्र दिवस के अवसर पर अंतरंग भवन वीथि संकुल परिसर में संग्रहालय के निदेशक डॉ. पी. के. मिश्र ने प्रातः 9.30 बजे राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया एवं राष्ट्रीय गान “जन गण मन” गाया गया तथा सुरक्षा गार्डों द्वारा सलामी दी गई। संग्रहालय के निदेशक डॉ. पी. के. मिश्र ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आप सभी को 72 वे गणतंत्र दिवस की बधाई. कार्यक्रम के अंत मे मिठाई का वितरण प्रशासन अनुभाग के माध्यम से किया गया।

72nd Republic Day celebrated at IGRMS, SOUTHERN REGIONAL CENTRE, MYSORE

25th January, 2021

“राष्ट्रीय पर्यटन दिवस” प्रति वर्ष 25 जनवरी को मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में पर्यटन को बढ़ावा देना और लोगों को पर्यटन के महत्व के प्रति जागरूक करना है।
भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को अपने में संजोये हुए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय लघु भारत है।
मानव संग्रहालय आएं और इस सांस्कृतिक पहचान के साक्षी बनें।

19th January, 2021

प्रदर्शनी- नंदा देवी राज जात : हिमालय की देवी की अनुष्ठानिक विदाई

मां नंदा देवी राज जात यात्रा आध्यात्मिक और भावनात्मक संबंधों को दर्शाती है यह प्रदर्शनी – श्री शिव शेखर

शुक्‍लाइंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल द्वारा आज मां नंदा देवी राज जात हिमालय की देवी की अनुष्‍ठानिक विदाई पर केन्द्रित एक प्रदर्शनी का उदघाटन श्री शिव शेखर शुक्‍ला (आई.ए.एस.), प्रमुख सचिव, संस्‍कृति, पर्यटन एवं जनसम्‍पर्क विभाग, मध्‍य प्रदेश शासन द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्‍होंने कहा यह प्रदर्शनी स्थानीय लोगों के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन, उनके धार्मिक विश्वास, अनुष्ठानिक प्रस्तुतियों और तीर्थ यात्रा से जुड़े आध्यात्मिक और भावनात्मक संबंधों को दर्शाती है।

इस सम्बन्ध में संग्रहालय के निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र ने बताया कि पवित्र हिमालय में स्थित पर्वत श्रृंखलाएं और उनकी चोटियां अपनी महान शक्ति से प्रकृति के तत्वों को नियंत्रित करने वाले देवी-देवताओं का घर मानी जाती हैं। भारत की दूसरी सबसे ऊंची चोटी नंदा देवी गढ़वाल और कुमाऊं की एक प्रमुख देवी भी हैं। नंदा देवी पर्वत के इर्द-गिर्द 19 विश्राम स्थलों के साथ लगभग 280 किलोमीटर लंबी नंदा देवी राज जात सबसे कठिन तीर्थ यात्रा है। यह पूरी यात्रा एक अनुष्ठानिक विदाई है जिसमें नंदा देवी को चमोली जिले के नौटी गांव स्थित उनके पैतृक आवास से होमकुंड स्थित उनके पति के घर ले जाया जाता है। चमोली, पिथौरागढ़ और बागेश्वर क्षेत्र में नंदा जात हर वर्ष आयोजित की जाती है जिसमें देवी की पालकी की शोभायात्रा निकाली जाती है। नंदा देवी राज जात 12 वर्ष में एक बार आयोजित की जाती है जिसमें एक चार सींग वाला मेढ़ा “चौसिंगा खाड़ू”, जिसे देवी का अवतार माना जाता है, पथ प्रदर्शित करता है स्थानीय देवी-देवता और पूरे क्षेत्र के नागरिक इस यात्रा में पूर्ण भक्ति और उत्साह के साथ भाग लेते हैं।

इस प्रदर्शनी के बारे में प्रदर्शनी के संयोजक डॉ. आर. एम. नयाल ने बताया, मध्य हिमालयी संस्कृति तथा नंदा देवी राज जात पर केंद्रित इस प्रदर्शनी में कुछ दुर्लभ छायाचित्र तथा बहुविध वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं।

पवित्र हिमालय में स्थित पर्वत श्रृंखलाएं और उनकी चोटियां अपनी महान शक्ति से प्रकृति के तत्वों को नियंत्रित करने वाले देवी-देवताओं का घर मानी जाती हैं। भारत की दूसरी सबसे ऊंची चोटी नंदा देवी गढ़वाल और कुमाऊं की एक प्रमुख देवी भी हैं। नंदा देवी पर्वत के इर्द-गिर्द 19 विश्राम स्थलों के साथ लगभग 280 किलोमीटर लंबी नंदा देवी राज जात सबसे कठिन तीर्थ यात्रा है। यह पूरी यात्रा एक अनुष्ठानिक विदाई है जिसमें नंदा देवी को चमोली जिले के नौटी गांव स्थित उनके पैतृक आवास से होमकुंड स्थित उनके पति के घर ले जाया जाता है। चमोली, पिथौरागढ़ और बागेश्वर क्षेत्र में नंदा जात हर वर्ष आयोजित की जाती है जिसमें देवी की पालकी की शोभायात्रा निकाली जाती है। नंदा देवी राज जात 12 वर्ष में एक बार आयोजित की जाती है जिसमें एक चार सींग वाला मेढ़ा (चौसिंगा खाड़ू), जिसे देवी का अवतार माना जाता है, पथ प्रदर्शित करता है स्थानीय देवी- देवता और पूरे क्षेत्र के नागरिक इस यात्रा में पूर्ण भक्ति और उत्साह के साथ भाग लेते हैं।

Exhibition- Nanda Devi Raj Jaat :
Bidding a ritual adieu to the Himalayan Goddess

Maa Nanda Devi Raj Jat Yatra exhibition shows the spiritual-emotional bonding- Shri Sheo Shekhar ShuklaIndira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya, Bhopal is being organized an exhibition cantered on the ‘Maa Nanda Devi Raj Jaat’ a ritual adieu to Himalayan Goddess was inaugurated by Shri Sheo Shekhar Shukla (IAS), Principal Secretary, Culture, Tourism and Public Relations Department, Government of Madhya Pradesh.

On this occasion, he said this exhibition reflects the socio-economic and cultural life of the people, their religious beliefs, ritual performances and spiritual-emotional bonding attached with the pilgrimage.In this regard Dr. Praveen Kumar Mishra, Director, IGRMS said that the sacred Himalayas, peaks and mountains are believed to be the abode of gods and goddesses with great power of control over the elements of nature. Nanda Devi, the second highest Indian mountain deified as Devi is the preeminent goddess of Garhwal and Kumaon. The Nanda Devi Raj Jaat is considered one of the toughest pilgrimage covering a long route of 280 kms with 19 halts held around the Nanda Devi Mountain. The entire journey is a ritual enactment of bidding adieu to Devi Nanda from her parental home in Nauti village, Chamoli to her husband’s home in Homkund. The Nanda-Jaat is held annually in Chamoli, Pithoragarh and Bagheswar area, where the palki of Devi is taken around in procession. Nanda Devi Raj Jaat is conducted once in every twelve year when a Chau singa Kharu (four- horned ram) is born who is believed to be the incarnation of goddess, leads the Raj Jaat as guide. Local deities and common people of the entire region join in this yatra and enjoy royal patronage.

Regarding this exhibition Programme coordinator of the exhibition, Dr. R.M. Nayal told that a wide range of objects supported with some rare photographs are used to enhance this exhibition focusing on mid Himalayan culture in general and Nanda Devi Yatra in particular.

In the sacred Himalayas, peaks and mountains are believed to be the abode of gods and goddesses with great power of control over the elements of nature. Nanda Devi, the second highest Indian mountain deified as Devi is the preeminent goddess of Garhwal and Kumaon. The Nanda Devi Raj Jaat is considered one of the toughest pilgrimage covering a long route of 280 kms with 19 halts held around the Nanda Devi Mountain. The entire journey is a ritual enactment of bidding adieu to Devi Nanda from her parental home in Nauti village, Chamoli to her husband’s home in Homkund. The Nanda-Jaat is held annually in Chamoli, Pithoragarh and Bagheswar area, where the palki of Devi is taken around in procession. Nanda Devi Raj Jaat is conducted once in every twelve year when a four horned Ram (Chau singa Kharu) is born who is believed to be the incarnation of goddess, leads the Raj Jaat as guide. Local deities and common people of the entire region join in this yatra and enjoy royal patronage.

A wide range of objects supported with some rare photographs are used to enhance this exhibition focusing on mid Himalayan culture in general and Nanda Devi Yatra in particular. The exhibition reflects the socio-economic and cultural life of the people, their religious beliefs, ritual performances and spiritual-emotional bonding attached with the pilgrimage.

12th January, 2021

इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में आज युवाओं के प्रेरणास्त्रोत, समाज सुधारक युग पुरुष ‘स्वामी विवेकानंद’ की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर मानव संग्रहालय की मुक्ताकाश प्रदर्शनी “जनजातीय आवास” में युवक-युवतियों का भ्रमण कराया गया एवं वास्तु संरचना से परिचित कराया गया। राष्ट्रीय युवा दिवस पर कार्यक्रम की परिकल्पना डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र ने तैयार की तथा उन्होंने इस अवसर पर उपस्थित यूवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की कतिपय जनजातियों में प्रचलित युवा गृह महत्वपूर्ण आर्थिक, राजनैतिक एवं धार्मिक प्रयोजन का वहन करने वाली एक सामाजिक संस्था है। ऐसा माना जाता है कि यह जनजातीय युवक-युवतियों को सामाजिक जीवन में प्रवेश एवं अपनी भूमिका का उपयुक्त तरीके से निर्वहन हेतु प्रेरित करने वाली  अनौपचारिक शैक्षणिक संस्था है। संग्रहालय की मुक्ताकाश प्रदर्शनी “जनजातीय आवास” में प्रदर्शित विभिन्न युवागृहों में मणिपुर की मराम जनजाति का रेहांग, नागालैंड की कोन्यक नागा का मोरुंग, मिजो  का जालबुक, असम की जेमी नागा का मोरुंग एवं  तिवा जनजाति का समादि,  छत्तीसगढ़ की मुरिया का घोटूल और ओडिशा की जुआंग का मजांग दर्शकों के आकर्षण का केंद्र हैं। जनजातीय युवाओं और उनकी संस्कृति के युवागृह से अंतर्संबंध को इन युवागृहों की वास्तु संरचना में भली भांति समझा जा सकता है।

     आज युवाओं के प्रेरणास्त्रोत, समाज सुधारक युग पुरुष ‘स्वामी विवेकानंद’ की जयंती है। इसे राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर मानव संग्रहालय अपने दर्शकों को कुछ छाया चित्रों के माध्यम से जनजातियों के इन युवा गृहों के महत्व एवं वास्तु संरचना से परिचित करा रहा है।


10th January, 2021

”अतुल्य भारत मध्‍य प्रदेश में मोहिनी अट्टम, निमाड़ी,मालवी, गणगौर, भगोरिया, नृत्य के साथ ध्रुवा बैंड की प्रस्तुति”इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भोपाल निरंतर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन कर देश की संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने में अपनी महति भूमिका निभाता है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज के सहयोग से संग्रहालय में अतुल्य भारत का आयोजन किया गया । इस कार्यक्रम का उद्देश्‍य भारतीय सांस्‍कृतिक विशिष्‍टता को वैश्विक मंच पर उभारना है। अतुल्‍य भारत कार्यक्रम के तहत आज वी‍थि संकुल भवन के मुक्‍ताकाश मंच पर एवं संग्रहालय विभिन्न स्थानों पर सुश्री पूर्णिमा चतुर्वेदी का निमाड़ी गायन,एवं सुश्री कविता शाजी के द्वारा मोहिनीअट्टम नृत्य की प्रस्तुति दी गयी तत्पश्चात ध्रुवा बैंड संस्कृतिक गायन का आयोजन हुआ इसके बाद उज्जैन के स्वाती उखले द्वारा मालवी गायन और मटकी नृत्य की प्रस्तुति दी गई इसके बारे में स्वाति जी ने बताया कि मटकी मालवा का एक समुदाय नृत्य है, जिसे महिलाएं विभिन्न अवसरों पर पेश करती है। इस नृत्य में नर्तकियां ढोल की ताल पर नृत्य करती है, इस ढोल को स्थानीय स्तर पर मटकी कहा जाता है। स्थानीय स्तर पर झेला कहलाने वाली अकेली महिला, इसे शुरू करती है, जिसमे अन्य नर्तकियां अपने पारंपरिक मालवी कपड़े पहने और चेहरे पर घूंघट ओढे शामिल हो जाती है। उनके हाथों के सुंदर आंदोलन और झुमते कदम, एक आश्चर्यजनक प्रभाव पैदा कर देते है। इसके बाद बड़वाह से आये श्री संजय महाजन के समूह द्वारा गणगौर नृत्य की प्रस्तुति दी गई उन्होंने बताया कि यह नृत्य मुख्य रूप से गणगौर त्योहार के नौ दिनों के दौरान किया जाता है। इस त्योहार के अनुष्ठानों के साथ कई नृत्य और गीत जुड़े हुए है। यह नृत्य, निमाड़ क्षेत्र में गणगौर के अवसर पर उनके देवता राणुबाई और धनियार सूर्यदेव के सम्मान में की जानेवाली भक्ति का एक रूप है।फिर भगोरिया नृत्य की प्रस्तुति श्री कैलाश सिसोदिया के समूह द्वार दी गई उन्होंने बताया कि भील जनजाति का ‘भगोरिया नृत्य’ प्रस्तुत कर किया| भील जनजाति का भगोरिया नृत्य, भगोरिया हाट में होली तथा अन्य अवसरों पर भील युवक-युवतियों द्वारा किया जाता है। फागुन के मौसम में होली से पूर्व भगोरिया हाटों का आयोजन होता है। भगोरिया हाट केवल हाट न होकर युवक-युवतियों के मिलन मेले हैं। यहीं से वे एक-दूसरे के सम्पर्क में आते हैं, आकर्षित होते हैं और जीवन सूत्र में बंधने के लिये भाग जाते हैं, इसलिये इन हाटों का नाम भगोरिया पड़ा। भगोरिया नृत्य में विविध पदचाप समूहन पाली, चक्रीपाली तथा पिरामिड नृत्य मुद्राएं आकर्षण का केन्द्र होती हैं। रंग-बिरंगी वेशभूषा में सजी-धजी युवतियों का श्रृंगार और हाथ में तीरकमान लिये नाचना ठेठ पारम्परिक व अलौकिक सरंचना है। पूर्णिमा चतुर्वेदी के समूह द्वारा निमाड़ी गायन में जिसमें गणेश वंदना आज म्हारा अंगणा देव गणेशा आया जी…, नर्मदा भजन माय वो नर्बदा थारी सेवा करूंगा…, संस्कार गीत तुम तो आवजो न रे अंबा वन की प्रस्तुति दी गई।


09th January, 2021

A group of nearly hundred resource persons belonging to various tribes from all over India today visited Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya. They came to Bhopal to attend a seminar on “Janjatiya Dharmik Parampara aur Devlok” organised by Dattopant Thengari Shodh Sansthan. During their visit to Manav Sangrahalaya they were taken to the “Tribal Habitat” and “Traditional Technology” open air exhibitions and the indoor museum building “Veethi Sankul”. The curatorial staff of the museum guided them in the presence of Director, IGRMS Dr Praveen Kumar Mishra. Overwhelmed by seeing the objects of their cultures displayed in the museum they appreciated the contextual display of their house types and objects. Interaction on the collection of the museum has also been done with curatorial staffs of the museum while going through the various exhibitions of the museum.


09th January, 2021

”अतुल्य भारत मध्‍य प्रदेश”
इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भोपाल निरंतर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन कर देश की संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने में अपनी महति भूमिका निभाता है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज के सहयोग से संग्रहालय में आठ से दस जनवरी 2021 तक ”अतुल्य भारत कार्यक्रम” का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्‍य भारतीय सांस्‍कृतिक विशिष्‍टता को वैश्विक मंच पर उभारना है। उल्‍लेखनीय है कि भारत विश्‍व के पॉच शीर्ष सास्‍कृतिक पर्यटक स्‍थलों मे से एक है भारत अपने भौगोलिक क्षेत्र द्वारा सातंवा सबसे बडा देश है जो दक्षिण एशिया में स्‍थित है। सुदंरता हमारे देश को हर पहलू से घेरती है अपने खुब सूरत पहाडों, झीलों, जंगलों, समुद्रों, महासागरों तथा समृद्ध ऐतिहासिक मंदिरों सांस्‍कृतिक क्षेत्र परम्‍पराओं एवं विविध भाषाओं के कारण भारत विविधता में एकता का प्रतिनिधत्‍व करता है। अतुल्‍य भारत कार्यक्रम के तहत आज वी‍थि संकुल भवन के मुक्‍ताकाश मंच पर डिण्‍डोरी से श्री भद्दु सिंह दल द्वारा बैगा परधोनी नृत्‍य, श्री कमल सिंह मरावी के दल द्वारा गोंड नृत्‍य व श्री मायाराम धुर्वे दल द्वारा गुदूंब बाजा नृत्‍य, भोपाल से सुश्री शमा मालवीय के दल द्वारा कथक नृत्‍य व सुश्री श्‍वेता देवेन्‍द्र दल द्वारा नाट्यम एवं धार से सुश्री श्‍वेता जोशी द्वारा गायन की प्रस्‍तुति दी गई।


08th January, 2021

”अतुल्य भारत मध्‍य प्रदेश”
इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भोपाल निरंतर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन कर देश की संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने में अपनी महति भूमिका निभाता है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज के सहयोग से संग्रहालय में आठ से दस जनवरी 2021 तक ”अतुल्य भारत कार्यक्रम” का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्‍य भारतीय सांस्‍कृतिक विशिष्‍टता को वैश्विक मंच पर उभारना है।उल्‍लेखनीय है कि भारत विश्‍व के पॉच शीर्ष सास्‍कृतिक पर्यटक स्‍थलों मे से एक है भारत अपने भौगोलिक क्षेत्र द्वारा सातंवा सबसे बडा देश है जो दक्षिण एशिया में स्‍थित है। सुदंरता हमारे देश को हर पहलू से घेरती है अपने खुब सूरत पहाडों, झीलों, जंगलों, समुद्रों, महासागरों तथा समृद्ध ऐतिहासिक मंदिरों सांस्‍कृतिक क्षेत्र परम्‍पराओं एवं विविध भाषाओं के कारण भारत विविधता में एकता का प्रतिनिधत्‍व करता है। अतुल्‍य भारत कार्यक्रम के तहत आज वी‍थि संकुल भवन के मुक्‍ताकाश मंच पर श्री अमन चौरसिया के दल द्वारा बरेदी नृत्‍य से प्रारंभ हुआ, और बधाई नोरता ढिमराई नृत्‍य की प्रस्‍तुति सुश्री पायल सेन के नेतृत्‍व मे की गई, तत्‍पश्‍चात श्री संजय पांडेय के दल ने बधाई नृत्‍य प्रस्‍तुत किया, जबलपुर की जानकी महिला मंडली के सदस्‍यों ने पारम्‍परिक लोक गीत प्रस्‍तुति दी, फिर सुश्री लता मुंशी भोपाल के सदस्‍यों द्वारा भारत नाट्यम और सुश्री बिंदु जुनेजा के शिष्‍यों द्वारा ओडीसी नृत्‍य की प्रस्‍तुति दी गई।
“Incredible India Madhya Pradesh”
Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya Bhopal plays its important role in taking the culture of the country to the people by organizing cultural programs continuously. To fulfill this objective, a comprehensive digital ‘Incredible India Programme’ is being organised in the museum from January 8 to January 10 in collaboration with North Central Region Cultural Centre, Prayagraj, Ministry of Culture and Government of India. The Ministry of Culture is trying to give a grand look to Indian culture by organizing cultural programmes in various states under Incredible India programme. In this sequence, a three day festival is being organised in Muktakash Manch of Vithi Sankul Bhawan of IGRMS. Folk artists of Madhya Pradesh will present culture of their state. It is worth mentioning that India is one of the top five cultural tourist destinations in the world. India is the seventh largest country in South Asia by its geographical area. Beauty surrounds our country in every aspect; India represents unity in diversity due to its beautiful hills, lakes, forests, seas, oceans and rich historical temples, cultural region traditions and diverse languages. As part of the Incredible India program, Mr. Aman Chaurasia and group perform the Baredi dance in Vithi Sankul Muktadhkash stage and the Badhi Norata Dhimrai dance was performed under the leadership of Ms. Payal Sen then the team of Shri Sanjay Pandey presented the Badhai dance, members of the Janaki Mahila Mandali of Jabalpur presented traditional folk songs. Then Ms. Lata Munshi disciples of Bhopal presented Bharat Natyam after that Bindu Juneja disciples present the Odissi dance.


04th January, 2021

प्रतिवर्ष 04 जनवरी को लुई ब्रेल के जन्म दिवस के अवसर पर उनके द्वारा दृष्टि बाधित दिव्यांगजनों के लिए विकसित की गई ब्रेल लिपि के महत्व के बारे में जन सामान्य को जागरूक करने हेतु विश्व ब्रेल दिवस मनाया जाता है। संग्रहालयों के संदर्भ में दृष्टिबाधित पर्यटकों के लिए ब्रेल लिपि अत्यन्त लाभकारी रही है। मानव संग्रहालय ने अपनी विभिन्न मुक्ताकाश और अंतरंग प्रदर्शनियों में प्रदर्शित वस्तुओं से संबंधित सामग्री इस विशिष्ट पर्यटक वर्ग के लिए ब्रेल लिपि में उपलब्ध कराई है। यह अत्यंत संतुष्टि का विषय है कि संग्रहालय के द्वारा ब्रेल लिपि में स्थापित किए गए सूचना पटों का दृष्टिबाधित पर्यटकों द्वारा भरपूर लाभ उठाया जा रहा है।


01st January, 2021

New Year get together of IGRMS familyHappy New Year to all.


01st January, 2021

2021 नव वर्ष की शुभकामनाएं
Wishing you a Happy and prosperous new year 2021.
Dr. Praveen Kumar Mishra
Director
IGRMS BHOPAL