ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-31

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला -31
(14 जनवरी, 2021)

पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी सेे
गन्ना चरख
गन्ना रस निकालने का पारंपरिक उपकरण

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

सांस्कृतिक उद्विकास का प्रारम्भ मनुष्य द्वारा तकनीकी ज्ञान अर्जित करने के प्रयास से प्रारम्भ होता है। इस शुरूआत को आधुनिक एवं उन्नत तकनीक की तुलना में सरल भले ही कहा जाता हो, परन्तु मानव द्वारा निर्मित एवं उपयोगित प्रथम उपकरण आज भी उसके तकनीकी इतिहास में प्रारंभिक एवं महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

   आज जब हम अपनी अधिकतम दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु तकनीकी क्रांति के उपकरणों पर निर्भर हैं, वहीं आज भी इस देश में ऐसे लोग हैं जो अपनी इन आवश्यकताओं से संबंधित विभिन्न कार्यों को करने के लिये विरासत में प्राप्त पारंपरिक तकनीकी का प्रयोग करते हैं। प्राग औद्योगिक काल तथा उसके सदियों पश्चात भी भारतीय कृषक विविध आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये विभिन्न उपकरण अविष्कृत करते रहे तथा उन्हें आकार प्रदान करते रहे।

 आधुनिक तकनीकी के उत्पादों की आसान उपलब्धता ने पारंपरिक तकनीक को भले ही कम महत्वपूर्ण कर दिया हो फ़िर भी हम उन लोगों को नमन करते हैं जिन्होंने सदियों तक लोगों का निर्वाह करने वाली पर्यावरण के अनुरूप तकनीकों का अविष्कार किया।

     इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने इस प्रदर्शनी को विकसित करने के लिये भारत के विभिन्न हिस्सों से पारंपरिक तकनीक से संबंधित प्रदर्श संग्रहित करने का प्रयास किया है, जिनके माध्यम से हम दर्शकों को सरल समाजों के बौद्धिक एवं रचनात्मक कौशल से परिचित कराना चाहते हैं, और इस तथ्य को रेखांकित करना चाहते हैं कि समकालीन जगत के तकनीकी वैभव में पारंपरिक तकनीक की एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

गन्ना चरख  – गन्ना रस निकालने का पारंपरिक उपकरण
जनसमूह:- मराटा
जिला:- औरंगाबाद
क्षेत्र :- मध्य महाराष्ट्र
राज्य:- महाराष्ट्र

महाराष्ट्र में गन्ने का रस निकाले जाने की यह पारम्परिक तकनीक है। इस यंत्र को तैयार करने के लिए दो बेलनाकार दांतेदार घिरनियों जिन्हें स्थानीय भाषा में दुल्हा एवं दुल्हन कहा जाता है, जिसे पति कहे जाने वाले क्षितिज रखे ढांचे के ऊपर रखा जाता है। यह रस निकालते समय गति को एक सा बनाये रखने हेतु गियर का कार्य करता है। यह उपकरण जू कहे जाने वाले लकड़ी के लम्बे शाफ्ट जो रोटोर की भांति कार्य करता है, के द्वारा बैलों की सहायता से चलता है। यह उपकरण स्थानीय भाषा में मारुख कही जाने वाली लकड़ी से तैयार किया जाता है।

Online Exhibition Series-31
(14th January, 2021
)

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

From the Open air Exhibition of Traditional Technology Park
GANNA CHARAKH

A traditional sugar cane Crusher

The dawn of culture witnessed the beginning of acquisition of technological knowledge by the humankind. The beginning might be termed as simple in comparison to the modern and advanced technologies, the humankind has developed, but when the first tool would have been shaped and used by men, that beginning is still the first and most important achievement in the technological history of humankind.

                Today in an age when we are blessed with the gadgets of technological revolution for fulfillment of our each and every need, there are also people in this country who still pursue various kinds of works related to their needs of life and professions through the technologies they inherited from their preceeding generations. In pre-industrial period and later for hundred of years also Indian Peasants have invented and shaped various gadgets for meeting various requirements.

                The easy availability of products of modern technology has though made this traditional technology more of less insignificant or redundant, but we salute the people who had invented them. They were the technologies which gave sustenance to the people for hundreds of years. Besides, such technologies are eco-friendly in nature.

                Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya has made an effort to collect this objects related to traditional technology from various parts of the country to develop this exhibition, through which we wish to tell the visitor about the intelligence and creative genius of simple societies. This is also meant to broaden the perspective of the visitor by emphasizing the fact that traditional technologies contribute an important background to the technological splendour of the contemporary world.

GANNA CHARAKH A traditional sugar cane Crusher
Area : Central Maharashtra
Ethnic group- Marata
District- Aurangabad,
State- Maharashtra

It is a traditional technology of Maharashtra for crushing sugarcane to collect juice. The device consists of two upright cylindrical form of wooden wheel toothed structure (called locally Dulha & Dulhan) which is mounted upon the horizontal frame called Pati, that serve as gear to maintain uniform motion in crushing sugarcane. It is moved through a long wooden shaft (called-Ju) used as rotor with the help of Bullock. The device is made of wood locally called ‘Marukh’.

Introductory video on GANNA CHARAKH- A traditional sugar cane Crusher, from the Open air Exhibition of Traditional Technology Park