01 -07 फरवरी/February, 2021

‘सप्ताह का प्रादर्श-37’
(01 से 07 फरवरी, 2021 तक)

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

दरवाज़ा, खूबसूरत नक्काशीदार बड़ा दरवाजा।

गुजरात में लकड़ी की नक्काशी की एक सदियों पुरानी समृद्ध परंपरा है जो इस क्षेत्र के लोक और शहरी जीवन में सांस्कृतिक रूप से एकीकृत हो गई है। ऐंसा माना जाता है कि इस क्षेत्र में काष्ठ शिल्प का उद्विकास सामाजिक-धार्मिक नियमों और अलंकरण की व्यक्तिगत पसंद  से निर्धारित किया गया है। काष्ठ पर जटिल नक्काशी की कलात्मक अभिव्यक्तियों को उनकी वास्तु संरचनाओं जैसे दरवाजों, खिड़कियों, छत, बाहर की ओर निकली बालकनियों, दीवारों के किनारों, फर्नीचरों, खंभों, अग्रभाग आदि में देखा जा सकता है। गुजराती समुदाय में घर का मुख्य द्वार  उनके स्थापत्य, सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक के रूप में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह परिवार की समृद्धि और प्रस्थिति का प्रतीक है।

वर्तमान प्रादर्श एक अलंकृत नक्काशीदार पारंपरिक दरवाजा है, जो मानव, पक्षियों और बेलों की आकृतियों से अलंकृत है। इसके अतिरिक्त नियमित उपयोग के लिए बाएं पल्ले पर एक छोटा दरवाजा है। चौकोर घेरों में महिला ढोल वादकों और नर्तकियों की आकृतियां उकेरी गई हैं। मजबूती प्रदान करने के लिए नियमित अंतराल पर लगाई गई लोहे की पट्टियां, पंक्तियों में बकल जैसी संरचनाएं और जटिल नक्काशी त्रिआयामी प्रभाव उत्पन्न करते हैं। गुजरात की इस काष्ठ नक्काशी कला का गौरव आधुनिकीकरण के प्रभाव के कारण धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है।

आरोहण क्रमांक – 98.140
स्थानीय नाम – दरवाज़ा, खूबसूरत नक्काशीदार बड़ा दरवाजा।
समुदाय – लोक समुदाय
स्थानीयता –अहमदाबाद, गुजरात
माप – ऊँचाई – 309 सेमी; चौड़ाई- 214 सेमी;
श्रेणी – ‘ए’

OBJECT OF THE WEEK
(01-07 February, 2021)

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

Darwaza, Beautifully carved large door

The people of Gujarat have a rich tradition of wood carving, and this age-old practice of wood-craft became culturally integrated into the folk and urban life of the region. The evolution of wood carving in the region is believed to have been guided by socio-religious principles and personal taste of ornamentation. The artistic expressions of intricate wood carvings can be noticed in the patterns of their architectural elements such as doors, windows,  ceiling, projected balconies, friezes, items of furniture, pillars, facades, etc. The main door of the house occupies an important place in the Gujarati community as a symbol of their architectural, social and cultural identity. It symbolises the wealth and status of the family.

The present exhibit is an ornately carved traditional door, profusely ornamented with human figures, birds, and creeper motifs. It additionally has a small door-like opening on the left panel for regular use.   The carved images of female drummers and dancers are shown in the square niches. Iron bar reinforcements at regular intervals with rows of buckle-like arrangements and intricate carving give extra attention to feel the three-dimensional effect. The glory of this wood carving art of Gujarat is gradually vanishing due to the influence of modernisation.

Acc. No. –  98.140
Local Name  –  Darwaza, Beautifully carved large door
Tribe/Community – Folk
Locality   –  Ahmadabad, Gujarat
Measurement – Height – 309  cm., Width- 214
cm;
Category –   ‘A’

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