22 -28 जून / June, 2020

सप्ताह का प्रादर्श

इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय द्वारा कोरोना वायरस (कोविड-19) के प्रभाव से उत्पन्न कठिन चुनौतिपूर्ण समय में जनता को संग्रहालय से ऑनलाइन के माध्यम से जोड़ने एवं उन्हें संग्रहालय के ऐतिहासिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत के बारे में गहरी समझ को बढ़ावा देने के उद्देश से शरू की गई नवीन श्रृंखला ‘सप्ताह का प्रादर्श’ के अंतर्गत इस माह के चतुर्थ सप्ताह के प्रादर्श के रूप में कोरापुट, ओड़िशा के बोंडो/बोंडा जनजाति के द्वारा पहने जाने वाला वृक्ष-छाल से बना एक कोट, “तुष” को दर्शकों के मध्य प्रदर्शित किया गया।

तुष, वृक्ष-छाल से बना एक कोट है। यह पारंपरिक रूप से ओडिशा के बोंडा जनजाति के पुरुषों द्वारा सर्दियों के मौसम में अपने शरीर के ऊपरी हिस्से को ढकने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। तुष का निर्माण समुदाय के बुजुर्ग सदस्य द्वारा एक पेड़ से छाल के संग्रह से शुरू होता है। छाल को कुल्हाड़ी की मदद से पेड़ से सावधानीपूर्वक अलग किया जाता है। इसके बाद इसे धीरे धीरे कुल्हाड़ी के पृष्ठ भाग से कूटा जाता है और सूरज की रोशनी में सुखाया जाता है। सूखे तंतुओं को एहतियात से धीरे-धीरे मोड़कर बुना जाता है। निर्माणक तत्वों की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए तुष को हमेशा घर के अंदर बांस के हैंगर पर सीधा रखा जाता है। इसकी बुनाई का ज्ञान होना बोंडा युवकों के लिए आवश्यक माना जाता है।

दर्शक इस प्रादर्श का अवलोकन मानव संग्रहालय की फेसबुक साईट के माध्यम से घर बैठे कर सकते है।

Exhibit of the Week

Due to spread of covid-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Exhibit of the Week’ to showcase its collection from all over India. Under this series, “TUSH – A Coat made of Bark” of the Bondo/ Bonda Tribe from Koraput, Odisha, India was displayed in the audience as the 04TH Exhibit of the June, 2020 through Facebook.

Tush is a coat made out of tree-bark. It is traditionally used by the males of Bonda tribe of Odisha to cover the upper part of their body during the Winter season. Making of Tush starts with the collection of bark from a tree by the elderly member of the community. The bark is carefully separated from the body of the tree with the help of an axe. It is then smoothly and prudently pounded by the backside of the axe and dried in sunlight. The dried fibres are slowly folded and woven carefully. Keeping in view the nature of raw material, tush is always kept straight on a bamboo hanger inside the house. The knowledge of its weaving is considered to be essential among the young Bonda male. Visitors can see this object from home through the Facebook site of the museum.

One Reply to “22 -28 जून / June, 2020”

  1. इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय द्वारा कोरोना वायरस (कोविड-19) के प्रभाव से उत्पन्न कठिन चुनौतिपूर्ण समय में जनता को संग्रहालय से ऑनलाइन के माध्यम से जोड़ने एवं उन्हें संग्रहालय के ऐतिहासिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत के बारे में गहरी समझ को बढ़ावा देने के उद्देश से शरू की गई नवीन श्रृंखला ‘सप्ताह का प्रादर्श’

    this is a unique and wonderful work by IGRMS and his team

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