ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-34

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला -34
(04 फरवरी, 2021)

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

मुक्ताकाश प्रदर्शनी कुम्हार पारा से
राजस्थान पोखरण की कुम्हारी परंपराएं

भारत के सर्वाधिक आकर्षक पर्यटन स्थलों में से एक राजस्थान कई कारणों से सारी दुनिया को लुभाता रहा है जिनमें इसका संगीत और नृत्य, गौरवशाली इतिहास, गढ और किले, राजप्रासाद, रंग बिरंगे कपड़े, पश्चिमी और उत्तरपश्चिम भाग में सुनहरे रेगिस्तान, जहां-तहां बिखरी धूल धूसरित घाटियां और उनसे जुड़े मैदान, दक्षिण पूर्व में नदियाँ, नाले और झीलों के साथ-साथ हस्तशिल्पों की बहुतायत इनमें से कुछ बहुत ही सहज और स्पष्ट कारक हैं। राजस्थान के हस्तशिल्पों ने अपनी खूबसूरत बनावट और बेहतरीन कारीगरी से विश्व बाजार को न केवल जगमगाया है बल्कि सराहना भी बटोरी है और अपनी एक खास जगह बनायी है।

भारतीय समुदायों खासकर ग्रामीण समुदायों के बीच अनेकता में एकता को समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कतिपय हस्तशिल्पों में से मृदभांड या कुम्हारी कला एक है और इसीलिए मृदभांड को दस्तकारी के अल्फाज़ कहते हैं।

जिनेवा म्यूज़ियम ऑफ़ एथनोलोजी के एक प्रकाशन में कहा गया है कि ’दुनिया में कहीं भी पारंपरिक लोक मृदभांड इतनी महत्वपूर्ण भूमिका नहीं अदा करते जितनी कि भारत में। यह असाधारण महत्व संख्यात्मक और कार्यात्मक दोनों ही रूपों में इस तथ्य से भी उजागर होता है कि अन्य देशों से परे जहां मृदभाण्ड केवल उपयोगिता की वस्तु हैं भारत में मिटटी में कारीगरी को एक सामाजिक आधार और धार्मिक मूल्य प्राप्त है।

जोधपुर और जैसलमेर के बीच स्थित पोखरण राजस्थान का एक कस्बा और प्राचीन धरोहर का शहर भी है। पोखरण का शाब्दिक अर्थ पांच मरीचिकाओं वाले शहर से है क्योंकि यह पांच लवणीय चटटानों से घिरा है और सब दूर रेत ही रेत फैली है।

यह शहर 1974 और कालान्तर में 1998 में भारत के भूमिगत परमाणु शस्त्र परीक्षण स्थल के रूप में चर्चा में आया किंतु उसके भी पहले से पोखरण की मिटटी पारंपरिक कुम्हारों द्वारा तैयार सामानों की एक बडी श्रृंखला उपलब्ध कराती रही है।

पोखरण के कुम्हार विभिन्न रूप और आकारों में, लाल व सफेद रंगों के घरेलू और धार्मिक उपयोग के बर्तन और साथ ही साथ सजावटी सामान भी तैयार करते हैं। जीवन चक्र के किसी भी घटनाक्रम से अभिन्न घरेलू मृदभाण्डों की प्रचुरता होती है और ये विभिन्न रूपों और आकारों में पाये जाते हैं।

सामान्य उपयोग के बर्तन बहुत ही अपरिष्कृत कलात्म्कता और विलक्षणता से मुक्त होते हैं जबकि अवसर विशेष के लिए निश्चित रूप से सजावट और रूपायन किया जाता है। ज्यामितीय रचनाऐं और बेलबूटे उकेरे जाते हैं। इनके बनाये सामानों में सबसे खास लम्बी यात्रा के लिए बहुत उपयोगी पानी की बोतल हैं।

Online Exhibition Series-34
(04th February, 2021)

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

From the Open Air Exhibition of Kumhar-Para
POTTERY TRADITIONAL OF POKHRAN, RAJASTHAN

Rajasthan is one of the most fascinating tourist destination in India continues to attract the world for many reasons. Some of the more obvious ones include its music & dance, venerable history, forts, fortification, palaces, colourful textiles, golden desert to its north-west and west, juxtaposed by the scattered green and dust mantle clad valley, plains and hills of its south-east, with their rivers and rivulets and lakes and multiplicity of handicrafts which are both useful and significant. Handicrafts of Rajasthan have not only dazzled the world market with their fascinating designs and fine finish but have also won accolades and carved a lofty niche for themselves.

     Pottery is one amongst few handicrafts which has been playing a significant role in describing the unity in diversity of Indian communities specially the rural ones, and that is why it is said that pottery is the lyric of handicrafts.

     A publication of the Geneva Museum of Ethnology says,’ nowhere in the world is the part played by traditional folk pottery greater than in India. This exceptional importance, both numerical as well as functional, arises from the fact that while working in clay in India has a sociological basis, it has a religious value unlike various other countries where it is simply utilitarian.”

     Pokharan; a town between Jodhpur and Jaisalmer districts of Rajasthan is also a city of ancient heritage. The word Pokharan literally means “the city of Five Mirages or illusion”, as it is surrounded by fine salt rocks and sand all over.

     The city came into light in 1974 and later in 1998 as the test site for India’s underground nuclear weapon, but even before that through ages the soil of Pokharan has been serving a vast range of earthenware prepared by traditional potters.

     Potters of Pokharan do prepare articles of domestic use, religious and decorative as well in different shapes, size in red and white colour. Domestic pottery is in profusion and found in innumerable shapes and sizes, and inseparable from any scene of life cycle. The common ones are unsophisticated in that it is free of eccentricity and artifice occasion specific certainly have designs and decoration like etched geometrical patterns, floral motifs etc. Most important thing here is that the shape is dictated by the function. The best known item is the water bottle for long journey.

Introductory video on the Open Air Exhibition of Kumhar-Para- POTTERY TRADITIONAL OF POKHRAN, RAJASTHAN