माह का प्रादर्श श्रृंखला – EXHIBIT OF THE MONTH- फरवरी/February, 2021

माह का प्रादर्श श्रृंखला
EXHIBIT OF THE MONTH
फरवरी/February, 2021

थाल – एक पारंपरिक अनुष्ठानिक थाल

समुदायः गद्दी
क्षेत्रः चम्बा, हिमाचल प्रदेष
आरोहण क्र. 95.264
संकलनकर्ताः डाॅ. राकेष मोहन नयाल

परिचय
देवभूमि के नाम से प्रसिद्ध हिमाचल प्रदेश अपनी नयनाभिराम भूसंरचना एवं प्राकृतिक संपदा के लिए प्रसिद्ध है। इसके चंबा जनपद के विविधता पूर्ण शिल्प प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को एक सुदृढ़ आयाम देते हैं। इनमें धातु एवं काष्ठ शिल्प, कशीदाकारी, टोकरी निर्माण इत्यादि सम्मिलित हैं।

प्रस्तुत प्रादर्श पीतल से निर्मित एक पारंपरिक अनुष्ठानिक थाल है जो यहाँ के धातु शिल्प का उत्कृष्ट प्रमाण है। इस थाल को गद्दी एवं अन्य लोक समुदायों द्वारा घरों एवं मंदिरों में पूजा के साथ-साथ वैवाहिक एवं अन्य मांगलिक अवसरों में भी उपयोग किया जाता है।

थाल के प्रकार
चम्बा की धातु शिल्प परम्परा में मुख्यतः दो प्रकार के थाल प्रचलित हैं। –
गणेश थालः जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है इस थाल के केन्द्र में भगवान श्री गणेश का स्थान होता है। चतुर्भुज गणेश की छवि को शंख, चूड़िओं, मुकुट, माला आदि वस्तुओं से सुसज्जित दर्शाया जाता है। सामान्यतः यह आकार में छोटे होते है।

विष्णु थालः इस अपेक्षाकृत बड़े आकार के थाल के केंद्र में कमल पर भगवान विष्णु को स्थान दिया गया है तथा चारों ओर इनके अवतारों – मत्स्य, कच्छप, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, श्री राम, श्री कृष्ण एवं कल्कि को प्रदर्शित किया गया है।

इनके अतिरिक्त कारीगर खरीददार या उपयोग कर्ता की माँग और रूचि के अनुसार आयताकार, वर्गाकार, षटकोणीय आदि आकारों में भी अन्य देवी-देवताओं और उनके कथानकों को दर्षाने लगे हैं।

निर्माण विधि
उभारकर बनायी गयी आकृति वाले अनुष्ठानिक थाल चम्बा जिले के हस्त शिल्प का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इसके निर्माण हेतु धातु को पीट कर ढलाई की तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। थाल का आकार और माप उपयोगकर्ता की रूचि और सामथ्र्य अनुसार होता है। सामान्यः 30, 24, 20, 18 और 16 इंच व्यास के वृत्ताकार थाल बनते हैं और तद्नुसार ही पीतल की चादर को काट लिया जाता है। सर्वप्रथम छैनी, हथौडी तथा ठिया की सहायता से थाली के किनारों को पंखुड़ियों के आकार मे बनाया जाता हैं।

भगवान विष्णु का आरेख चित्र एक कागज में बनाकर उसे थाल के मध्य में चिपका दिया जाता है तथा नुकीली छैनी एवं हथौड़ी के माध्यम से थाल पर चित्र उकेर लिया जाता है। इसी तरह भगवान विष्णु के अवतारों को उकेरा जाता है। प्रत्येक अवतार को वृत्ताकार में छह पंखुडियों वाले फूलों के मध्य में उकेरा जाता है।

हिमाचल प्रदेश के सबसे प्रमुख हस्त शिल्पों में से एक है धातु शिल्प। सामान्यतः देश के समस्त समुदायों में अनुष्ठानिक कार्यो हेतु थाली/थाल का उपयोग किया जाता है किंतु इस प्रकार के बड़े तथा सजावटी थाल का उपयोग गद्दी समाज द्वारा विशेष रूप से किया जाता है।

वर्तमान में ये थाल अनुष्ठानिक कार्यों के साथ-साथ सजावट हेतु भी उपयोग किये जाने लगे हैं।

Thaal-a traditional ritual plate

Community: Gaddi
Area: Himachal Pradesh
Acc. No.: 95.264
Collected by: Dr. Rakesh Mohan Nayal

Introduction
Himachal Pradesh, the land of gods and goddesses is known for its scenic geography and natural prosperity. Crafts of the Chamba district of Himachal Pradesh including metal craft, wood carving, basketry, embroidery etc. also represent the rich cultural tradition of the state.

Present exhibit is a traditional ritual plate that evidences an excellent metal craftsmanship of the area. This traditional plate is used by the Gaddi and other folk communities in households and temples for religious offering as well as the wedding ceremony and other auspicious occasions.

Types of Thaal
Two types of Thaal are prevalent in metal craft traditions of Chamba. –
Ganesh Thaal: As it is obvious with its name that Lord Ganesha occupy the central position in this plate. Four handed image of Shri Ganesh is shown decorated with conch, bangles, crown, garland etc. Usually this type of Thaal is smaller in size.

Vishnu Thaal: This relatively bigger sized plate consists of Lord Vishnu seated on lotus as the central image and surrounded by other incarnations-Matasya, Kurma/ Kachchhap, Varah, Narsingh, Vamana, Parshuram, Shri Ram, Shri Krishna and the Kalki.

Beside these, artists have also started preparing varieties of Thaal in different shapes like rectangular, square, hexagonal etc containing images of other deities and their stories as per the demand and taste of their clients.

Manufacturing Process
These ritual plates with embossed figure are excellent example of handicrafts of Chamba district. Making of such objects is done by using beating technique of casting. Shape and size of Thaal depends on the choice and capacity of the user. Usually 30, 24, 20, 18 and 16 inches are the regular sizes of diameter for circular plates and accordingly brass sheet is cut with help of metal cutter. At first border or the edge of the plate is prepared with help of chisel, hammer and anvil, annular petal motifs are embossed.

Paper drawing of Lord Vishnu is pasted in centre of the plate then craftsmen engrave it with help of pointed chisel and hammer. Similarly incarnations of Lord Vishnu are also engraved around him in a circular manner. Each figure is made in circular form between the six petal flowers.


Metal craft is one of the major handicrafts of Himachal Pradesh. In general, all the communities across the country use plates for ritual purposes, but such type of large and decorative plates are specially used by the Gaddi.

Nowadays these Thaal are also used for decoration purpose besides their traditional use.