08 -14 फरवरी/February, 2021

‘सप्ताह का प्रादर्श-38’
(08 से 14 फरवरी, 2021 तक)

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

चुरा, धातु से बनी पायल की एक जोड़ी

चुरा, धातु से बनी पायल की एक जोड़ी है, जिसे जुडा के नाम से भी जाना जाता है। छत्तीसगढ़ की कमार जनजाति में उपयोग किया जाने वाला यह आभूषण एक महिला की वैवाहिक प्रस्थिति को दर्शाता है। मिश्र धातु से बनी यह पायल स्थानीय कंसारी (धातु शिल्पी) समुदाय द्वारा तैयार की गयी है। पायल का आकार बेलनाकार है तथा इसमें तीन समान गोलाकार उभार  हैं। पहनने की सुविधा के लिए पायल के एक-चौथाई हिस्से को पूरी तरह से अलग किया जा सकता है, और फिर दूसरे हिस्से में मौजूद धातु की दो पतली पट्टियों के द्वारा इसे वापस जोड़ा जा सकता है। विवाहित महिलाएं नृत्य में भाग लेने या परिजनों के घर जाने के दौरान अपने परिवार की प्रस्थिति दिखाने के लिए इसे पहनती हैं। यह पायल वर के परिवार द्वारा वधू को पारंपरिक समारोह ‘चढ़ावे’ में नथुनिया (नोज़ रिंग), बाजुनिया (बाजूबंद), करधनी (कमर आभूषण) के साथ उपहारस्वरूप दी जाती है। इस प्रकार की भारी पायलें अब केवल विशेष समारोहों में ही पहनी जाती हैं। नियमित उपयोग के लिए वे स्थानीय बाजार में उपलब्ध हल्की पायलें पसंद करती हैं।

आरोहण क्रमांक – 89.95
स्थानीय नाम – चुरा, धातु से बनी पायल की एक जोड़ी
समुदाय – कमार
स्थानीयता –रायपुर, छत्तीसगढ़
माप – लंबाई – 6.8 सेमी।, व्यास – 11.3 सेमी।
श्रेणी – ‘ए’

OBJECT OF THE WEEK-38
(08-14 February, 2021)

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

CHURA, A pair of metal anklet

Chura, a pair of metal anklets also known as Juda is used among the Kamar tribe of Chhattisgarh. The ornament has a symbolic association with the marital status of a married woman. The anklet is made of alloy, prepared by the local Kansari (metal caste) community. The shape of the anklet is cylindrical, having three uniformly projected circular flanges along the body. One-fourth anklet can be fully detached to facilitate comfortable wearing, and further, it can be socketed back by inserting two thin metal plates attached to the other part. The married women wear it to show her family status while participating in dance performance or visiting the relatives’ house. It is gifted by the groom’s family to the bride along with Nathunia (nose ring), Bajunia (armlet), Kardhani (waist chain) etc. by following the customary ceremony known as Chadhao. Such heavy metal anklets are now worn only on special occasions. For regular use, they prefer fancy anklets that are available in local haats.

Acc. No. –  89.95   
Local Name  –  CHURA, A pair of metal anklet
Tribe/Community – Kamar
Locality   –  Raipur, Chhattisgarh
Measurement – Length –  6.8 cm.,  Dia.-  11.3 cm.
Category –   ‘A’

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