ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-35

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला -35
(11 फरवरी, 2021)

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

पुनीत वन मुक्ताकाश प्रदर्शनी से
देवराई-महाराष्ट्र के पुनीत वन

महाराष्ट्र राज्य के सिन्धुदुर्ग व रत्नागिरी जिले के प्रत्येक गांवो में करीब एक पुनीत वन अवश्य पाया जाता है, कुछ एक निजी पुनीत वनों या देवराई को छोड़कर बाकी सभी पुनीत वनों की भूमि शासकीय होती है। यद्यपि इसे प्रबंधन व प्रशासन के लिये संबंधित ग्राम पंचायत को सौंप दिया गया है। गांवों के पारंपरिक फैसले लिये जाने वाले संस्था जिसे मनकरिज व गावकर्स कहा जाता है, विशेष रूप से सामाजिक-धार्मिक मामलों मे अत्यंत सशक्त है। व्यक्तिगत उपयोग के लिये देवराई से वृक्षों की लकड़ी, छाल, पत्ती इत्यादि को बाहर ले जाना पूर्ण रूप से वर्जित है।

        इस क्षेत्र के ग्रामीणों का विश्वास है कि पुनीत वन की सभी सम्पत्ति वन-देवता की होती है। इन वनों मे कई महत्वपूर्ण और दुर्लभ वृक्ष प्रजातियाँ पायी जाती है विशेष रूप से पश्चिमी घाट में औषधीय पौधे पाये जाते है, जो कहीं और नहीं पायी जाती या फिर वनों के विनाश या आवश्यकता से अधिक उपभोग के कारण विलुप्त हो गयी हैं। विभिन्न देवराई में विशालकाय वृक्ष जैसे लुप्तप्रायः पेड-पौधों जैसे एन्टीएरिसटोक्सीकेरिया, टरमिनालियाबेल्लारिका, टेट्रामेलेस न्युडिफ्लोरा, इंटाडा आदि पाये जाते हैं। इसके अलावा देवराई मे लुप्तप्रायः पेड-पौधे जैसे सैगरेइयालौरिफोलिया, होलीगरनारनौटियाना, अनैमिरटैकोकुलश, ब्युटियापार्विफ्लोरा व एमोफर्रोफाइलस की कई प्रजातीयाँ यहाँ आज भी संरक्षित है।

प्राकृतिक संपदा का भंडार होने के अलावा देवराई गांववालों के सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उत्सव व निर्णय लेने के अवसरों पर गांव वालों को इकट्ठा होने का स्थान भी प्रदान करता है। बहुत से गांवों मे अन्तेष्टि हेतु जंगल का कुछ भाग आरक्षित किया जाता है। इन पुनीत वनों मे पेड़ों की कटाई व संरक्षण केवल अन्तेष्टि हेतु ही किया जाता है। देवराई क्षेत्रों मे जल का सतत स्त्रोत ह®ता है। देवराई अपने आस-पास के कुँओं को पुनर्जीवित करते हैं तथा शुष्क मौसम में पानी का एकमात्र स्त्रोत होते हैं।

Online Exhibition Series-35
(11th February, 2021)

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

From the Sacred Groves of India Open Air Exhibition
DEVRAI–Sacred Groves of Maharashtra

In Ratnagiri and Sindhudurg Districts of Maharashtra, each village has at least one Sacred Groves. With a few exceptions of privately owned Sacred Groves of  Devraies, lands of all the groves belong to the revenue department. However, it is handed over to respective village panchayats for their management and administration. The traditional decision making body of village, consisting of ‘Mankaries and Gaokars’, is still very strong, specially in taking decision on social-religious matters. Extraction of timber or any other forest produces from Devrai is strictly prohibited for personal use.

The villagers believe that the entire property within the sacred groves belongs to the deity. These groves harbor many important and rare plant species, specially the medicinal plants from Western Ghats, which are hardly found elsewhere are being lost otherwise as a result of deforestation or over-exploitation. Many of these Devraies have giant species of Antiaristoxicaria, Terminaliabellerica and Tetramelesnudiflora as well as lianas like Entada. Population of the species like Antiaristoxicaria, Sageraealaurifolia, Holigarnaarnottiana, Anamirtacocculus, Buteaparviflora and many species of Amorphophyllus, etc are now restricted only to the groves.

Apart from functioning as repositories of the natural wealth, these groves play an important role in the socio-cultural life of these villages and from an integral part of it. These groves provide a place for village gatherings during festivals, as well as at the time of decision-making with respect to community concerns, such as, beginning of agricultural or developmental activities. In many villages a forest patch is specially preserved as cremation or burial ground. The trees in these groves are both preserved as well as cut, only for the purposes of cremation. Many of these sacred groves have perennial sources of water. Devraies have helped in recharging the wells in their vicinity and have provided the only source of water during water scarcity in dry seasons.

Introductory video the Sacred Groves of India Open Air Exhibition : DEVRAI–Sacred Groves of Maharashtra at IGRMS Bhopal