ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-1

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखलाOnline Exhibition Series-1


पारंपरिक तकनीक उद्यान
मुक्ताकाश प्रदर्शनी

TRADITIONAL TECHNOLOGY PARK
Open Air Exhibition

पारंपरिक तकनीक उद्यान
मुक्ताकाश प्रदर्शनी

संक्षिप्त परिचय
सांस्कृतिक उद्विकास का प्रारम्भ मनुष्य द्वारा तकनीकी ज्ञान अर्जित करने के प्रयास से प्रारम्भ होता है। इस शुरुआत को आधुनिक एवं उन्नत तकनीक की तुलना में सरल भले ही कहा जाता हो, परन्तु मानव द्वारा निर्मित एवं उपयोगित प्रथम उपकरण आज भी उसके तकनीकी इतिहास में प्रारंभिक एवं महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

   आज जब हम अपनी अधिकतम दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु तकनीकी क्रांति के उपकरणों पर निर्भर हैं, वहीं आज भी इस देश में ऐसे लोग हैं जो अपनी इन आवश्यकताओं से संबंधित विभिन्न कार्यों को करने के लिये विरासत में प्राप्त पारंपरिक तकनीकी का प्रयोग करते हैं। प्राग औद्योगिक काल तथा उसके सदियों पश्चात भी भारतीय कृषक विविध आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये विभिन्न उपकरण अविष्कृत करते रहे तथा उन्हें आकार प्रदान करते रहे।

 आधुनिक तकनीकी के उत्पादों की आसान उपलब्धता ने पारंपरिक तकनीक को भले ही कम महत्वपूर्ण कर दिया हो फ़िर भी हम उन लोगों को नमन करते हैं जिन्होंने सदियों तक लोगों का निर्वाह करने वाली पर्यावरण के अनुरूप तकनीकों का अविष्कार किया।

  इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने इस प्रदर्शनी को विकसित करने के लिये भारत के विभिन्न हिस्सों से पारंपरिक तकनीक से संबंधित प्रदर्श संग्रहित करने का प्रयास किया है, जिनके माध्यम से हम दर्शकों को सरल समाजों के बौद्धिक एवं रचनात्मक कौशल से परिचित कराना चाहते हैं, और इस तथ्य को रेखांकित करना चाहते हैं कि समकालीन जगत के तकनीकी वैभव में पारंपरिक तकनीक की एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

        संक्षेप में यह प्रदर्शनी भारत की अस्पर्शनीय सांस्कृतिक धरोहर का उत्सव है।

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TRADITIONAL TECHNOLOGY PARK
Open Air Exhibition

Brief Introduction
The dawn of culture witnessed the beginning of acquisition of technological knowledge by the humankind. The beginning might be termed as simple in comparison to the modern and advanced technologies, the humankind has developed, but when the first tool would have been shaped and used by men, that beginning is still the first and most important achievement in the technological history of humankind.

Today in an age when we are blessed with the gadgets of technological revolution for fulfillment of our each and every need, there are also people in this country who still pursue various kinds of works related to their needs of life and professions through the technologies they inherited from their preceeding generations. In pre-industrial period and later for hundred of years also Indian Peasants have invented and shaped various gadgets for meeting various requirements.


The easy availability of products of modern technology has though made this traditional technology more of less insignificant or redundant, but we salute the people who had invented them. They were the technologies which gave sustenance to the people for hundreds of years. Besides, such technologies are eco-friendly in nature.


Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya has made an effort to collect this objects related to traditional technology from various parts of the country to develop this exhibition, through which we wish to tell the visitor about the intelligence and creative genius of simple societies. This is also meant to broaden the perspective of the visitor by emphasizing the fact that traditional technologies contribute an important background to the technological splendor of the contemporary world.


To sum up, this exhibition, in fact is a celebration of the intangible cultural heritage of India.

तिरही – (बीजो से तेल निकालने का उपकरण)
जनसमूह – लोकसमूह
जिला :- सरगुजा
राज्य :- छत्तीसगढ़

तिरही वास्तव मे विभिन्न बीजों से तेल निकालने की पारंपरिक तकनीक है। आजकल तो तेल प्राप्त करने की सभी प्रक्रियायें कारखानों में ही संपन्न होती है फिर भी हस्त संचालित तेल निकालने वाली अति साधारण तकनीक देश के कुछ भागों में पाई जाती है। तिरही एक स्तर पर एक दूसरे पर लगी दो आयताकार लकड़ी के पाटों से बनायी जाती है। तेल प्रदान करने वाले बीजो को कूट कर भाप दिया जाता है, उसके पश्चात इन्हें छाल निर्मित छोटी टोकरियों मे भरा जाता है तथा कम से कम 3 से 4 टोकरियां भर जाने के बाद इन्हें दो पाटों के बीच में डाला जाता है एवं ऊपर वाले पाट से दबाव डाला जाता है, जिसके परिणामस्वरूप बीज पाउडर से तेल निकलता है। इस प्रकार की तकनीक छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के रजवारों मे अब भी प्रयोग किया जाता है।

TIRHI – (Oil Press)
Ethnic Group:- Folk People
District:- Sarguja
State:- Chhattisgarh


‘TIRHI’ is actually a traditional technology through which the oil from different oil seeds are expelled. Now-a-days all kinds of oil expelling is done in modern factories. Even then a very simple technology of manually operated oil press is found in some parts of the country. Tirhi is made from two rectangular long wooden slabs which is fixed through a level one upon another. The seeds from which the oil is to be expelled are threshed and steamed. After that the seeds are filled in the small bark baskets. At a time at least 3-4 filled baskets are put at the centre in between two wooden slabs and the pressure is made from the upper slab which allows to expell the oil from the seed basket. Such technology is still in existence among the Rajwars of Sarguja, district of Chhattisgarh.

Crushing process by mortar pestle

Powdered seeds are steamed

Powdered seeds are thoroughly heated

Filing the baskets with pounded seeds

Filled baskets are kept on one another

Squeezing process by giving pressure

Extracted oil flows through the channel and collected in a container

VIDEO LINK- तिरही – (बीजो से तेल निकालने का उपकरण)TIRHI – (Oil Press)