01 -07 मार्च/March, 2021

‘सप्ताह का प्रादर्श-41’
(01 से 07 मार्च, 2021 तक)

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

रूइह , लकड़ी की अनुष्ठानिक तख्ती

रूईह लकड़ी की एक अनुष्ठानिक तख्ती है जो कार-निकोबारियों में ब्रह्मांड के प्रति उनकी आस्था को अभिव्यक्त करने का एक माध्यम है। वे मानते हैं कि उनके ब्रह्मांड के सभी व्यक्तियों और वस्तुओं में एक आत्मा का वास होता है। मृत सदस्य आत्माओं के रूप में अपने ब्रह्मांड में पुनः आत्मसात हो जाते हैं, जिन्हें परिवार की खुशहाली के लिए अनुष्ठानिक क्रिया कर सम्मानित किया जाना आवश्यक होता है।लकड़ी की ये अनुष्ठानिक तख्तियां आध्यात्मिक और पुरखों की दुनिया के साथ संवाद स्थापित करने का एक शक्तिशाली साधन हैं। मृतकों की आत्माएं पवित्र पक्षियों, पौराणिक चरित्रों या दोनों के संयोजन के विभिन्न रूपों में दिखाई दे सकती हैं । चित्रित तख्ती परिवार या गांव की ओर से शामन द्वारा बुरी आत्माओं के प्रभाव को रोकने के लिए बनाई जाती हैं। जिस स्थान पर यह स्थापित की जाती हैं वहां यह अच्छी आत्माओं को आकर्षित कर दुर्भाग्य, बीमारी और मृत्यु से बचाव करती हैं।

आरोहण क्रमांक – 89.454
स्थानीय नाम – रूइह , लकड़ी की अनुष्ठानिक तख्ती
समुदाय – निकोबारी
स्थानीयता –अंडमान और निकोबार
माप – ऊँचाई – 197 सेमी; चौड़ाई- 105 सेमी;
श्रेणी – ‘ए’

OBJECT OF THE WEEK-41
(01-07 March, 2021)

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

RUIEH, Wooden ritual plate

Ruieh, the wooden ritual plate of Car-Nicobarese community is a medium to express their belief system towards the Universe. They believe that each and every people as well as objects of their Universe are possessed by a spirit. The deceased members get re-assimilated into their universe in the form of spirits which must be honoured and ritually propitiated to bring good fortune to the family. These wooden ritual plates provide a powerful means for communicating with the spiritual and ancestral world. The spirits of the dead may appear in different forms like sacred birds, mythological characters or combination of both. The painted board are made by mineluan- the Shaman, on behalf of the family or the village in order to repel bad spirits. It also attracts good spirits to the place in which it is installed to cure the misfortune, illness and death.

Acc. No. –  89.454
Local Name  –  RUIEH, Wooden ritual plate
Tribe/Community – Nicobarese
Locality   –  Andaman & Nicobar
Measurement – Height – 197  cm., Width- 105
cm;
Category –   ‘A’

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