15 -21 मार्च/March, 2021

‘सप्ताह का प्रादर्श-43’
(15 से 21मार्च, 2021 तक)

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

पायली-एक मापन पात्र

पायली, छत्तीसगढ़ के लोक और जनजातीय समुदायों द्वारा उपयोग किया जाने वाला मापने का एक पात्र है। यह पीतल का बेलनाकार पात्र है जिसका आधार सपाट और ऊपरी हिस्सा संकरा है जो एक संकीर्ण खुले मुंह का निर्माण करता हैं। बाहरी हिस्से को आड़ी पट्टियों और टेढ़ी मेढ़ी लकीरों के रूपांकन से सजाया गया है। इसके मध्य भाग में एक गोलाकार कुण्डी जुड़ी है। मापने वाले ऐसे पात्रों का उपयोग चावल, तेल, नमक और अन्य आवश्यक वस्तुओं के बदले अनाज उत्पादों के आदान-प्रदान के लिए किया जाता था। इस तरह के मापने वाले पात्रों को अब तेजी से तराजू से बदल दिया जा रहा है। पायली का निर्माण हॉलो कास्टिंग की लॉस्ट वैक्स पद्धति द्वारा की गई है। छत्तीसगढ़ में ऐसी धातु की ढलाई का काम घड़वा समुदाय द्वारा की जाती है।

आरोहण क्रमांक – 96.389
स्थानीय नाम – पायली-एक मापन पात्र
समुदाय – बस्तर की जनजातियाँ
स्थानीयता –बस्तर, छत्तीसगढ़
माप – ऊंचाई – 13 सेमी; आधार का व्यास -13.5 सेमी;
श्रेणी – ‘ए’

‘OBJECT OF THE WEEK-43’
(15-21 March, 2021)

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

PAYLI- a measuring pot

Payli is a measuring pot used by the folk and tribal communities of Chhattisgarh. It is a brass pot having a flat base, cylindrical body tappers to form quite a narrow open mouth. The outer body is decorated with horizontal bands and zigzag designs. A ring is attached at the middle portion of the body. Measuring pots were used to exchange the grain products against rice, oil, salt and other essential commodities. Such measuring pots are now being replaced by the measuring scales. Making of Payli involves lost wax technique of hollow casting. In Chhattisgarh such metal casting is done by the Ghadwa community. 

Acc. No. –  96.389
Local Name  –  PAYLI- a measuring pot
Tribe/Community – Tribes of Bastar
Locality   –  Bastar, Chhattisgarh
Measurement – Height – 13 cm., Dia of the base- 13,5 cm
Category –   ‘A’

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