ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-41

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला -41
(25 मार्च, 2021)

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

वीथि संकुल अंतरंग प्रदर्शनी दीर्घा क्रमांक-8 से
भारत के जनजातीय एवं लोक समुदायों में प्रचलित मुखौटे

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय की दीर्घा क्रमांक 08 में भारत के जनजातीय एवं लोक समुदायों में प्रचलित मुखौटों को प्रदर्शित किया गया है। सन 2007 में संग्रहालय के स्थापना दिवस के अवसर पर प्रारंभ की गयी इस दीर्घा में कुल 183 मुखौटे प्रदर्शित हैं जो विभिन्न पर्यावरणिक एवं भौगोलिक क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी और लोक समुदायों में पारंपरिक रीति-रिवाजों, उत्सवों, नृत्यों आदि के अवसर पर पहने जाते हैं। इस दीर्घा में पश्चिम बंगाल के राजबंशी, कर्नाटक के तुलु, मध्य प्रदेश के बैगा, झारखंड एवं हिमाचल प्रदेश के लोक समुदाय, अरुणाचल प्रदेश के मोन्पा, उड़ीसा के चित्रकार, सिकिक्म के बौध्द समुदाय आदि के द्वारा उपयोग किए जाने वाले मुखौटों को प्रदर्शित किया गया है। इस दीर्घा में विभिन्न माध्यमों जैसे लकड़ी, पीतल, पेपर मेशी से बने तथा मोर पंखों से सुसज्जित विविध प्रकार के मुखौटे दिखाये गये हैं जो अपने उद् भव एवं स्थानीय संसाधनों के उपयोग के कारण भौगोलिक पहचान और अद्भुत कलाकारी को प्रकट करते हैं। इन मुखौटों के माध्यम से किसी महान व्यक्ति, पूर्वज देवी-देवता या रक्षकों का रूप धारण कर उनके वास्तविक जीवन के चरित्र को नाटकीय रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाता है।

संग्रहालय की ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला की इस प्रस्तुति के अंतर्गत मुखौटों पर आधारित इस दीर्घा की प्रस्तुति के माध्यम से दर्शकों को भारत के विभिन्न राज्यों की मुखौटा परंपरा से रूबरू कराया जा रहा है।

Online Exhibition Series-41
(25th March, 2021)

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

From the Veethi SankulIndoor Gallery no:8
Masks prevalent among the tribal and

folk communities of India

The Gallery number 8 in the Indoor museum of Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya displays a wide range of collection of masks prevalent among the tribal and folk communities of India. The gallery was opened in the year 2007 on the auspicious occasion of Foundation Day celebration of the Museum. In this gallery, 183 masks are displayed showcasing the aspects of their traditional uses in the ceremonies, festivals and dances of tribal and folk communities residing in the different ecological and geographical settings. The exhibition includes masks from Rajbanshi community of West Bengal, metal mask from the Tulu people of Karnataka, the Baiga of Madhya Pradesh; mask traditions from Odisha and Himachal Pradesh, Buddhist masks from the Monpa tribe of Arunachal Pradesh and Sikkimese people of Sikkim. This gallery exhibits a large variety of masks available in different media like wood, brass, papier-mâché decorated with feathers of peacock which culturally specifies the unique craftsmanship and geographical distinction of their origin and local resources. Using the medium of these masks, the metaphors of various legendary figures, ancestral and guardian deities theatrically presented to inform the masses about the prowess and morals of these characters.

Through this online presentation of the exhibition based on the collection of masks, this museum tries to link our visitors to take a look into the vibrant tradition of the Indian masks.