29 मार्च से 04 अप्रैल तक/29th March to 04th April- 2021

‘सप्ताह का प्रादर्श-45’
(29 मार्च से 04 अप्रैल तक)

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

कुरिम, एक थांका चित्र

थांका धार्मिक चेतना की एक अनूठी कलाकृति है, जो बौद्ध समुदाय के लामाओं (भिक्षुओं) द्वारा परंपरागत रूप से बनाई जाती है। इसे मुख्य रूप से एक कलाकृति से अधिक भक्ति की वस्तु माना जाता है। स्थानीय शब्द कुरीम के नाम से ज्ञात इस चित्र के मध्य में एक देवता के कौशल और दिव्यता को दर्शाया गया है, जो विभिन्न विशेषताओं वाले अन्य देवताओं से घिरे हुए है।

सामान्यतः थांका पवित्र बौद्ध चित्र हैं, जिन्हें कपड़े पर चित्रित कर एक रेशम के कपड़े से ढंक दिया जाता है। रेशम के कपड़े को सामान्यतः मोड़कर शीर्ष पर बांधा जाता है। चित्रकारी की पूरी प्रक्रिया में रेखांकन, प्रतिमा विज्ञान की सटीक समझ, भक्ति भावना और धैर्य की आवश्यकता होती है। थांका बुद्ध, विभिन्न प्रभावशाली लामाओं, अन्य देवताओं और बोधिसत्वों के जीवन उपदेशों के प्रचार का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। थांका के माध्यम से संपूर्ण बौद्ध दर्शन का चित्रण या व्याख्या की जा सकती है।

आरोहण क्रमांक – 95.14
स्थानीय नाम – कुरिम, एक थांका चित्र
समुदाय – बौद्ध समुदाय
स्थानीयता –कुल्लू, हिमाचल प्रदेश
श्रेणी – ‘ए’

OBJECT OF THE WEEK-45
(29th March to 04th April, 2021
)

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

KURIM, A Thangka Painting

Thangka painting is a unique artwork of the religious conscience, traditionally practiced by Lamas (monks) of the Buddhist community. It is primarily considered to be an object of devotion more than an artwork. Known as Kurim in the local term, this painting depicts the prowess and divinity of a deity who is shown centrally positioned, and surrounded by other deities with different attributes.

In general, Thangkas are sacred Buddhist paintings, painted over textile and then covered by a silk cloth usually folded and tied at the top. The entire painting process demands mastery over the drawing, perfect understanding of iconometry, devotion, and patience. Thangka also serves as an important medium of preaching the life of Buddha, various influential lamas, other deities, and bodhisattvas. Through the thangka painting, the entire Buddhist philosophy can be depicted or explained.

Acc. No. –  95.14
Local Name  –  KURIM, A Thangka Painting
Tribe/Community – Buddhist community
Locality   –  Kullu, Himachal Pradesh
Category –   ‘A’

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