माह का प्रादर्श श्रृंखला – EXHIBIT OF THE MONTH- अप्रैल/April, 2021

गजमुख – हाथी मुखौटा
समुदायः लोक आरोहण क्र. T/2008.101
कलाकारः मंजुलता महापात्र, रघुराजपुर, ओडिशा

GAJAMUKHA – Elephant Faced Mask
Community: Folk Acc. No.: T/2008.101
Artist: Manjulata Mahapatra, Raghurajpur, Odisha

शुभ के देवता भगवान गणेश की मूर्तियों या उनके प्रतीक का घर में होना हिंदुओं में अच्छा माना जाता है। यहाँ प्रदर्शित मुखौटा भगवान गणेश का प्रतिनिधित्व करता है। गजमुख भगवान गणेश के 21 नामों में से एक है। भारत का तटीय राज्य ओडिशा अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है और रचनात्मक कला उस के सबसे महत्वपूर्ण तत्वों में से एक है। गजमुख दो शब्दों गज और मुख से मिलकर बना है जिसमें गज का अर्थ हाथी और मुख का अर्थ चेहरा है। उड़िया स्थानीय बोली में भी मुखौटे के लिए मुखा शब्द का उपयोग किया जाता है। ओडिशा में लकड़ी, सोलापिथ, पेपर मेशी, गोबर आदि विभिन्न माध्यमों में तैयार किए गए मुखौटों की एक विस्तृत श्रृंखला है। वजन में हल्की होने और आसान उपलब्धता के कारण ओडिशा के कलाकारों में कागज या कागज की लुगदी को मुखौटे, खिलौने और विभिन्न सजावटी वस्तुएं बनाने के लिए सबसे बेहतर माध्यम माना जाता है। इन कला वस्तुओं में व्यक्त लोक कलाकारों की तकनीकी विशेषज्ञता और सौंदर्य बोध अद्भुत है। यद्यपि मुखौटे का उपयोग विभिन्न प्रयोजनों जैसे सजावट, नृत्य, धार्मिक जुलूस आदि के लिए किया जाता है तथापि  इस प्रकार के विशाल मुखौटे मुख्यतः सजावटी उद्देश्य के लिए उपयोग किए जाते हैं।

मुखौटा निर्माण

            सर्वप्रथम वांछित आकार का एक आधार मोल्ड तालाब से संकलित की गई कठोर एवं चिपचिपी मिट्टी से बनाया जाता है और धूप में सुखाया जाता है। इस सांचे पर कागज की कई परतों को इमली के बीज की गोंद से लगातार कठोर होने तक रखा जाता है। कठोर हो चुके मुखौटे को नुकीले औजार की मदद से सांचे से अलग किया जाता है और इसे मजबूत बनाने के लिए गाय के गोबर, दीमक की बांबी की मिट्टी और गोंद का लेप लगाया जाता है। बड़े आकार के मुखौटे के लिए विभिन्न भाग यथा सूंड़ और कान पृथक-पृथक बनाकर जोड़ लिए जाते है। आकार बढ़ाने और वस्तु के स्थायित्व को सुनिश्चित करने के लिए कागज और गोंद का एक बार फिर से उपयोग किया जाता है। इसके बाद चाक मिट्टी और गोंद की एक परत लगाई जाती है। अगले चरण में चेहरे की विशेषताओं को उकेरा जाता है और सतह को चिकना करने के लिए नारियल के रेशों और सूती कपड़े की मदद से रगड़ा जाता है। पटचित्र बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले प्राकृतिक रंगों से ही मुखौटों को भी सजाया जाता है। कलाकार वस्तु के आकार अनुसार विभिन्न वानस्पतिक बेलबूटे बनाकर उन्हें सुशोभित करते हैं। रघुराजपुर के कलाकारों का रचनात्मक कौशल विभिन्न प्रकार के पट्टचित्रों, नारियल के खोल, लैंप शेड, लकड़ी के खिलौनों एवं अन्य शिल्प वस्तुओं में दिखाई देता है। ये कलाकार रामायण, महाभारत एवं भगवान जगन्नाथ के प्रसंगों से संबंधित चित्रों के लिए प्रसिद्ध हैं।

औजार एवं आवश्यक सामग्री

            एक पेपर मेशी वस्तु की सुंदरता इसके सुंदर रंगों में निहित होती है। ओडिशा के पेपर मेशी कलाकार चमकीले रंगों को पसंद करते हैं जो वस्तु की सुंदरता को बढ़ाते हैं। काले या किसी गहरे रंग की पृष्ठभूमि पर विभिन्न रंगों का प्रयोग किया जाता हैं। रंगों को खनिजों और वनस्पतियों जैसे प्राकृतिक संसाधनों से प्राप्त किया जाता है और उनकी दीर्घायु सुनिश्चित करने के लिए वानस्पतिक गोंद भी उपयोग की जाती है। सीप के चूर्ण से सफेद, रेड आक्साइड पत्थर से लाल, सूत / दीपक से काला, इंडिगो से नीला और बैंगनी, हरिताल (एक प्रकार का पत्थर) से पीला और पत्तियों से हरा रंग तैयार किया जाता है। हालाँकि मुखौटे सहित पेपर मेशी की अन्य वस्तुओं को तैयार करने में ज्यादातर हाथ से ही कार्य किया जाता है तथापि बारीक छेनी, तेज चाकू आदि औजारों का भी उपयोग किया जाता है। अन्य सामग्री जैसे दीमक की बांबी की मिट्टी, गाय का गोबर, मिट्टी, कागज, चाक पाउडर, इमली के बीज की गोंद, वार्निश आदि का उपयोग भी किया जाता है।

Lord Ganesha is considered as the deity of auspicious therefore having idols or a symbol of Ganesha in any form is considered good amongst Hindus. This exhibit Gajamukha – elephant faced mask represents Lord Ganesha. Gajamukha is one of 21 names of Lord Ganesha. Odisha a coastal state of India is known for its rich cultural heritage and creative art is one of its most important element. Gajamukha is comprised of two words Gaja and Mukha in which Gaja means elephant and Mukha means face. In Oria local dialect Mukha is used for mask. In Odisha one can find wide range of masks prepared in various mediums like wood, solapith, papier-mâché, cow dung etc. Being light in weight and because of easy availability paper or paper pulp is most preferable medium for crafting masks, toys and various decorative items by the artists of Odisha. Technical expertise and aesthetic sense of rural artists expressed in these articles is amazing. Although masks are used for various purposes like decoration, dances, religious procession etc. but this type of huge masks mostly find space on walls for decorative purpose.

Process of Making Mask

A base mould of desired size and shape according to the object is made with hard and sticky clay collected from the pond and dried in sun. This mould is covered with several layers of paper using tamarind seed glue and kept to be hard. This harden mask is separated from the mould with the help of sharp tool and coated with a layer of mixed cow dung, ant hill clay and glue to increase the strength of the mask. In case of big size mask different parts like trunk and ears are made separately and joined together. A composite of paper and glue are again applied to increase the size and ensure the durability of object. After this a layer of chalk mitti and glue is applied. Next step is carving out facial features and smoothening of surface by rubbing with the help of coconut fiber and cotton cloth or stone. Natural colours used for making pattachitra are also applied for decorating the mask. According to the shape and size of object, artists beautify them by making different floral patterns. Creative skill of artist of Raghurajpur is visible in various forms of pattachitra, coconut shell, lamp-shade, wooden toys, and different craft items. These artists are famous for their paintings related with the episodes related to Ramayana, Mahabharata and Lord Jagannath.

Tools and Essential Materials

            Beauty of a papier-mâché object lies in its colourful appearance. Papier-mâché artists of Odisha are fond of bright colours which enhance the glow of object. Various shades of colours are applied on black or any darker background. Colours are obtained from natural resources like minerals and vegetables and to ensure their longevity vegetable glue is also added. White colour is prepared from conch shell powder, Red from red oxide stone, Black from Soot / lamp black, Blue and Violet from Indigo, Yellow from Haritala (a kind of stone) and Green from leaves. Preparation of papier-mâché objects including mask is mostly based on hand moulding but a little bit use of tools like fine chisels, sharp knife etc. is also there. Other materials like ant hill clay, cow-dung, clay, paper, chalk powder, glue made of tamarind seeds, varnish etc. are also used.