ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-44

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला -44
(15 अप्रैल, 2021)

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

पुनीत वन मुक्ताकाश प्रदर्शनी से
ओरणः राजस्थान के पुनीत वन

राजस्थान में रहने वाले विशनोई समुदाय के साथरी (मंदिरों) से जुड़े पुनीत वन ओरण कहलाते है| संभवतः ओरण शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के उपारण्य शब्द से हुई है जिसका अर्थ छोटावन या उपवन है| हर साथरी के साथ ओरण का जुड़ा होना आवश्यक है तथा विशनोई समाज द्वारा यहां की लकड़ी काटना सर्वथा वर्जित है| ओरण अनेक पक्षियों तथा जानवरों को भी संरक्षण प्रदान करते हैं जिसमें कृष्ण-मृग, चीतल आदि है जिन्हें वन्य जीवन रक्षा एक्ट-1972 के अंतर्गत सुरक्षा प्राप्त है|

संग्रहालय परिसर में ओरण पुनीत वन के अंतर्गत पश्चिमी राजस्थान की लगभग लुप्तप्राय पेड़-पौधों की प्रजातियों का रोपण किया गया है| इनमें खेजड़ी, रोहेड़ा, खैर, फाग आदि प्रमुख हैं|

Online Exhibition Series-44
(15th April, 2021)

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

A view of Oran Sacred Grove developed in IGRMS campus

From the Sacred Groves of India Open Air Exhibition
Oran: Sacred Groves of Rajasthan

means a small forest. It is mandatory for every Sathris to have an Oran, from where cutting of any tree is strictly prohibited, as per Bishnoi principles. Orans serve as refuge to many birds and are frequented by many animal species like Black-bucks and Indian Gazelles, which are receiving protection under the Wildlife Protection Act-1972.

In the museum campus, the Oran precinct has been designed with the plantation of rare and endangered species; collected from western Rajasthan. Major plant species in this precinct comprises prosopiscineraria (Khejari), Tecomellaundulata (Roheda), Capparisdedidua (Khair), and Calligonumpolygonoides (Phog).

Performance of ritual during Oran Sacred Grove festival at IGRMS
Performance of rituals during Oran Sacred Grove Festival at IGRMS
Public gathering during ritual ceremoney at Oran Sacred Grove Festival in IGRMS
Story telling by traditional men at Oran sacred grove festival at IGRMS
Introductory video on the Sacred Groves of India Open Air Exhibition at IGMS- Oran: Sacred Groves of Rajasthan