ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-45

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला -45
(22 अप्रैल, 2021)

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

मरु ग्राम मुक्ताकाश प्रदर्शनी से
नीम की धांणीः झोपा राजपूत समुदाय का पारंपरिक आवास, जैसलमेर

राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों मे मुख्य बस्तियां (आबादी) और घर (धानियां) हमेशा कृषि भूमि के करीब स्थित होते हैं। घरो के निर्माण के लिए विभिन्न सामग्रियों का उपयोग उनकी स्थानीय उपलब्धता पर निर्भर करता है। आवास प्रकार की संरचना का जलवायू की परिस्थितियों से निकट सम्बंध होता है। राजस्थान मे गर्मी की अधिकता और सर्दियों मे काफी ठंडक होती है इस लिये काफी हद तक घरों के निर्माण मे सामग्रीयों के उपयोग जलवायू के अनुरूप ही करते है। इन आवासों को स्थानीय भाषा मे ‘‘झोपा‘‘ कहते हैं। इस गोलाकार झोपड़ी में छज्जे वाली छत होती है। झोपा स्वतंत्र रूप में या एक संकुल के रूप मे होता है। ‘‘नीम की धांणी‘‘ शीर्षक से संग्रहालय की ‘‘मरूग्राम‘‘ मुक्ताकाश प्रदर्शनी में प्रदर्शित यह आवास प्रादर्श ग्रामीण राजस्थान के पारम्परिक आवास प्रकार का प्रतिरूप है।

जैसलमेर से संग्रहित यह आवास राजस्थान के राजपूत समुदाय का है। छोटी-छोटी इकाइयों से मिल कर बने इस आवास संकुल मे वील अथवा जालीयुक्त कोठा अर्थात बैठक कक्ष की स्थिति केन्द्रीय होती है। जिससे जुड़ा महिलाओं के लिए छोटा सा कक्ष ‘‘कुड़‘‘ तथा एक अन्य अतिथि कक्ष ‘‘चौराहा ओत्तारा‘‘ होता है। ‘‘कोठा‘‘ के बायी ओर एक अन्य ‘‘कुड़‘‘ रसोई तथा ‘‘चौहारा‘‘ नामक कक्ष नववधु के लिये निर्मित किया जाता है। अनाज भंडारण के उद्देश्य से बाहरी दीवार के साथ दोनो और निर्मित ‘‘कंसार‘‘ या ‘‘झुम्पी‘‘ इस क्षेत्र मे रहने वाले लोगो के वास्तु और सौन्दर्य बोध की अभिव्यक्ति है। पत्थर और मिट्टी से निर्मित दीवारों की छत स्थानीय रूप से उपलब्ध कैट नामक लकड़ी तथा मुरठ घास से आच्छादित है।

Online Exhibition Series-45
(22nd April, 2021)

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

From the Desert Village of India Open Air Exhibition
NEEM KI DHANI (JHOPA-Traditional dwelling complex of Rajput community, Jaisalmer)

In rural Rajasthan main settlements (Abadi) and the hamlets (Dhanis) are always located close to the agricultural land. The use of different materials for building the houses mainly depends upon their local availability. The type of structure is closely related to the climatic conditions. One of the most characteristic feature of Rajasthan is the great extremes of temperature. The winter is quite cold. The geography and the resultant climate determines to a large extent the use of the materials in the construction of houses and their structural detail. The usual form of dwelling is locally known as ‘Jhopa’ This is a circular hut with thatched roof we can find “Jhopa” either independent or in a complex The exhibit entitled “Neem ki Dhani” displayed in the “Desert village” open air exhibition of IGRMS is of a Traditional house type of  rural Rajasthan.

            “Kotha”; the drawing room or living room with elaborated “Jali” occurs the central position in house linked with ‘Kud’, a small room for women and “Chouhara ottara” another small unit as guest room at left however another ‘Kud’ as kitchen and Chouhara; for new bride have been constructed subsequently. Inbuilt “Kansar” (Jhumpis) for storing grains at both side of the boundary wall are the self expression of aesthetic and architectural sense of the populations residing in that area. The material used for walls in stone and mud (sand soil), thatched roof is made of ‘Kair’ wood and locally available grass “Murath” supported by two stone pillars inside the “Kotha”.

Introductory video on the Desert Village of India Open Air Exhibition- NEEM KI DHANI (JHOPA-Traditional dwelling complex of Rajput community, Jaisalmer)