17 से 23 मई तक/17th to 23rd May- 2021

‘सप्ताह का प्रादर्श-52’
(17 से 23 मई, 2021 तक)

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

चुंडन वल्लम / पल्ली-ओडम, केरल की सर्प नौका

चुंडन वल्लम अंजलि की लकड़ी से बनी एक लंबी सर्प नौका है। यह नौका फण की तरह अपने उठे हुए अग्र भाग के कारण एक सर्प की तरह दिखती है। इस विशेष नौका ने केरल में लगभग 10 दशक पहले वार्षिक वल्लम काली उत्सव (नौका उत्सव) में भाग लिया था। इसे अपने बड़े आकार के कारण इंगांरामासं की प्रदर्शनी का महत्वपूर्ण प्रादर्श माना जाता है। इस नौका ने कई प्रतिस्पर्धाएं जीतीं है। कहा जाता है कि यह नौका 1960 के दशक में अरनमुला में एक वार्षिक नौका उत्सव के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की उपस्थिति की साक्षी रही है ।

सर्प नौका को विखंडित किए बिना इसके अपने मूल स्थान केरल के पत्थनमथिट्टा जिले से , इंगांरामासं भोपाल तक लाने हेतु इसके परिवहन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू भी अंतर्निहित है। स्थानीय समुदाय की मान्यता अनुसार सर्प नौका देवी लक्ष्मी का एक रूप होने के कारण इसे विखंडित नहीं किया जाता अतः इसके परिवहन के लिए लगभग 120 फुट लंबे तीन ट्रक ट्रेलर के संयोजन का उपयोग किया गया था। भोपाल के स्थानीय मलयाली समुदाय ने इंगांरामासं में सर्प नौका की संस्थापना के समय इसके स्वागत हेतु अपने पारंपरिक अनुष्ठान संपादित किए थे। पत्थनमथिट्टा जिले के पूवथूर ग्राम के ग्रामीणों द्वारा इस नौका को  उच्च सम्मान के प्रतीक स्वरूप सामुदायिक संपत्ति के रूप में संभाल कर रखा गया था, क्योंकि भारत के पहले प्रधानमंत्री ने थोड़ी देर के लिए इसमें यात्रा की थी।

आरोहण क्रमांक – 90.695
स्थानीय नाम – चुंडन वल्लम / पल्ली-ओडम, केरल की सर्प नौका
समुदाय – लोक
स्थानीयता –पूवथूर गांव, पठानमथिट्टा, केरल
श्रेणी –
ए’

OBJECT OF THE WEEK-52
(17th to 23rd May, 2021)

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

CHUNDAN VALLAM / PALLI-ODAM, Snake boat of Kerala

 Chundan Vallam is a long snake boat made out of Anjali wood. The boat resembles a snake with its hood raised. This particular boat participated in the annual Vallam Kali festival (boat festival) for nearly 10 decades ago in Kerala. It is considered to be a prized object of IGRMS display because of its large size. This boat won several races, and was said to be blessed by the then Prime-Minister of India Pandit Jawahar Lal Nehru during one of the annual boat festival in Aranmula, where he was the chief guest for the occasion, in 1960s.

One of the significant aspect attached with the snake boat is underlying in its transportation from its native place to IGRMS, Bhopal. The snake boat is brought from Patnamthitta district of Kerala without dismantling. It is a belief among the local community that being a form of Devi Laxmi they never allow to dismantle it. A combination of three truck trailer around 120ft long was used for its transportation. The local Malayali community of Bhopal performed their traditional rituals for welcoming of snake boat at the time of its installation in IGRMS. The boat was earlier maintained as a community property, as a symbol of high esteem, by the villagers of Poovathoor in Pathanamthitta district as the first Prime Minister of India ferried in it for a while.

Acc. No. – 90.695
Local Name  –  CHUNDAN VALLAM / PALLI-ODAM, Snake boat of Kerala
Tribe/Community – Folk

Locality   –  Poovathoor village, Pathanamthitta, Kerala
Category –   ‘A A’

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