ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-49

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला -49
(20 मई, 2021)

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

पारंपरिक तकनीक उद्यान मुक्ताकाश प्रदर्शनी से
तुई-चांगशु
(धान कूटने का जल संचालित पारंपरिक उत्तोलक)

तुई – चांगशु मणिपुर की कुकी जनजाति के लोगों द्वारा व्यापक रूप से उपयोग में किया जाने वाला काष्ठ निर्मित एक पारंपरिक उपकरण है। इसका उपयोग कुकि समुदाय के लोगों द्वारा धान की कुटाई कर उसका भूसा हटाने एवं चावल प्राप्त करने में किया जाता है। कुकी जनजाति उत्तर-पूर्व के विभिन्न राज्यों मणिपुर, असम, मिजोरम एवं त्रिपुरा आदि में मुख्य रूप से पायी जाती है। यह मणिपुर राज्य के कुछ जिलों- कंगपोकपी, चांदेल व सुल्तानपुर इत्यादि में सघन रूप से निवास करती है।

तुई-चांगशु एक विशेष प्रकार का उत्तोलक है जो प्राकृतिक रूप से प्रवाहित जल के प्रवाह से स्वतः ही संचालित होता है। स्थानीय भाषा में थी-शूम कहा जाने वाला खंदक (छोटी डोंगी) का निर्माण खेराई नामक स्थानीय वृक्ष की लकड़ी से किया जाता है। इसकी लंबाई लगभग 12 फीट होती है। इसके एक छोर पर मूसल एवं दूसरे छोर पर प्यालीनुमा नॉकाकृति संरचना होती है। इस नॉकाकृति के प्यालेनुमा भाग के ऊपर तेज बहते हुए जल को काष्ठ निर्मित नाली के द्वारा थी-शूम पर गिराया जाता है। यह उपकरण उत्तोलक की तरह कार्य करता है। नॉकाकृति के प्यालेनुमा भाग में पानी के भरने पर उसका यह भाग अधिक भार के कारण नीचे चला जाता है और इसकी संरचना के अनुरूप नीचे जाकर इससे पानी अलग होकर बाहर निकल निकल जाता है। लकड़ी के प्यालेनुमा भाग से पानी के निकलते ही नॉकाकृति भाग का भार कम हो जाता है जिसके परिणाम स्वरूप वह पुनः ऊपर की ओर बापस आता है। इस प्रक्रिया के परिणाम स्वरूप खंदक का दूसरा छोर व उसमे स्थापित किया गया मूसल नीचे की ओर जाकर जमीन पर स्थापित ओखली में अधिक दवाव के साथ गिरता है।

यह प्रक्रिया सतत चलती रहती है। पत्थर में गड्डा खोदकर तैयार की गई ओखली में धान को रखा जाता है व इसके ऊपर मूसल के द्वारा लगातार आघात किया जाता है।धान के कुटे जाने के बाद उसे निकालकर उसकी जगह पुनः दूसरा धान डाला जाता है। संग्रहालय में विभिन्न अवसरों पर संबंधित समुदाय के द्वारा इसकी संचालन विधि का जीवन्त प्रदर्शन भी किया जाता है। इस पारंपरिक प्रदर्श को संग्रहालय में दर्शकों के भ्रमण के लिये 20 मार्च, 2008 में स्थापित किया गया था।

Online Exhibition Series-49
(20th May, 2021)

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

From open air exhibition -Traditional Technology Park
Tui– Changshu
(Traditional pounding lever operated by the water)

Tui – Changshu is a traditional made wooden pounding tool widely used by the Kuki tribe of Manipur state. It is used by the people of Kuki community to hitting paddy and remove rice husk to obtain rice. The Kuki tribe is found primarily in various states of North East India such as Manipur, Assam, Mizoram and Tripura etc. It is densely inhabited in Kangpokpi, Chandel and Sultanpur etc districts of Manipur state.

Tui-Changshu is a typical form of pounding lever that is operated automatically by the flow of naturally flowing water. Dugout wooden log called Thi-Shum in the local language is made from the wood of a local tree called Kherai. Its length is about 12 feet. The pestle at one end and the cup-shaped trench at the other end which is dugout shaped in structure. The water flowing in speed over the cup shaped part of this dugout is dropped on the The-shum by a wooden canal. It acts like a lever. When the water is fully filled in the trench of dugout, it goes down due to weight of water and the water spills out on going down according to its structure. When the trench of dugout gets empty due to spilling of water as a result, the dugout comes back up again. As a result of this process, the other end of the dugout and the pestle installed in it falls downwards with high pressure in the mortar installed on the ground.

This process continuously goes on. Paddy is placed in mortar made by digging in stone, on which the pestle is constantly beaten. After the paddy is crushed, it is taken out and replaced again with another paddy. A live demonstration of its mode of operation is also performed by the concerned community on various occasions in the museum. This traditional object was installed on 20th March 2008 for visitors in the museum.

Introductory video open air exhibition -Traditional Technology Park
Tui– Changshu (Traditional pounding lever operated by the water)