24 से 30 मई तक/24th to 30th May- 2021

‘सप्ताह का प्रादर्श-53’
(24 से 30 मई, 2021 तक)

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

बरसेला, पाषाण स्मृति स्तंभ

बरसेला स्मृति शिला स्तंभ हैं जिन्हें मुख्यतःमृतकों की स्मृति में स्थापित किया जाता है। मृतकों की आत्माओं की पूजा एक महत्वपूर्ण धार्मिक कार्य माना जाता है। हिमाचल प्रदेश में इन स्मृति शिलाओं को स्थानीय रूप से बरसेला या बरसीले के नाम से जाना जाता है। इनका निर्माण या उत्कीर्णन शाही विशेषाधिकार के रूप में राजाओं, रानियों और उपपत्नियों की याद में किया जाता था। इसे सती शिला भी कहा जाता है। रानियां और अन्य महिलाएं जिन्होंने अपने मृत पति की चिता पर स्वयं की आहुति दी हो, उन्हें सती कहा जाता है। इस स्मृति शिला में एक अलंकृत आले के अंदर राजा और रानी की आकृतियों को एक साथ उत्कीर्णित किया गया है। शिला पर मृतकों की आकृतियां इस तरह से उकेरी गई हैं कि इस उद्देश्य के लिए प्रयुक्त मूल पत्थर की मोटाई बरकरार रहे। इन स्मृति शिलाओं की राजा और रानी की मृत्यु के एक वर्ष पश्चात तक मृतक के परिवार द्वारा पूजा की जाती थी। बरसेला महत्वपूर्ण स्मृति शिलाएं हैं जिनसे प्राचीन पारंपरिक पदानुक्रमित सांस्कृतिक व्यवहारों की जानकारी प्राप्त होती हैं।

आरोहण क्रमांक – 99.349
स्थानीय नाम – बरसेला, पाषाण स्मृति स्तंभ
समुदाय – लोक
स्थानीयता –कुल्लू, हिमाचल प्रदेश
श्रेणी –
ए’

OBJECT OF THE WEEK-53
(24th to 30th May, 2021)

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

Barsela, Stone memorial pillar

Barsela are memorial stone pillars mainly erected in the memory of dead. The reverence of souls of dead is considered to be a religious act of merit. In Himachal Pradesh the memorial stones are locally known as Barsela or Barsile. These were constructed or carved in the memory of kings, queens and concubines and considered as a royal privilege. It is also called as sati stones. Queens and other women who burnt themselves on the pyre of their dead husbands are called sati. In this memorial stone the carved figures of king and queen is depicted together within a ornamented niche. The figures of the dead are carved upon the slabs in such a way that the thickness of the original stones used for the purpose remains intact. These memorial stones were worshipped by the deceased family for one year after  the death of the king and queen. Barsela are valuable memorial stone for ascertaining the old traditional hierarchical cultural practices.

Acc. No. – 99.349
Local Name  –  Barsela, Stone memorial pillar
Tribe/Community – Folk

Locality   –  Kullu, Himachal Pradesh
Category –   ‘A’

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