31 मई से 06 जून तक/31st May to 06th June- 2021

‘सप्ताह का प्रादर्श-54’
(31 मई से 06 जून, 2021 तक)

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

चौंसठी देवी के अनुष्ठान को दर्शाता गोंड चित्र

यह पेंटिंग गोंड जनजाति के टेकाम गोत्र द्वारा विशेष रूप से पूजी जाने वाली मातृदेवी “चौंसठी देवी” के अनुष्ठान को दर्शाती है। हर साल चैत्र (मार्च-अप्रैल) नवरात्रि के दौरान सुख समृद्धि के लिए देवी की पूजा की जाती है।  वे अपनी मनोकामना पूरी होने पर पूजा के दौरान देवी को हिरनौती अर्पित करते हैं।  हिरनौती, बहुसंख्यक बाती वाला एक दीपक है। इसका आकार हिरण की तरह होता है और यह एक सांप से लिपटा होता है।  लोहे के ये दीपक अगरिया समुदाय द्वारा बनाए जाते हैं जिन्हें गोंडों की उप जनजाति में से एक माना जाता है। यह पेंटिंग प्रख्यात गोंड कलाकार स्वर्गीय श्री जनगढ़ सिंह श्याम द्वारा कैनवास पर  बनाई गई है। उन्होंने केंद्र में देवी को दो अलग-अलग रूपों में जटिल विवरण के साथ चित्रित किया है और देवी के दोनों ओर विभिन्न आकारों के त्रिशूलों को भी दर्शाया है।

आरोहण क्रमांक – 99.157
स्थानीय नाम – चौंसठी देवी के अनुष्ठान को दर्शाता गोंड चित्र।
समुदाय – गोंड
स्थानीयता –मंडला, मध्य प्रदेश
श्रेणी –
ए’

OBJECT OF THE WEEK-54
(31st May to 06th June, 2021)

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

Gond Painting depicting the ritual of Chounsathi Devi

This painting illustrates the ritual scene of “Chounsathi Devi”, the mother goddess specially worshipped by the Tekam clan of Gond tribe. The deity is worshipped every year during Chaitra (March-April) Navratri for the well-being, prosperity and happiness. During the worship they offer Hirnouti to the goddess after fulfilment of their wishes. Hirnouti, is a form of multi wicked lamp. It is shaped like a deer and wrapped by a snake. These iron lamps are made by the Agaria community who is considered to be one of the sub tribe of Gonds. This Painting is created on  canvas by famous Gond artist Late Shri Jangarh Singh Shyam. He portrayed the deity at the centre with intricate details of goddess superscribed in two different looks. On both sides of the goddess he also depicted tridents in different sizes.

Acc. No. – 99.157
Local Name  –  Gond Painting depicting the ritual of Chounsathi Devi
Tribe/Community – Gond

Locality   –  Mandla, Madhya Pradesh
Category –   ‘A’

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