ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-53

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला -53
(17 जून, 2021)

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

पुनीत वन मुक्ताकाश प्रदर्शनी से
माउ-बु-खार : मेघालय के पुनीतवन

माउ-बु-खार, मेघालय के माउफलांग क्षेत्र के खासी जनजाती का एक पुनीत वन है और पवित्र पाषाण स्तम्भ उनके देवता के स्वरूप है। पुनीत-वन, मेघालय के लोगों के दैनंदिन जीवन व संस्कृति का हिस्सा है। पारंपरिक मूल्यों के तेजी से होते विघटन के बावजूद कई पुनीत वन आज भी सुरक्षित हैं। मान्यता है कि इन पुनीत वनों में देवता और पुरखों की आत्माएं वास करतीहै। ऐसे अनेक पुनीत वन, पूर्वी खासी जिले की पहाड़ी, चेरापूंजी क्षेत्र में स्थित है। उत्तर-पूर्वी भारत के कुछ प्रसिद्ध पुनीत वनों में शिलांग के निकट स्थित माउफलांग तथा चेरापूंजी के निकट माउसमाई वनहैं। लोगों के बीच यह विश्वास है कि यहां लगे पेड़ों की लकड़ी, छाल, पत्ते, आदि कुछ भी यहां से बाहर ले जाया गया तो इससे यहां रहने वाले देवता रूष्ट हो जायेंगे तथा लोगों को विपदाओं का सामना करना होगा।

Online Exhibition Series-53
(17th June, 2021)

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

From Sacred Groves open air exhibition
Maw-Bu-Khar : Sacred groves of Meghalaya

The Maw-Bu-Khar is the sacred grove of the Khasis of Maw Phlang area, and the sacred stone pillars represent Khasi Gods. Sacred groves have been a part of the life and culture of the people of Meghalaya. Many sacred groves are still well protected, in spite of rapid decline in the traditional value system. The traditional religious belief is that the Gods and spirits of ancestors live in these groves. A large number of groves are located in the Cherrapunji region of the East Khasi Hill District. The Mawphlang grove, close to Shillong town, and the Mawsmai grove in Cherrapunji are some of the famous groves in the Northeast India. Traditionally, people around these groves believe that removal of plants or plant parts would offend the ruling deity, leading to local calamities.