21 से 27 जून तक/21st to 27th June- 2021

‘सप्ताह का प्रादर्श-57’
(21 से 27 जून, 2021 तक)

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

बांकुरा घोड़ा
लकड़ी के घोड़े की एक जोड़ी।

लकड़ी के घोड़ों की यह जोड़ी पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले के कुंभकारों द्वारा बनाए जाने वाले टेराकोटा घोड़े की प्रतिकृति है। अत्यधिक अलंकरण एवं लंबी गर्दन वाला खोखला टेराकोटा घोड़ा बांकुरा के घोड़े की पहचान है। आजकल बांकुरा घोड़े, विशेष रूप से लकड़ी से निर्मित, घर में बैठक की शोभा बढ़ाने की वस्तु बन गए हैं। बांकुरा में टेराकोटा घोड़े और हाथी मूल रूप से कुम्हारों की रचना हैं। समय के साथ इनकी उपयोगिता एक यथार्थवादी प्रस्तुति से प्रतिनिधि प्रस्तुति में बदल गई है। कुम्हारों ने पशु शरीर के विभिन्न हिस्सों पर इस तरह से ध्यान केंद्रित किया कि उनका प्रतिनिधित्व संपूर्ण शरीर की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हो गया। मूल रूप से टेराकोटा घोड़े विभिन्न स्थानीय देवी-देवताओं को दैनिक जीवन के संकटों और बीमारियों से बचाव के लिए मानी गई मनौती की पूर्ति के लिए अर्पित किए जाते थे।

आरोहण क्रमांक – 97.549
स्थानीय नाम – बांकुरा घोड़ा, लकड़ी के घोड़े की एक जोड़ी।
समुदाय – लोक
स्थानीयता –बांकुरा, पश्चिम बंगाल
श्रेणी –
ए’

OBJECT OF THE WEEK-57
(21st to 27th June, 2021)

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

BANKURA GHODA
A pair of Wooden Horse

Bankura Ghoda, a pair of wooden horses is an imitation of the originally crafted terracotta horse by the kumbhakars (potters) of Bankura district of West Bengal. Long necked hollow terracotta horse with profuse omamentation is the identity of Bankura terracotta horse. Now-a-days Bankura horses have become an object that enhances the grace of living rooms in the household but mostly in wooden form. Terracotta horses and elephants in Bankura are originally the creation of potters. Passing by time has changed its utility from a realistic presentation to a representational presentation. Potters focused more on different parts of the animal body in such a manner that representation of the same became more important than representation of the entire body. Originally terracotta horses were sacrificial offerings to various local Gods and Goddesses for fulfilment of commitments on the woes and ills of daily life.

Acc. No. – 97.549
Local Name  –  BANKURA GHODA- A pair of Wooden Horse
Tribe/Community – Folk

Locality   –  Bankura, West Bengal
Category –   ‘A’

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