ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-54

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला -54
(24 जून, 2021)

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

मरुगाँव मुक्ताकाश प्रदर्शनी से
पलीवाल आवास, जैसलमेर, राजस्थान

आदि-गौंड ब्रम्हणों का एक समुदाय जो काफी समय तक पालीवाल जिले में जीवनयापन कर रहे था, उन्हें पालीवाल के नाम से जाना जाने लगा। 13 वीं  शताब्दी में  वे यह स्थान छोड़कर पश्चिम की ओर जैसलमेर के आंतरिक क्षेत्र में फैल गये। यहाँ इस समूह ने 84 गांव की स्थापना की जो कि ‘‘खेड़ा” के नाम से विख्यात हुए। ये गांव स्थापत्य कला के बेजोड़ नमूनो से संपुष्ट थे। शिल्प कौशल पर आधारित इन संरचनाओं को 15 वीं ईसवी के बाद का माना जाता है।

जैसलमेर पीले पत्थरों पर भव्य नक्काषीयुक्त आवासों का एक सुंदर शहर है। पीले पत्थरों से निर्मित सभी भव्य एवं आकर्षक स्थापत्य संरचनाओं के कारण इसे स्वर्णनगरी के नाम से जाना जाता है।

पालीवाल शैली के आवास गृह वैभव के संकेतक हैं। यहाँ समृद्ध लोग अपनी रूचि पूर्ण वस्तुओं के साथ आरामदायक जीवनयापन करना पसंद करते है। प्रत्येक मकान के अग्र भाग में सकरे प्रवेश के साथ एक खुली छत एवं बालकनी होती है। मध्य में मोल नामक एक आयताकार बड़ा कक्ष अन्दर की तरफ खुलता है एवं सभी ओर से दीवार से बंद होता है। यही योजना उपरी मंजिल में भी दोहराई जाती है। छत काष्ठ के खंडो को एक पंक्ति में जमाकर बनाई जाती है जिसे काष्ठ की भारी बीम मजबूती प्रदान करती है जिसे मिट्टी फैलाकर जल अवरोधक बनाया जाता है। मकान में दो भूमिगत कक्ष भी होते हैं जिनका उपयोग आराम कक्ष के रूप मे किया जाता है। घर के मुखभाग एवं काष्ठ पर अलंकरण के अतिरिक्त, पत्थर पर छिद्रित गहन मुद्रित जाली पालीवाल मकानों की विशिष्टता रही है। खिड़कियों (बालकनी) पर ज्यामितीय एवं जीवन संबंधी प्रतिमानों पर आधारित विविधताओं को दर्शाती खूबसूरत नक्काषीयुक्त जालियां इन मकानों को उत्कृष्टता प्रदान करती हैं।

Online Exhibition Series-54
(24th June, 2021)

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

From Desert Village open air exhibition
Paliwal House, Jaisalmer, Rajasthan

A community of Adi-Gond Brahmins who had been living in Paliwal district for a long time came to be known as Paliwal. In the 13th century, they left this place and moved towards the interior region of Jaisalmer. Here the group established 84 villages which were known as “Khera”. These villages were having beautiful examples of architecture.

Jaisalmer is a beautiful city showcasing grandeur of yellow stone carvings. It is known as Swarnanagarni because of all the grand and attractive architectural structures built with yellow stones.

Paliwal style housing is an indicator of home splendour. Here the wealthy people like to make a comfortable living with their favourite things. The front of each house has an open terrace and a balcony (covered window) with a narrow entrance. Mole a large rectangular chamber in the middle, opens inwards and closes from the wall on all sides. The same plan is repeated in the upper floor. The roof is made by parallel wooden log joined together in a row, which gives strength to the heavy beam of the wood. Which is made a soil-resistant water barrier. The house also has two underground chambers which are used as rest rooms. In addition to the decoration on the front of the house and on the wood, the intricately printed forged perforations on the stone have been characteristic of the Paliwal houses. The beautiful carved jaalis depicting variations based on geometrical and life-like patterns on the windows (balconies) and embosses give exquisiteness to these houses.