28 जून से 04 जुलाई, 2021 तक / 28th June to 04th July, 2021

‘सप्ताह का प्रादर्श-58’
(28 जून से 04 जुलाई, 2021 तक)

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

पाटलो / पाटला
खूबसूरती से उकेरा गया लकड़ी का एक पीढ़ा

पाटलो खूबसूरती से उकेरा गया लकड़ी का एक पीढ़ा है जिसका उपयोग गुजरात की राठवा जनजाति में उनके विवाह समारोह के दौरान किया जाता है। घुमावदार पैराें वाली कम ऊंचाई की आयताकार लकड़ी के इस आसन को जटिल ज्यामितीय रूपांकनो  से तराशा गया है। इसे सागौन या आम के पेड़ की लकड़ी से बनाया जाता है। इसका उपयोग विवाह समारोह के दौरान वर-वधु दोनों के द्वारा किया जाता है। वर का परिवार स्वयं वर और वधू के लिए पाटलो की एक जोड़ी बनाता है। बारात के दौरान वर पक्ष द्वारा पाटलो को वधू के आवास पर विवाह मंडप में ले जाया जाता है। अपने प्राथमिक उद्देश्य के अनुरूप निर्माण के बाद भी कभी कभी वर स्वयं पाटलाे के विस्तृत अलंकरण में अपनी ओर से कुछ विशेष तत्व जुड़वाता है।

आरोहण क्रमांक – 87.125
स्थानीय नाम – पाटलो / पाटला
खूबसूरती से उकेरा गया लकड़ी का एक पीढ़ा
समुदाय – राठवा
स्थानीयता –गुजरात

माप – ऊँचाई – 26.5 सेमी, चौड़ाई – 23 सेमी, लंबाई – 41.5 सेमी
श्रेणी –
ए’

OBJECT OF THE WEEK-58
(28th June to 04th July, 2021)

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

PATLO / PATLA
A beautifully carved wooden seat

Patlo is a beautifully carved wooden seat used among the Rathwa tribe of Gujarat during their marriage ceremony. The low height rectangular wooden seat with curved legs is profusely carved with intricate geometric designs. It is made out of wood like  teak or mango tree. It is used during marriage ceremony both by the bride and the groom. Family of the groom makes a pair of Patlo each for bride and groom. The Patlo is carried by the groom party during marriage procession to the marriage mandap at brides’ residence. Sometimes the groom himself gives special input on the fine details of the Patlo even after achieving its intended form to serve the primary function.

Acc. No. – 87.125
Local Name  – 
 PATLO / PATLAA beautifully carved wooden seat
Tribe/Community – Rathwa

Locality   –  Gujarat
Measurement – Height –  26.5 cm., Width –   23 cm., length – 41.5  cm.
Category –   ‘A’

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