02 से 08 अगस्त, 2021/ 02nd to 08th August, 2021

‘सप्ताह का प्रादर्श-63’
(02 से 08 अगस्त, 2021
तक)

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

केरिंग / केरंग
छाल के धागे से बना कमर का कपड़ा

केरंग, गदबा और परेंगा महिलाओं का एक अविभाज्य सांस्कृतिक तत्व है। यह ओडिशा के कोरापुट और मलकानगिरी जिले की कुछ जनजातियों में वस्त्रों की उत्पत्ति का भी प्रतीक है। एक महिला के लिए यौवन प्राप्ति के बाद इस अधोवस्त्र को  बुनना और पहनना अनिवार्य था। केरंग (कैलोट्रोपिस जाइगेंटीन) एक पर्णपाती झाड़ी के रेशे का उपयोग केरंग की बुनाई के लिए एक प्रमुख तत्व के रूप में किया जाता है। महिलाओं द्वारा छोटे चाकू की मदद से झाड़ी को काटने का काम किया जाता है। रेशे को मजबूत बनाने के लिए वे छोटी शाखाओं को कुछ दिनों के लिए जलधारा या कीचड़ के नीचे दबा देते हैं। फिर इसे धूप में सुखाया जाता है। इस प्रकार प्राप्त कोमल शाखाओं को रेशे प्राप्त करने के लिए पत्थर पर रखकर लकड़ी के हथौड़े से  पीटा जाता है। विभिन्न वानस्पतिक और प्राकृतिक रंगों से रेशों को खूबसूरती से रंगा जाता है। सूत तैयार करने के लिए सूखे रेशों को पॉलिश कर लपेटा जाता है और बुनाई उनके छोटे देशज करघे से की जाती है।

आरोहण क्रमांक – 95.312
स्थानीय नाम – केरिंग / केरंग , छाल के धागे से बना कमर का कपड़ा
समुदाय – परेंगा
स्थानीयता –कोरापुट, ओडिशा

माप – अधिकतम 99 सेमी, चौड़ाई – अधिकतम 51 सेमी।
श्रेणी –
ए’

OBJECT OF THE WEEK-63
(02nd to 08th August, 2021)

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

KERING / KERANG
Waist cloth made of bark string

Kerang, is an inseparable cultural entity of Gadaba and Parenga women. It is also a mark of origin of clothes among some tribals of Koraput and Malkangiri district of Odisha. It was compulsory for a woman to wear and to weave this skirt after achievement of her puberty. The fibre from Kerang (Calotropis gigantean), a deciduous shrub is used as a major element to weave Kerang. The cutting of shrub with the help of a small knife is done by the women. To make the fibre strong they bury the small branches under the stream or the mud for few days. It is then allowed to expose to the sunlight. The soft branches thus collected are beaten against a stone with a wooden mallet to obtain fibre. The fibre is beautifully coloured by the different vegetable and natural dyes. The dried fibres  is then polished and rolled to prepare yarn and weaving is done on their small indigenous loom.

Acc. No. –95.312
Local Name  – 
 KERING / KERANG , Waist cloth made of bark string
Tribe/Community – Parenga

Locality   –  Koraput, Odisha
Measurement – Length – maximum 99 cm., Width – maximum 51 cm.
Category –   ‘A’

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