09 से 15 अगस्त, 2021/ 09th to 15th August, 2021

‘सप्ताह का प्रादर्श-64’
(09 से 15 अगस्त, 2021
तक)

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

वारली चित्र

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के उत्तर-पूर्वी भाग में रहने वाली वारली जनजाति अपनी अनूठी वारली पेंटिंग के लिए प्रख्यात हैं। यह चित्रकला मुख्यतः मिट्टी और गाय के गोबर से लिपी दीवाल पर गेरू (लाल मिट्टी) पोतकर की जाती है।  चित्र बनाने के लिए चावल के पेस्ट से तैयार सफेद रंग और  बांस की टहनी से निर्मित तूलिका का उपयोग किया जाता है। प्रस्तुत चित्र एक कैनवास के माध्यम से एक कलाकार का प्रतीकात्मक संप्रेषण है जो प्रकृति और वन्य जीवों के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है। इस चित्र में सामाजिक जीवन, रोजमर्रा की गतिविधियों जैसे मछली पकड़ना, शिकार करना, कुएं से पानी खींचना, तड़पा वाद्य यंत्र की धुन पर नृत्य करना, उनकी जीवन शैली, कृषि गतिविधियों जैसे बुवाई और कटाई और उत्सवों को दर्शाया गया है। वारली प्रथा और परंपरा प्रकृति माँ के इर्द-गिर्द बुनी गई है। वे प्रकृति और जीवित प्राणियों के बीच सामंजस्य बनाए रखने में विश्वास करते हैं जो उनके द्वारा निर्मित चित्रों में परिलक्षित होता है।

आरोहण क्रमांक – 80.12
स्थानीय नाम – वारली चित्र
समुदाय – वारली
स्थानीयता –ठाणे महाराष्ट्र

माप – ऊंचाई – 124 सेमी, चौड़ाई – 124 सेमी।
श्रेणी –
ए’

OBJECT OF THE WEEK-64
(09th to 15th August, 2021)

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

Warli Painting

Warli tribe, living in the north-eastern part of Thane district of Maharashtra are well-known for their unique form of painting.  The painting is mostly done on the wall plastered with clay and cow dung over which geru (red ochre) is smeared. The painting is done with the help of white colour prepared from rice paste and the brush is made from bamboo twig. The present painting is a symbolic communication of an artist through a canvas which depicts their respect towards nature and wildlife. In these paintings mainly social life, everyday activities like fishing, hunting, drawing water from well, dancing on the tune of Tadpa- a musical instrument, their lifestyle, agricultural activities like sowing and reaping and celebrations are depicted. The Warli customs and traditions are weaved around mother nature. They believe in maintaining harmony between nature and living beings which reflects in their paintings.

Acc. No. –80.12
Local Name  – 
 Warli Painting
Tribe/Community – Warli

Locality   –  Thane, Maharashtra
Measurement – Height –  124 cm., Width – 124 cm.
Category –   ‘A’

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