ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-62

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला -62
(19 अगस्त
, 2021)

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

पुनीत वन मुक्ताकाश प्रदर्शनी से
उमंग लाईगी लाईकोन : मणिपुर के पवित्र वन

मणिपुर के मईतई प्रकृति और पूर्वजों की आराधना  करते हैं। घाटियों के आस-पास के कई ऊंचे  पर्वतों का नाम उमंग लाई (पैतृक देवताओं) के नाम पर रखा गया है, जिन्हें देवताओं के नियंत्रण में भूमि के पीठासीन देवताओं और क्षेत्रों के लोगों के रूप में पूजा जाता है। इनमें पुनीत वनों  की पूजा करने की परंपरा भी है। ‘उमंग लाई’ का शाब्दिक अर्थ है ऐसे देवता जो अचानक प्रकट होते  हैं और अंतर्ध्यान हो जाते हैं। पूरे मणिपुर में लगभग 365 उमंग लाई पुनीत वन हैं। उमंगलाई (उमंग लाई के क्षेत्र) के रखरखाव और  उमंग लाई हराओबा (उमंग लाई का एक वार्षिक उत्सव) का उत्सव गांवों और कबीले के  स्तर पर मनाया जाता है तथा  पहाड़ी जनजातियों में  जीना (निषेध) का पालन  प्रकृति के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिए समाज को नियंत्रित करने का साधन रही हैं। अनादि काल से इस प्रकार की सांस्कृतिक प्रथाएं क्षेत्र के पारिस्थितिकीय  संतुलन को बनाए रखने हेतु  एक शक्तिशाली स्रोत रही हैं। मईतई लोग अपनी पूर्वजों की आत्मा के अस्तित्व में विश्वास करते हैं, जिनके पास  समाज को नियंत्रित करने की दैवीय शक्ति होती  है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, उमंगलाई वे पूर्वज या संरक्षक  देवता हैं जो दैवीय संकेतों द्वारा अपने स्थायी निवास का संकेत देते हैं और उसे सुरक्षित रखते हैं।

Online Exhibition Series-62
(19th August, 2021)

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

From Sacred Grove open air exhibition
Umang Laigi laikon: sacred groves of Manipur

The Meiteis of Manipur practice nature worship & ancestor worship. Many of the lofty hills surrounding the valleys are named after the Umang Lai (the ancestral deities) who is worshiped to be the presiding deities of land and people of areas under the control of the deities. They also have the tradition of worshipping sacred groves. ‘Umang Lai,’ literally means deities who give an appearance and illusively vanishes from the common sight. There are about 365 Umang Lai groves all over Manipur. The cultural practices such as maintenance of Umanglai (areas of Umang Lai) and celebration of Umang Lai Haraoba (an annual festival of  Umang Lai) in the villages and clan level, and observances of Jina (taboo) among the hill tribes had been a medium to control the society in maintaining a harmonious relationship with nature. Since time immemorial, such kinds of cultural practices have been a powerful source in maintaining the region’s ecological balance. The Meitei people believe in the existence of their ancestral soul, who possesses the divine power to regulate society under his good or evil. According to the local belief, Umang Lais are those ancestral or guardian deities who indicate and reserve their permanent abode by divine actions.

Introductory video on Sacred Grove open air exhibition – Umang Laigi laikon: sacred groves of Manipur