ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-63

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला -63
(26 अगस्त
, 2021)

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

मरु ग्राम मुक्ताकाश प्रदर्शनी से
राजस्थान की छत्तरी

राजस्थान के जैसलमेर में निवासरत राजपूतों में छत्तरी निर्माण की परम्परा का निर्वाहन दृढ़ता से किया जाता रहा है। एतिहासिक प्रमाणों के अनुसार छत्तरी निर्माण की प्रक्रिया 6 वी शताब्दी के आस पास प्रारंभ हुई। ऐसी संरचनाओं के निर्माण का उद्देश्य मृतकों की यादों को सजोना तथा उनकी स्मृतियों को अमरत्व प्रदान करना था। ये छत्तरियाँ मृत आत्माओं के प्रति लगाव एवं संतान की कर्तव्य परायणता एवं निष्ठा का प्रमाण देती हैं तथा भावी पीढ़ी को मृतक की स्मृतियों को जीवतंता प्रदान करने की परम्परा का निर्वाहन करती है। ये अलंकृत छत्तरियाँ समृद्धि की प्रतीक हैं। ये अमूल्य हैं। ये लोगो को गर्मी के समय मे विश्राम, ताजी हवा और शीतलता प्रदान करती हैं।

          इस छत्तरी के निर्माण हेतु निर्माण सामग्री जैसलमेर से ट्रक  में परिवहन कर यहां लायी गई और साथ में वही से छत्तरी निर्माण में सिद्धहस्त कलाकार भी आये। इन कलाकारों ने छत्तरी के विभिन्न भागों को यहां पर तराशा और छतरी के निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ की। इस छतरी का निर्माण जमीन से पांच फीट की ऊंचाई पर आयताकार चबूतरे के ऊपर किया गया है।

          अष्ठकोणीय गुम्बदनुमा कलश आठ गोल नक्काशीदार खम्बों पर अवस्थित है। गुम्बद के केन्द्रीय भाग मे कमल की आकृति उकेरी गई है जो कलश तथा उसके आठ भागों को एक दूसरे से जोड़ती है, यह शिखर का हिस्सा है। गुम्बद के आंतरिक भाग में नक्काशी की गई है एवं बाहरी हिस्सा गोलाकार है। यह राजपूतों के वास्तु कौशल एवं सुंदरता की मिसाल है जो भावी पीढ़ी मे अपनी भव्यता एवं महत्ता को प्रतिध्वनित करती है।

Online Exhibition Series-63
(26th August, 2021)

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

From the Desert Village
Open Air Exhibition
Cenotaphs of Rajasthan

The tradition of making cenotaphs/chhatri has been strictly followed among the Rajputs residing in Jaisalmer, Rajasthan. According to historical evidence, the process of making cenotaphs started around the 6th century. The purpose of the construction of such structures was to preserve the memory of the dead and to give immortality to their memories. These cenotaphs carry out the tradition of giving life to the memories of the deceased to the future generations, giving proof of their attachment to the dead souls and the devotion and loyalty of the children. These ornamented cenotaphs are a symbol of prosperity. These are priceless. It provides relaxation, fresh air and coolness to the people during the summer time.

The material for the construction of this cenotaph was transported from Jaisalmer on Truck  and brought here along with the accomplished artists. These artists carved different parts of the cenotaphs here and started the construction work. It has been constructed on top of a rectangular platform at a height of five feet from the ground.

The octagonal dome-shaped Kalash is situated on eight circular carved pillars. In the central part of the dome the shape of a lotus has been carved which connects the Kalash and its eight parts with each other. This is part of the top. The inner part of the dome is carved and the outer part is circular. It is an example of the architectural prowess and beauty of the Rajputs, which resonates its grandeur and importance in the future generations.

Introductory video on Desert Village Open Air ExhibitionCenotaphs of Rajasthan