30 अगस्त से 05 सितंबर, 2021 तक/30th August to 05th September, 2021

‘सप्ताह का प्रादर्श-66’
(30 अगस्त से 05 सितंबर, 2021 तक)

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

कृष्णा लीला
पट्ट चित्र

ओडिशा की मंत्रमुग्ध कर देने वाली पट्ट चित्र कला का सदियों पुराना इतिहास है। चित्र कला के इस पारंपरिक स्वरूप के तत्व पौराणिक संस्कृति में निहित हैं, जिनमें हिंदू कथाओं के तत्वों को विविध रंगों और अद्भुत शिल्प कौशल के साथ प्रस्तुत किया जाता है। इस्तेमाल किए गए माध्यम के आधार पर, ओडिशा की चित्रकारी को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है; पट्ट चित्र या कपड़े पर चित्रकारी, भित्ती चित्र या दीवारों पर चित्रकारी, और तालपत्र चित्र या पोथी चित्र अर्थात ताड़ के पत्ते  पर नक्काशी। हालांकि, इन सभी किस्मों की शैली लगभग एक जैसी ही है।

कपड़े पर निर्मित यह चित्र कृष्ण लीला को दर्शाता है, जो भगवान की मोहक और चमत्कारी कहानियां हैं और काले रंग की पृष्ठभूमि पर सफेद रंग से तैयार की गई हैं। चित्र को तीन दृश्य भागों में वर्णित किया गया है- केंद्रीय वृत्त, एक आयताकार मध्य स्थान, और किनारों पर गोलाकार चित्र।

चित्र के मध्य भाग में कमल के प्रतिमान में रास मंडल को दर्शाया गया है जहां भगवान कृष्ण और राधा को अन्य गोपियों के साथ चित्रित किया गया है।

आयताकार स्थान के अंदर चित्रित ऊपरी और निचला हिस्सा भगवान विष्णु के दशावतार को दर्शाता है।

अंत में, पेंटिंग के किनारों पर भगवान कृष्ण की पूरी जीवन कथा को उनके जन्म से लेकर, राक्षसों के वध, कालिया-दमन, गोवर्धन पर्वत को उठाना, वस्त्रहरण, और उनके जीवन की अन्य लोकप्रिय घटनाओं को दर्शाया गया है।

आरोहण क्रमांक – 2015.11
स्थानीय नाम –कृष्णा लीला – पट्ट चित्र
समुदाय –  चित्रकार
स्थानीयता – पुरी, ओडिशा

माप –ऊंचाई – 92 सेमी, चौड़ाई – 61 सेमी

OBJECT OF THE WEEK-66
(30th August to 05th September, 2021)

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

Krishna Leela
Cloth painting

Pattachitra, a spellbinding art form of Orissa, has a centuries-old legacy. This traditional form of painting is deeply rooted in puranic culture, encompassing elements of Hindu mythology that are soothingly presented in vivid colours and magnificent craftsmanship. Based on the medium used, the Odisha painting can be classified into three categories; Patta Chitra or the painting on cloth, Bhitti Chitra or the painting on walls, and the Talapatra Chitra or Pothi Chitra the palm leaf engravings. However, the style of all these varieties remains more or less the same.

This painting on cloth depicts Krishna Leela, the enchanting and miraculous stories of the Lord, prepared in white colour over the black background. The painting is presented in three visual parts of narration- the central circle, a rectangular middle space, and circular pictographs around the edges.

The central part of the painting depicts the Rasa mandala in a circular flare of the lotus pattern where Lord Krishna and Radha are portrayed with other companions (Gopis).

The upper and lower portion illustrated inside the rectangular space provides the scene of Dasavatara (ten incarnations) of Vishnu.

Finally, around the edge of the painting, the entire life story of Lord Krishna, beginning from his birth, the slaying of demons, Kaliya-damana, lifting of Govardhan, Vashtraharan (stealing of clothes), and other popular events of Krishna’s life is depicted.

Acc. No. –98.861
Local Name  – 
 Krishna Leela – Cloth Painting
Tribe/Community – Chitrakar

Locality   –  Puri, Odisha
Measurement – Height – 92 cm, Width- 61cm

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