ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-64

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला -64
(02 सितंबर
, 2021)

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

जनजातीय आवास
मुक्ताकाश प्रदर्शनी से
कुनेमेची
चाखेसांग नागा का आवास

चाखेसांग जनजाति का नाम तीन नागा उप-समूहों चखरू, खेजा और संगतम के संयोजन उपरांत रखा गया है, ये  सभी एक संयुक्त क्षेत्र में निवास करते हैं। ये नागालैंड के फेक जिले में ठंडे पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करते है।

चाखेसांग नागा में धनी प्रतिष्ठित व्यक्ति के आवास को कुनेमेची कहा जाता है। इसकी पहचान आवास में निर्मित सीका नामक एक सींग जैसे आकृति से की जा सकती है। किसी गाँव में सीका युक्त आवास यह दर्शाता है कि  व्यक्ति ने गाँव के लोगों को कई बार सामूहिक रूप से दांवते दी हैं । घर की सभी सामग्री तथा उनका आकार और आकृति समाज में व्यक्ति के समृद्धि और मूल्य को परिलक्षित करते हैं।

विस्तृत नक्काशी वाली सामने की दीवार को थिल्पा कहा जाता है। इसे मिथुन और भैंस के बहुत से कपालों से सुसज्जित किया गया है, जो पशु धन की समृद्धि का प्रतीक है। साथ ही यह घर के निर्माण के दौरान उसके द्वारा किए पशु बली की संख्या को भी दर्शाता है। शिकार किए गए जानवरों जैसे जंगली सूअर, बंदर आदि के कपाल उनके शिकार कौशल और बहादुरी को प्रदर्शित करते हैं। लकड़ियों पर की गयी नक्काशियों के अपने अलग-अलग अर्थ हैं जो गृह स्वामी की इस क्षमता को दर्शातें हैं कि वह अपने समाज का ऐसा व्यक्ति है जो गांव की भलाई के लिए अपने धन को खर्च कर सकता है।

लकड़ी के क्षैतिज तख्तों की पंक्तियों में उकेरी गयी महिला स्तन की आकृतियों के दो अर्थ हैं। यह एक ओर यह उर्वरता का प्रतीक है तो दूसरी ओर यह व्यक्ति के पास मौजूद खाद्यान्न के प्रचुर भंडार को भी दर्शाता है। मानव सिर की आकृति और हॉर्नबिल के कपाल वीरता के प्रतीक हैं। सूर्य, चंद्रमा और सितारों के दैवीय प्रतीक अपने लोगों को दी गयी दावतों और बलिदानों के साक्ष्य हैं। घर के सामने खड़े पांच खंभों में योद्धाओं के और दैवीय प्रतीक हैं जो घर को किसी भी तरह के विनाश से बचाते हैं।

यह वीडियों शृंखला नागालैंड के चाखेसांग नागा जनजाति के इस शानदार घर की व्याख्या करता है जिसे वर्ष 2003 में नागालैंड से एक महत्वपूर्ण स्थानीय आवास के रूप संग्रहालय में स्थापित और प्रदर्शित किया गया था।

Online Exhibition Series-64
(02 September, 2021)

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

From Tribal Habitat
Open air exhibition of IGRMS
KUNEMECHE:
The Chakhesang Naga House of Merit

The tribe Chakhesang is named after the union of three Naga sub- groups namely Chakhru, Kheza and Sangtam; all living in a compact territory. They are distributed in cold hilly terrain of Phek district of Nagaland.

The House of a richman among the Chakhesang Naga is called Kunemechi. One can identify this house by the presence of a horn like projection called Ceka. The person who has given several feasts to the villager is only entitled to adorn his house with Ceka. It is the symbol that shows the status that he has given feast for several times to the villagers. All the materials, shape and size of the house determines the richness and value of the owner in his society.

The front wall with elaborate carvings is called Thilpa.  It is decorated with a series of Mithun and Buffalo skulls, symbolizing a good possession of animal wealth. This also shows the number of sacrifices he made during the construction of the house. Skulls of the hunted animals like the skull of wild boar, monkey etc. are also decorated above the main door to display his hunting skill and bravery. All these carvings are manifested with individual meanings that proves the ability of the owner that he is the person in his society who could afford to spare his wealth for the well-being of the village.

The carved motives of women breasts that are arranged in rows of the horizontal planks has dual meanings. It represents the symbol of fertility on one hand and it also signifies the enormity of food grains possessed by the owner. The motives of human head and skull of hornbill are the symbol of valour. Heavenly symbols of Sun, Moon and Stars are portrayed in witness and evidence of the sacrifices he made for giving feast to his people.   Five upright pillars standing in the front of the house possesses the motives of warriors and the heavenly symbols to guard and protect the house from any kind of the destruction liable to be meted out of the unwanted evil forces.

The present episode of Online Exhibition Series explains this magnificent house type of the Chakhesang Naga tribe of Nagaland which was installed and exhibited as an important vernacular house collected from Nagaland in the year 2003.

From Tribal Habitat
Open air exhibition of IGRMS
KUNEMECHE: The Chakhesang Naga House of Merit