13 से 19 सितंबर, 2021/13th to 19th September, 2021

‘सप्ताह का प्रादर्श-68’
(13 से 19 सितंबर, 2021 तक)

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

गणेश
पारंपरिक डोकरा-शिल्प

भगवान गणेश की यह पंचमुखी प्रतिमा एक ऐसा संकलन है जो  बांकुरा, पश्चिम बंगाल के पारंपरिक डोकरा-शिल्प की शैली और उच्च कौशल को दर्शाता है। यह प्रतिमा लॉस्ट वैक्स होलो कास्टिंग तकनीक से बनाई गई है, जो इस क्षेत्र की विशिष्ट शिल्प परंपरा है। राज्य के कर्मकार समुदाय ने कई पीढ़ियों से इस धातु शिल्प परंपरा को संजो कर रखा है।

मूर्ति को एक अलंकृत वेदी के मध्य में खड़े हुए दिखाया गया है। चारों हाथों को एक सहज भाव से  दैवीय शस्त्रों को पकड़े हुए दर्शाया गया है। भगवान गणेश का दाहिना पैर एक मूषक की पीठ पर टिका हुआ है, जो हिंदू मान्यतानुसार भगवान गणेश का वाहन है। मूर्ति को मुकुट, माला, वस्त्र और अस्त्र-शस्त्र से विस्तार से अलंकृत किया गया है। वेदिका पर भगवान के वाहन के साथ-साथ दो अन्य मूषकों को भी दर्शाया गया है। प्रतिमा को ऊपर से तीन तरफ से मुड़ी हुई छतरी से ढंका गया है, जिसके ऊपर एक शंक्वाकार कलश है।

आरोहण क्रमांक – 97. 494
स्थानीय नाम गणेश – पारंपरिक डोकरा-शिल्प
समुदाय – कर्मकार
स्थानीयता –बांकुरा, पश्चिम बंगाल
माप –ऊंचाई – 120 सेमी, चौड़ाई – 60 सेमी

OBJECT OF THE WEEK-68
(13th to 19th September, 2021)

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

Ganesh
Traditional Dokra-craft

The Panchmukhi Ganesha, an image of the five-headed Lord Ganesha, is a collection that reflects the style and precision of the traditional Dokra-craft of Bankura, West Bengal. This idol is made using the lost wax hollow casting technique (Cire Perdue), a specialised craft tradition of the area. The Karmakar community of the state has the legacy of practicing this metal craft for generations.


The idol is shown in a standing posture in the middle of a decorated altar. The four hands are depicted in an easeful gesture holding the armaments of his divinity. The right leg of Lord Ganesha rests on the back of a mouse, which, according to Hindu belief, is the vehicle of Lord Ganesha. The idol is crafted with every detail of ornamentation, such as the crown, necklace, clothes, and armaments. The pedestal of the altar also depicts two other companions of mouses along with the Lord’s vehicle. The image is surmounted by a three folded canopy, topped by a conical finial.

Acc. No. 97. 494
Local Name  – 
 Ganesh-Traditional Dokra-craft
Tribe/Community – Karmakar

Locality   –  Bankura, West Bengal
Measurement – Height – 120cm., Width – 60 cm

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