ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-4

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-4

मुक्ताकाश प्रदर्शनी से कुम्हेइ शक्ताक फुरोन
(मणिपुर का पॉटरी टॉवर)

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार का एक स्वायत्तशासी संस्थान है। यह संग्रहालय भारत के ह्रदय मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित है। अपने आकार, समुदायों के प्रतिनिधित्व और संकलन के संदर्भ में यह अपनी तरह का सबसे विशाल मानव शास्त्रीय संग्रहालय है।

मिट्टी के बर्तनों का अविष्कार मानव सभ्यता की यात्रा के इतिहास में महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। प्रागैतिहास में मिट्टी के बर्तनों की प्राप्ति को आमतौर पर स्थायी जीवन की शुरुआत से संबंधित किया  जाता है। यह न केवल प्राचीन संस्कृतियों की तिथि को इंगित करता है बल्कि उन्हें पहचानने के लिए भी एक महत्वपूर्ण सूचकांक माना जाता है । मिट्टी के बर्तनों को क्षेत्रीय व सांस्कृतिक कला के सबसे मूर्त और प्रतिष्ठित तत्वों में से एक माना जाता है ।

वर्तमान मुक्ताकाश प्रदर्शनी “कुम्हारपारा”, जिसे पॉटर्स विलेज के रूप में भी जाना जाता है, के पीछे विचार इ.गां.रा.मा.सं. द्वारा क्ले, पॉटरी और टेराकोटा की रचनात्मक कला पर कार्यशालाओं से प्राप्त उत्पादों को प्रदर्शित करना था | इस प्रदर्शनी में वर्तमान में जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, गुजरात, ओडिशा, मणिपुर, असम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल से मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं के बारह प्रादर्श प्रदर्शित हैं । 

From the Open Air Exhibition
KUMHEI SHAKTAK PHURON
(The Pottery Tower of Manipur)

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya ( National Museum of Mankind), an autonomous organisation, Ministry of culture, Govt.of India. The Museum is located in the heart of India,the capital city of Bhopal in Madhya Pradesh. It is one of the largest anthropological / ethnographic museums in terms of its size, representation of communities and collection.

The invention of Pottery is one of the important landmarks in the history of the journey of human civilization. The occurrence of Pottery in prehistory is generally attributed to the beginning of a settled life. It is considered to be an important index not only to date the ancient cultures but also to identify them. Pottery is also regarded as one of the most tangible and iconic elements of regional and cultural art. 

The present Open Air Exhibition “KUMHARPARA” which is translated as the Potter’s Village, was perceived with an idea to showcase the outcome achieved by I.G.R.M.S. through workshops on the creative art of clay, Pottery, and terracotta. The exhibition at present houses 12 exhibits representing the Pottery and terracotta traditions from Jammu & Kashmir, Laddakh, Gujarat, Odisha, Manipur, Assam, Tamil Nadu and West Bengal. 

Click to view on video : KUMHEI SHAKTAK PHURON (The Pottery Tower)
at Kumhar Para- Pottery Traditions of India – Open air Exhibition

मणिपुर की पॉटरी परंपरा:

मणिपुर को पारंपरिक प्रथाओं, कला और रचनात्मकता के कई रूपों में परिलक्षित अपनी समृद्ध सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के लिए जाना जाता है, जिसमें से एक पॉटरी है । एक प्राचीन पांडुलिपि चकपरोल में यह उल्लेख मिलता है कि मिट्टी के बर्तनों की कल्पना एक फूल जिसे ‘नुराखुदोन्गलेई’ (मालेस्टोमा मालाबथ्रियम) के रूप में जाना जाता है, के पुष्पासन से की गई थी ।  

मणिपुर की पहाड़ियों और मैदानी क्षेत्रों दोनों के गाँवों में मिट्टी के बर्तन बनाए जाते हैं । ताङ्ग्खुल नागा ब्लैक-वेयर पॉटरी (लोंगपी पॉटरी) को छोड़कर, जो पुरुषों द्वारा तैयार की जाती है, राज्य के अन्य हिस्सों में महिलाएं पॉटरी बनाती हैं । मणिपुरी पॉटरी विशुद्ध रूप से हस्तनिर्मित है और वे ज्यादातर पारंपरिक स्ट्रिप तकनीक का उपयोग करते हैं । 

कुम्हेइ शक्ताक फुरोन (पॉटरी टॉवर)

यह प्रादर्श जिसे कुम्हेइ शक्ताक फुरोन (फेस्टिव टॉवर ऑफ़ पॉट्स) कहा जाता है, मणिपुर के अन्द्रो, थोंग्जाओ और नोंगपोक-सेकमई गाँव की महिला कुम्हारों के सामूहिक प्रयास से स्थापित किया गया है । मणिपुर में मिट्टी के बर्तनों से बने टॉवर का पहली बार निर्माण अन्द्रो कुम्हार गाँव में, जो इंफाल शहर के पूर्व में लगभग 26 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, 2015 में विश्व पर्यटन दिवस के आयोजन  के अवसर पर देखा गया | यह  टॉवर, उत्सव को मनाने के लिए कुम्हार समुदाय के एक अभिनव प्रयास के रूप में लोकप्रिय हुआ । 

मणिपुर घाटी के कुम्हार समुदायों ने कुम्हारपारा मुक्ताकाश प्रदर्शनी के परिसर में इस पॉटरी-टॉवर के निर्माण का प्रस्ताव दिया | वर्ष 2017 मे संग्रहालय ने प्रस्ताव को स्वीकार किया और मणीपुर से कुम्हार समुदायों ने कुम्हार पारा मुक्ताकाश प्रदर्शनी के परिसर मे पॉटरी टॉवर स्थापित करने का कार्य प्रारम्भ किया । इ.गां.रा.मा.सं. अपनी प्रदर्शनियों के निर्माण में समुदायों की सहभागिता हेतु  अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करने में समर्थ रहा है और यह संग्रहालय के डिस्प्ले में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है ।

टॉवर के तीनों  स्तंभ उनके अंदर स्थित तीन खंबों पर मजबूती से खड़े है, प्रत्येक स्तंभ में समान रूप से 19 मटके हैं प्रत्येक मटके  के आधार केंद्र में एक छेद है, जिससे उसे खंबे में फिक्स किया जाता है । इस विशाल संरचना वाले टॉवर को बनाने के लिए कुल 60 मटकों और एक केगाम (कटोरा) का उपयोग किया गया है । इस स्तंभ में मणिपुरी संस्कृति में जन्म से लेकर मृत्यु तक उपयोग किए जाने वाले सभी भारी बर्तनों का इस्तेमाल किया गया है । इसके शीर्ष पर लोहे की एक तिपाई (योटशाबी) भी है । मैतेई धार्मिक दर्शन के अनुसार इस तिपाई के पैर तीन सर्वोच्च/दिव्य गुरुओं या देवताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं । मटकों से चतुरता पूर्वक  निर्मित यह विशाल संरचना एक भव्य त्यौहार की शुरुआत का प्रतीक है । यह संरचना अब इ.गां.रा.मा.सं. के मुक्ताकाश प्रदर्शनी परिसर में संरक्षित है ।

Pottery Tradition of Manipur

Manipur is well known for its rich cultural manifestations reflected in many forms of traditional practices, art, and creativity. One of them is Pottery. In an ancient manuscript Chakparol, it is mentioned that the pottery craft was conceived from the thalamus of flower known as the ‘NuraKhudonglei’ (Malestoma malabathrium). 

Pottery is practiced both in the pockets or villages of the hills and plains of Manipur. Except for the Tangkhul Naga black-ware pottery (the Longpi Pottery), which are crafted by the males, women practice Pottery in other parts of the state. Manipuri Pottery is purely handmade, and they mostly follow the traditional technique of a strip-method.

KUMHEI SHAKTAK PHURON
(The Pottery Tower)

The present exhibit called Kumhei Shaktak Phuron (Festive Tower of Pots) is an installation made by the collective effort of the women potters from Andro, Thongjao, and Nongpok Sekmai villages of Manipur. The appearance of pottery tower for the first time in Manipur came up with the organization of World Tourism Day in 2015 at Andro Potters village, which is situated about 26 Km in the east of Imphal city. It emerged as an innovative practice of the potter’s community to mark the festivity.

The potters from the valley of Manipur proposed for the installation of a massive pottery tower in the I.G.R.M.S. It was in the year 2017 that the museum accepted the proposal, and the potter’s community from Manipur executed the work for the erection of this Pottery-Tower in the Open Air Exhibition premises of Kumharpara. I.G.R.M.S. has been able to set an exemplary example to represent the community’s voice in curating exhibitions, and they are vividly reflected in museum displays. 

The tower has three sides, and it firmly stands on three poles, erected inside. Each pole carries 19 pots, and these pots are uniformly raised in each layer of the tower. The base of every pot contains a hole at the centre, enabling them to fit on the pole. In this tower, a total of 60 pots and 1 Kegam (bowl) is used to raise this massive structure. This tower carries all those heavy pots used in Manipuri culture right from birth to death. It also has an iron tripod (Yotshabi) on the top. According to the Meitei religious philosophy, this tripod’s legs represent the three supreme/ divine Gurus or the deities. 

The raising of an ingeniously built  towering structure of pots marks the beginning of a grand festival. It is now preserved in the Open Air Exhibition premises of the I.G.R.M.S. 

Preparation for the firing of pots to be installed as an exhibit of tower.
Collection of fired pots
An old lady demonstrating work of pottery
Andro potters demonstrating their work of preparing ritual pots
A view of Pottery Tower of Manipur installed in IGRMS
Potters from Manipur during the inaugural event.
A woman potter from Nongpok Sekmai village of Manipur in the museum campus.
Process of installation of the tower

Assembling the final segment of pots to be placed on the top of the tower.