मुक्ताकाश प्रदर्शनी Open Air Exhibition-पारंपरिक तकनीक उद्यान -Traditional Technology Park

पारंपरिक तकनीक उद्यान
Traditional Technology Park

प्रदर्शनी की अवधारणा

इं गां रा मा सं सांस्कृतिक विरासत के प्रलेखन, संरक्षण, प्रसार और पुनर्जीवीकरण पर जोर दे रहा है। यह महसूस किया गया कि विभिन्न मुक्ताकाश प्रदर्शनियों के साथ-साथ पारंपरिक प्रौद्योगिकी पर एक प्रदर्शनी इस समय की आवश्यकता है। परिणामस्वरूप हमारे देश में पारंपरिक तकनीकी विविधता के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए एक अलग मुक्ताकाश प्रदर्शनी विकसित की गई । साधारण समाजों ने अपनी प्रत्येक आवश्यकता की पूर्ति के लिए समय-समय पर विभिन्न तकनीकों का विकास किया है जो उन्हें उनके पुरखों से विरासत में मिली हैं और उसे बरकरार रखा है।

आधुनिक समाज में आधुनिक तकनीकों की शुरूआत ने पारंपरिक प्रौद्योगिकियों के महत्व को प्रभावित किया है। लेकिन सर्वमान्‍य किया जाता है कि आधुनिक तकनीकों के अविष्कार में पारंपरिक तकनीकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह प्रदर्शनी ग्रामीण और आदिवासी समुदायों के तकनीकी ज्ञान और कौशल के बारे में जनता को जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से देश के विभिन्न हिस्सों से पारंपरिक तकनीकी वस्तुओं को एक स्थान पर प्रदर्शित करने के लिए समुदायों की भागीदारी और प्रयास का परिणाम है।

Concept of the Exhibition

I.G.R.M.S. is emphasizing on documentation, preservation, dissemination and revitalization of cultural heritage. It is felt that along with the different open air exhibitions an exhibition on traditional technology is a need of this hour. As a result a separate open air exhibition had been developed to make the people aware of the traditional technological diversity in our country. The simple societies have developed different technologies over a period of time for the fulfillment of their each and every need which they have inherited and sustained from their forefathers.  

          In modern society the introduction of modern technologies have affected the importance of traditional technologies. But throughout it is accepted that the traditional technologies have played an important role in the invention of modern technologies. This exhibition is an outcome of communities involvement effort and to exhibit the traditional technological objects from various parts of the country in one place with a view to provide information to the public about technological knowledge and skills of rural and tribal communities.

संक्षिप्त परिचय

सांस्कृतिक उद्विकास का आरम्भ मानव के द्वारा तकनीकी ज्ञान अर्जित करने के प्रयास से प्रारंभ होता है। आधुनिक एवं उन्नत तकनीक की तुलना में इस शुरूआत को भले ही सरल कहा जाता हो लेकिन मानव द्वारा निर्मित व उपयोग किये गये प्रथम उपकरण आज भी उनके तकनीकी इतिहास में प्रारंभिक एवं महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आज जब हम अपनी ज्यादातर दैनिक आवश्‍यकताओं की पूर्ती हेतु आधुनिक तकनीक के उपकरणों पर निर्भर हैं वहीं इस देश में आज भी ऐसे लोग हैं जो अपनी दैनिक आवश्‍यकताओं संबंधी विभिन्न कार्यों को करने के लिये विरासत में प्राप्त पारम्परिक तकनीकी का उपयोग करते है।

प्राग-औद्योगिक काल तथा उसके सदियों पश्‍चात भी कुछ भारतीय कृषक विविध आवश्‍यकताओं की पूर्ती के लिए विभिन्न प्रकार की तकनीकों व उपकरणों का अविष्कार करते रहे और आकार प्रदान करते रहे हैं। आधुनिक तकनीकी के उत्पादों की सहज उपलब्धता ने पारम्परिक तकनीक को भले ही कम महत्वपूर्ण कर दिया हो फिर भी उन समस्त समुदायों पर हमें गर्व होता है जिन्होने अपने पारम्परिक ज्ञान को सतत् आगे बढ़ाते हुए पर्यावरण के अनुरूप तकनीकों का अविष्कार किया। हमारी अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण हेतु यूनेस्को एवं भारत सरकार के आहवान किये जाने पर हमारे संग्रहालय में यह महसूस किया गया कि देशज व पारम्परिक तकनीक पर आधारित एक मुक्ताकाश  प्रदरर्शनी होनी चाहिये। इसका उद्देश्‍य तेजी से विलुप्त होते जा रहे तकनीकी प्रदर्शो को संरक्षित किया जाये।

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने इस प्रदर्शनी को विकसित करने के लिये भारत के विभिन्न स्थानों से पारम्परिक तकनीक से संबंधित प्रादर्शो को संकलित करने का प्रयास किया है। इन प्रादर्शो के माध्यम से हम दर्शको को सरल समाजों के बौद्धिक एवं रचनात्मक कौशल से परिचित कराना चाहते है। साथ ही इस तथ्य को रेखांकित करना चाहते हैं कि समकालीन जगत के तकनीकी वैभव में पारम्परिक तकनीक की एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अतः यह प्रदर्शनी संक्षेप में भारत की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर का उत्सव है।

प्रस्तुत प्रदर्शनी देश के अलग -अलग भागों के विभिन्न समुदायों से पारम्परिक तकनीक के प्रदर्शन का प्रयास है। वर्तमान में 11 राज्यों का प्रतिनिधित्व करते 26 प्रादर्श प्रदर्शित किया जा रहे हैं तथा पारम्परिक तकनीक के प्रादर्शों की अभिवृद्धि सतत् जारी है।

Traditional Technology Open Air Exhibition

Brief Introduction

The dawn of culture witnessed the beginning of acquisition of technological knowledge by the humankind. The beginning might be termed as simple in comparison to the modern and advanced technologies, the humankind has developed, but when the first tool would have been shaped and used by men, that beginning is still the first and most important achievement in the technological history of humankind. Today in an age when we are blessed with the gadgets of technological revolution for fulfilment of our each and every need, there are also people in country who still pursue various kind of works related to their needs of life and profession through the technologies they inherited from their preceding generation.

In pre- industrial period and later for hundreds of years also Indian peasants have invented and shaped various gadgets for meeting various requirements. The easy availability of modern technology has through made this traditional technology more of less insignificant or redundant, but we salute the people who had invented them. They were the technology which gave sustenance to the people for hundreds of years. Besides, such technologies are eco-friendly in nature.

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya has made an effort to collect this objects related to traditional technology from various part of the country to develop this exhibition, through which we wish to tell the visitor about the intelligence and creative genius of simple societies. This is also meant to broaden the perspective of the visitors by emphasizing the fact that traditional technologies contribute an important background to the technological splendour of the contemporary world.  To sum up, this exhibition, in fact is a celebration of the intangible heritage of India.

The present exhibition endeavors to exhibit the traditional technology of various communities from different parts of the country. Presently 26 exhibits being displayed and representing 11 states and continuously adding exhibits of traditional technologies.

मईतई थुमसुंग- शंग-
Meitei-Thumsung-Shang

कुहियार पेरा शाल-Kuhiyar Pera Shal

गनुगू -Ganugu

ढोकरा-Dhokra Craft
(पश्चिम बंगाल – West Bengal)

ढोकरा-Dhokra Craft
(ओडिशाOdisha)

नुरूपुराई-Nurupuraee

मखाना बनाने की प्रक्रिया-
Processing of Makhana

धान झराई कल-Dhan Jharai Kal

भाती-Bhati

गन्ना चरखी-Ganna Charkhi

करीन-Kareen

रहट-Rahat

घराट-Gharat

तिरही-Tirhi

ढेंकी-Dhenki

तुई-चांगशु-Tui– Changshu

सुन्नापुगनुगु-Sunnapuganugu

सुन्नापुबत्ती-Sunnapubatti

एडुलुमोटा-Edullumota

ऊ-चकरी-OO-CHAKRI

चु-कोल्हू-CHU-KOLHU

योटशुंग-योटशा-Yotshung-Yotsha

ताणयैशंग-Tanyeishang

गन्ना चरख-GANNA CHARAKH

हिदाक शुंगफम-Hidak Shungpham

मेढ़हठ कुठ्ठी -Medhhath Kuththi