20 से 26 सितंबर, 2021/20th to 26th September, 2021

‘सप्ताह का प्रादर्श-69’
(20 से 26 सितंबर, 2021 तक)

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

कपड़ागंदा
हाथ से बुनी हुई एक प्रतिष्ठित शॉल

कपडागंदा डोंगरिया कोंध जनजाति का हाथ से बुना हुआ एक प्रतिष्ठित शॉल है जो  उनकी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और सामुदायिक पहचान का प्रतीक है। यह ज्यादातर अविवाहित लड़कियों / महिलाओं द्वारा बुना जाता है, जो उनकी कुशल कशीदाकारी के बारे में बतलाता है। अविवाहित महिलाएं अपने प्रियजन को प्रेम के प्रतीक के रूप में उपहार देने के लिए इस शॉल पर कढ़ाई करती हैं। यह उनके द्वारा अपने भाई या पिता को स्नेह के प्रतीक के रूप में भी उपहारस्वरूप दिया जाता है। निर्माण सामग्री के रूप में उपयोग किए जाने वाले सफेद मोटे कपड़े डोम समुदाय से अनाजों से विनिमय कर प्राप्त किये जाते हैं। रंग-बिरंगे धागों का उपयोग करके सुई की मदद से कपड़े पर रूपांकनों की कढ़ाई की जाती है। पहले वे पत्तों और फूलों जैसे हल्दी, सेम के पत्ते, जंगली बीजों से क्रमशः पीले, हरे और लाल रंग तैयार करते थे। रंग को फीका होने से बचाने के लिए वे केले के फूल को पानी में उबालकर रंगे हुए धागों कोे उसमें डालते हैं । उन्होंने अपने पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, सदियों पुरानी मानव बलि प्रथा और सांस्कृतिक मूल्यों को दर्शाने के लिए लाल, हरे और पीले रंग का इस्तेमाल किया है। पीला रंग शांति, एकता, स्वास्थ्य और खुशी का प्रतीक है। इसे शुभ का सूचक भी माना जाता है और यह उनके समुदाय की उत्पत्ति भी बताता है। हरा रंग उनके उर्वर पहाड़ों,  सामुदायिक समृद्धि एवं  विकास का प्रतीक है। लाल रंग रक्त, ऊर्जा, शक्ति और प्रतिकार का प्रतीक होने के साथ ही चढ़ावे / बलि द्वारा देवताओं को प्रसन्न करने का भी प्रतीक है। शॉल में हाथ से बुने हुए रूपांकन मुख्य रूप से विभिन्न प्रकार की रेखाएं और त्रिकोणीय आकार होते हैं जो उनके समुदाय के लिए पहाड़ों के महत्व को दर्शाते हैं। कपडागंदा का उपयोग डोंगरिया कोंध द्वारा विवाह और उत्सव के अवसरों पर एक दुपट्टे की तरह धारण करने के लिए किया जाता है।

आरोहण क्रमांक – T/2019.126
स्थानीय नाम कपड़ागंदा, हाथ से बुनी हुई एक प्रतिष्ठित शॉल
समुदाय – डोंगरिया कोंध
स्थानीयता –रायगड़ा, ओडिशा
माप –लंबाई – 162 सेमी, चौड़ाई – 80 सेमी

OBJECT OF THE WEEK-69
(20th to 26th September, 2021)

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

KAPDAGANDA
A prestigious hand-woven shawl

Kapdaganda is a prestigious hand-woven shawl of Dongria Kondh tribe which symbolizes their rich heritage, culture, and ethnic identity. It is mostly woven by the unmarried girls/spinsters, which tells about their skilled needlework. They embroidered this shawl to gift their beloved ones as a token of love. It is also presented by them to their brother or father as a symbol of affection. The off-white coarse fabric used as raw material is procured from the dom community by bartering harvested crops. The designs are embroidered on the cloth with the help of a needle by using colourful threads. Earlier they used to prepare the colours from leaves and flowers like turmeric, bean leaves, wild seeds to colour yellow, green, and red respectively. To prevent the colour from fading they used to boil the banana flower in water and dip the coloured threads in it. They used red, green, yellow to depict the linkage with the environment, their occupation, age old human sacrifices and deep cultural value of their community. Yellow stands for peace, smile, togetherness, health, and happiness. It is also regarded as a sign of auspiciousness, and it also represents the origin of the Kondh. Green symbolizes their fertile mountains and hills, prosperity, and development of their community. Red is the symbol of blood, energy, power, and revenge. It also signifies appeasing deities by offering/sacrifices. The hand-woven motifs in the shawl are mainly different types of lines and triangular shapes that reflect the importance of mountains for their community. Kapdaganda is used by the Dongria Kondh to wear as a stall during marriages and festive occasions.

Acc. No. T/2019.126
Local Name  – 
 KAPDAGANDA, A prestigious hand-woven shawl
Tribe/Community – Dongria Kondh

Locality   –  Rayagada, Odisha
Measurement – Length – 162cm., Width – 80 cm

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