अय्यनार कोविल -Aiyanaar Kovil

अय्यनार कोविल – अय्यनार देवालय

तमिलनाडु के एक लोक देवता अय्यनार के मंदिर का प्रादर्श उस राज्य के कुम्हार समुदाय वेलार के टेराकोटा कौशल का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। संग्रहालय की मुक्ताकाश प्रदर्शनी का एक महत्वपूर्ण भाग यह प्रादर्श पूर्व में जनजातीय आवास में स्थापित किया गया था। किन्तु 1992 में देश के तटीय क्षेत्रों की संस्कृति को प्रदर्शित करती एक स्वतंत्र मुक्ताकाश प्रदर्शनी विकसित होने के बाद ‘तटीयगांव‘ मे प्रतिस्थापित कर दिया गया। वर्तमान में यह प्रादर्श प्रवेश द्वार क्रं. 1 के समीप स्थापित है।


यह प्रादर्श तमिलनाडु विशेषकर राज्य के दक्षिणी क्षेत्रों के ग्रामीण लोक समुदायों के अनुष्ठानों और विश्वास को दर्शाता है। यह प्रादर्श एक फीट से पन्द्रह फीट तक ऊॅंचे विभिन्न आकार के लगभग 150 टेराकोटा आकृतियों से युक्त है। यह प्रादर्श तमिल लोक देवता अय्यनार जो कि तमिलनाडु के ग्रामीण समुदायों के बीच सार्वभौमिक रूप से पूजे जाते है, के मंदिर की प्रतिकृति है। अय्यनार एक पुरूष देवता है जो कि एक सामान्य धारणा कि ग्राम देवता हमेशा महिलाएं होती है, का अपवाद है। लगभग हर तमिल गांव में अय्यनार देवालय होता है जिनकी मान्यता गांव के प्रहरी के रूप मे है और माना जाता है कि वे रोज रात को, भूतिया घोडे पर सवार भयावह आँखों से दुरात्माओं को डरा कर भगाते हुए निगरानी करते है। अय्यनार देवालय मन्नत पूरी होने अथवा इच्छा पूरी होने पर देवता को संतुष्टि के लिये चढ़ाये गये टेराकोटा के असंख्य घोड़ों के लिए जाने जाते है।


अय्यनार देवालय मे आमतौर पर विशालकाय टेराकोटा घोड़ों ओर हांथी, गाय, बैल इत्यादि सहित अन्य पशुओं की आकृतियाँ होती है। उनमें बड़ी संख्या मे मानव आकृतियाँ भी होती है जो अधिकांश मुनीश्वर या संतो की हैं। तमिलनाडु के गांव मे इन वास्तविक स्थलों में इन पशुओं और मानव पात्रों की कई खण्डित आकृतियाँ मंदिर के आंगन में मिलती है। घोड़े भक्तों द्वारा अपने देवता को दी जाने वाली खास भेंट है, और उस अश्व का प्रतिनिधित्व है जिस पर सवार हो वे रात्रि भ्रमण पर निकलते है। ग्रामीणों द्वारा अय्यनार का सम्मान एक अच्छे और उपकारी संरक्षक के रूप में किया जाता है।


प्रादर्श संकुल में टेराकोटा आकृतियों की रचना रंगास्वामी वेलार के नेतृत्व मे तमिलनाडु के पुदुकोट्टई जिले के अलंगुडी तालुका अंतर्गत मलइयुर गांव के वेलार कुम्हार कलाकारों द्वारा की गयी है। वेलार कलाकार अय्यनार देवालयों मे पुजारी भी होते है जो हमें उस क्षेत्र के लोकप्रिय अनुष्ठानिक समारोहों मे कुम्हारों की महत्ता से अवगत कराते है। लोक विश्वास के अनुसार अय्यनार देवता हमेशा पुनीतवनों मे रहते है, जिसके आस-पास जरा भी दिखावा या छल नहीं होना चाहिये।

Aiyanaar Kovil : The Shrine of Aiyanaar

The exhibit of the Shrine of Aiyanaar a folk deity of Tamilnadu, is an excellent example of the terracotta skill of the Velar, the potter community of that state. An important component of the Museum this exhibit was earlier installed in the Tribal Habitat open air exhibition. But after the development of an independent open air exhibition depicting the culture of the coastal areas of the country, it was transplanted in the Coastal Village open air exhibition in the year 1992. Presently this exhibit has been installed near the gate No.1.

            This exhibit depicts the ritual and belief of the rural/folk community of Tamilnadu, specifically the southern regions of that state. It comprises of nearly 150 terracotta figurines of various sizes ranging from one foot to fifteen feet in height. This exhibit is a replication of the Shrine of Tamil folk deity Aiyanaar, who is mostly universally worshipped among the rural communities of Tamilnadu. Aiyanaar is a male deity who seems to be an exception of general observance that the village deities are always female ones. In almost every Tamil village there is a shrine of Aiyanaar who is regarded as the watchman of the village and is supposed to patrol the village every night, mounted on a ghostly steed, a terrible sight to behold, scaring away the evil spirit. Aiyanaar shrines are known for enormous numbers of terracoatta figurines offered to the deity for fulfillment of vows or to appease the deity for fulfillment of desire.

            The Aiyanaar shrines usually has huge sized terracotta horses and other animal figures including elephant, cow, bull etc. They also have large number of human figures which are mostly of Muniswara or the saints. In their actual locations in Tamilnadu village, one finds numerous broken images of these animals and human characters piled in the compound of the shrine. The horses are special offering of the devotees to the deity, and represent the steed on which the deity rides in his nightly rounds. Aiyanaar is regarded by the villagers as a good and benevolent protector.

            The terracotta figurines in this exhibit complex are created by the velar potter artisans from Mallayoor village of Alangudi taluka in Puddukkotai district of Tamilnadu headed by Shri Rengasami Velar. The Velar artisans are also the priests of Aiyanaar shrines which acquaint us with the importance of potter in the popular ritualistic ceremonies of the region. According to the folk belief the Aiyanaar deity always resides in a sacred grove, no twig of which should be around on any pretence.

            The exhibit of Aiyanaar is not only an exhibit depicting a very important aspect of the village community of Tamilnadu; it is also the first largest independent terracotta exhibit complex of the Museum. It is also the first exhibit depicting the folk belief system and myth from a rural folk population, as also it is the first exhibit related to sacred grove in the Sangrahalaya, which is liked and appreciated by each and every museum visitor.